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'अमेरिका से भारत शिफ्ट हो जाएगा काम...' US ग्रीन कार्ड पर बोले HCL के पूर्व सीईओ!

अमेरिका की ओर से 9 आईटी फर्मों के लिए ग्रीन कार्ड बैन करने के बाद एचसीएल के पूर्व सीईओ का एक बयान आया है, जिसमें उन्‍होंने दावा किया है कि अमेरिका के इस कदम से भारत में ज्‍यादा अमेरिका के काम होंगे, जिससे अमेरिका के ज्‍यादातर टेक काम भारत में ट्रांसफर हो सकते हैं.

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अमेरिका से भारत में ट्रांसफर हो सकते हैं टेक काम. (Photo: ITG)
अमेरिका से भारत में ट्रांसफर हो सकते हैं टेक काम. (Photo: ITG)

HCL टेक्‍नोलॉजी के पूर्व सीईओ विनीत नायर ने शुक्रवार को अमेरिकी ग्रीन कार्ड प्रोग्राम बैन को लेकर बड़ा बयान दिया. उन्‍होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्‍ट में कहा कि अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप चाहते हैं कि कम भारतीय टेक कर्मचारी अमेरिका में आएं. इससे अनजाने में सही, लेकिन अधिक अमेरिकी टेक काम भारत में ट्रांसफर हो सकता है. 

यह बयान उनका तब आया, जब गुरुवार को अमेरिकी श्रम सचिव कीथ सोंडरिंग ने घोषणा की कि कई प्रमुख आईटी आउटसोर्सिंग फर्मों को प्रोग्राम फॉर इलेक्ट्रॉनिक रिव्यू मैनेजमेंट  (PERM) ग्रीन कार्ड प्रोसेसिंग फ्रेमवर्क से निलंबित कर दिया गया है.

नायर ने लिखा कि ट्रंप चाहते हैं कम भारतीय टेक वर्कर अमेरिका में आएं. जिसकार परिणाम ऐसा हो सकता है कि ज्‍यादा अमेरिकी टेक संबंधी काम भारत में ट्रांसफर हो जाए. उन्‍होंने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म एक्‍स पर लिखा कि जब उन्होंने कुछ बड़ी तकनीकी कंपनियों को PERM का उपयोग करने से प्रतिबंधित करने वाली अमेरिकी कार्रवाई के बारे में रिपोर्ट पढ़ी तो उन्हें कोई चिंता नहीं हुई. 

उन्‍होंने कुछ आंकड़े भी शेयर करते हुए कहा कि पिछले साल जारी किए गए 117,849 PERM सर्टिफिकेशन्स में से भारतीय आईटी कंपनियों का हिस्सा 1,400 से भी कम था यानी 2% से भी कम. इसलिए इसका सीधा प्रभाव जितना दिखता है उससे कम हो सकता है, लेकिन इसके पीछे कुछ और भी दिलचस्प चल रहा है.

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अमेरिकी टेक काम भारत में हो रहे ट्रांसफर 
उन्होंने बताया कि मूल आईटी मॉडल में, अगर अमेरिका में किसी ग्राहक को कोई महत्वपूर्ण काम होता था, तो भारत अपने इंजीनियरों को वहां भेजता था. फिर हमने पाया कि उस काम का अधिकांश हिस्सा भारत से ही किया जा सकता है. इस तरह ऑनसाइट-ऑफशोर मॉडल का जन्म हुआ. मैंने उस बदलाव को करीब से देखा है. शायद हम एक और बदलाव की शुरुआत में हैं. 

भारत में हो सकता है अमेरिकी टेक काम
इसके अलावा, नायर ने कहा कि जहां अमेरिका भारतीय प्रतिभाओं को वहां ले जाना मुश्किल बना रहा है, वहीं तकनीक भारत में छोटी टीमों के लिए तेजी से काम की जिम्मेदारी लेना आसान बना रही है. ऐसे में इसमें एक विडंबना है कि भारतीय कर्मचारियों के कम करने के चक्‍कर में अमेरिका, भारत में अमेरिकी काम का पलायन को तेज कर सकता है. हालांकि, उन्‍होंने यह भी कहा कि मेरा मतलब कोडिंग और मेंटेनेंस की नौकरियों की एक और लहर से नहीं है. 

विनीत नायर के अनुसार, अवसर आर्किटेक्चर, प्रोडक्‍ट इंजीनियरिंग, साइबर सुरक्षा, एआई, इंडस्‍ट्री सॉल्‍यूशन के साथ-साथ उत्पादों और बौद्धिक संपदा (आईपी) के स्वामित्व में निहित हैं. उन्होंने अमेरिकी ग्राहकों और कंपनियों के साथ काम करने वाले भारतीय कारोबारियों को भी सलाह दी. नायर ने कहा कि भारतीय टीमों को न्यूयॉर्क से केवल निर्देश प्राप्त नहीं करने चाहिए. उन्हें यह तय करने में मदद करनी चाहिए कि क्या बनाया जाएगा? उन्हें केवल एक वैश्विक बैंक के टेक प्लेटफॉर्म को बनाए रखने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि बैंक को फिर से डिजाइन करने में मदद करनी चाहिए. उन्हें केवल किसी और की समस्या को हल करने के लिए इंजीनियरों की आपूर्ति नहीं करनी चाहिए, बल्कि समस्या की जिम्मेदारी लेनी चाहिए. 

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अब ज्‍यादा मुश्किल काम कर सकती हैं कंपनियां
उन्होंने आगे कहा कि लगभग तीन दशकों तक, भारतीय आईटी क्षेत्र में वृद्धि और भारतीय आईटी रोजगार में वृद्धि साथ-साथ हुई, क्योंकि कंपनियां आमतौर पर अधिक कारोबार होने पर अधिक इंजीनियरों को नियुक्त करती थीं. लेकिन अब AI के आने के बाद एआई प्रोडक्‍टिविटी में सुधार होने के साथ ही ज्‍यादा मुश्किल काम करना आसान हो जाएगा. कंपनियां कर्मचारियों की संख्या में उसी दर से वृद्धि किए बिना अधिक पैसा कमा सकती हैं. उद्योग जगत को चेतावनी देते हुए नायर ने कहा कि भारतीय आईटी क्षेत्र ने पिछले 30 वर्षों में भारतीय प्रतिभाओं की कीमत पर ही प्रतिस्पर्धा की है, लेकिन अगले 30 वर्ष भारतीय प्रतिभाओं की क्षमता पर निर्भर करेंगे. 

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