
उज्जैन के खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को लेकर अब कई नई बातें सामने आ रही हैं. सड़क चौड़ीकरण, मंदिर के भवन को हटाए जाने और मूर्ति के नहीं हटा पाने की चर्चाओं के बीच इसके करीब 1000 साल पुरानी होने की संभावना जताई जा रही है. अब प्रतिमा की उम्र और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को समझने के लिए विशेषज्ञों के बाद इतिहासकारों की मदद लिए जाने की बात सामने आई है. मामले में पुरातत्व विभाग ये कयास लगा रहा है कि प्रतिमा करीब 1000 साल पुरानी हो सकती है. इस बारे में भी जांच शुरू कर दी गई है.
उज्जैन में कंठाल चौराहे से छत्री चौक यानी बड़ा सराफा मार्ग तक सड़क चौड़ीकरण का काम सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत चल रहा है. इसी मार्ग पर स्थित खड़े हनुमान मंदिर का भवन और चाहरदीवारी सड़क की जद में आई थी. निर्माण का हिस्सा हटाए जाने के बाद मंदिर में विराजमान प्रतिमा को लेकर मामला संवेदनशील हो गया. पिछले कुछ दिनों में प्रतिमा को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आईं. मूर्ति ना हटा पाने को चमत्कार मानते हुए वहां पर बजरंगबली के दर्शन को आसपास के प्रदेशों से भी भक्त पहुंचने लगे हैं. इनमें गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के श्रद्धालु भी शामिल हैं. कई भक्त मंदिर में दर्शन करने के साथ प्रतिमा की रील बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं. इसके चलते खड़े हनुमान से जुड़े वीडियो लगातार ट्रेंड कर रहे हैं.
1000 साल पुरानी हो सकती है प्रतिमा
खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को लेकर सबसे ज्यादा उत्सुकता अब इसकी उम्र को लेकर है. बताया जा रहा है कि प्रतिमा के करीब 1000 वर्ष पुरानी होने की संभावना पर जांच की जा रही है. हालांकि अभी इसे अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता. प्रतिमा वास्तव में कितनी पुरानी है, इसे प्रमाणित करने के लिए विशेषज्ञ अध्ययन जरूरी होगा. यही वजह है कि अब इतिहासकारों और संबंधित विशेषज्ञों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है. उज्जैन पहले से ही प्राचीन धार्मिक और ऐतिहासिक परंपराओं के लिए जाना जाता है. इतिहासकार यह समझने की कोशिश कर सकते हैं कि प्रतिमा किस काल की शिल्प परंपरा से मिलती है. उसकी मुद्रा, चेहरे की बनावट, शरीर की संरचना, आभूषण और निर्माण शैली उस दौर के मंदिरों और मूर्तियों से कितनी समानता रखती है, यह भी जांच का हिस्सा हो सकता है.

170 साल पुराना मंदिर, लेकिन प्रतिमा उससे भी पुरानी
खड़े हनुमान मंदिर को स्थानीय स्तर पर करीब 170 साल पुराना बताया जाता है. अगर प्रतिमा की उम्र वास्तव में 1000 साल के आसपास निकलती है, तो स्वाभाविक रूप से सवाल उठेगा कि यह प्रतिमा वर्तमान मंदिर से पहले कहां थी? क्या उसी स्थान पर कोई पुराना धार्मिक स्थल मौजूद था? क्या प्रतिमा को किसी पुराने मंदिर या स्थान से यहां लाया गया था? या फिर वर्तमान मंदिर से पहले भी यहां किसी रूप में पूजा की परंपरा थी? इन सवालों के जवाब इतिहासकारों की पड़ताल से ही सामने आ सकते हैं.
मंदिर की दीवार हटी, प्रतिमा टेंट में विराजमान
सड़क चौड़ीकरण के लिए मंदिर की चाहरदीवारी और भवन के हिस्से को हटाया जा चुका है. फिलहाल खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को टेंट लगाकर सुरक्षित रखा गया है. मंदिर का स्वरूप बदलने के बावजूद श्रद्धालुओं की आवाजाही कम नहीं हुई. बल्कि पिछले कुछ दिनों में यहां लोगों की भीड़ बढ़ी है. सुबह से लेकर रात तक श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. मंगलवार शाम मंदिर परिसर में महाआरती का आयोजन हुआ. ढोल-ताशे बजे और हनुमान चालीसा का पाठ किया गया. बुधवार को संत समाज ने भी मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की. स्थानीय लोगों का कहना है कि खड़े हनुमान जी उज्जैन के पुराने धार्मिक जीवन का हिस्सा हैं और यहां आने वाले लोग लंबे समय से इस प्रतिमा को नमन करते रहे हैं.
प्रतिमा को लेकर ‘चमत्कार’ की चर्चा भी हुई
प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने को लेकर पिछले दिनों तरह-तरह की चर्चाएं सोशल मीडिया पर सामने आईं. कुछ लोगों ने दावा किया कि प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली और इसे हनुमान जी की दैवीय शक्ति से जोड़कर देखा. हालांकि जिला प्रशासन ने इन दावों पर स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर चल रही कई खबरें भ्रामक हैं. प्रशासन ने साफ किया कि अभी तक प्रतिमा को विस्थापित अथवा हटाने संबंधी कोई प्रयास मशीन से नहीं किया गया है.
संत समाज ने भी रखा अपना पक्ष
बुधवार को संत समाज के कई लोग खड़े हनुमान जी के दर्शन के लिए पहुंचे. संतों ने विधि-विधान से पूजा की और प्रतिमा को अन्यत्र स्थानांतरित किए जाने का विरोध किया. महंत राघवेंद्र दास महाराज ने प्रतिमा को यथास्थान रखने की अपील की. वहीं महानिर्मोही अखाड़े के गादीपति महंत विनीत गिरी महाराज ने कहा कि प्रशासन को जनभावनाओं का सम्मान करते हुए संवाद के जरिए समाधान निकालना चाहिए. इस बीच कांग्रेस नेताओं ने भी प्रतिमा को हटाए जाने की कथित योजना के विरोध में प्रदर्शन किया. हालांकि प्रशासन का कहना है कि प्रतिमा को हटाने की कोई कार्रवाई नहीं हुई है.