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नोएल टाटा का मास्टर स्ट्रोक, टाटा संस का IPO नहीं लाने के लिए ये विलय फॉर्मूला!

Noel Tata New Plan: टाटा सन्स में टाटा ट्रस्ट्स की 66% हिस्सेदारी हिस्सेदारी है, अब टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस के बोर्ड को एक पुनर्गठन प्रस्ताव सौंपा है, जिसके तहत ग्रुप की दो गैर-लिस्टेड कंपनियों का विलय सीधे टाटा संस में किया जाएगा. 

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टाटा संस को लिस्टिंग से रोकने के लिए नया दांव. (Photo: ITG)
टाटा संस को लिस्टिंग से रोकने के लिए नया दांव. (Photo: ITG)

टाटा ग्रुप (Tata Group) में विवाद के बीच टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने एक बड़ा दांव चला है. वो हर हाल टाटा संस की लिस्टिंग नहीं कराना चाहते हैं, इसी कड़ी में टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा सन्स (TSPL) के बोर्ड को एक पुनर्गठन प्रस्ताव सौंपा है. 

दरअसल, आरबीआई के सख्त लिस्टिंग निर्देशों और अपर-लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी के दायरे से बाहर निकलने के लिए टाटा ट्रस्ट्स ने एक रणनीतिक कदम उठाया है. टाटा सन्स में टाटा ट्रस्ट्स की 66% हिस्सेदारी हिस्सेदारी है, अब टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस के बोर्ड को एक पुनर्गठन प्रस्ताव सौंपा है, जिसके तहत ग्रुप की दो गैर-लिस्टेड कंपनियों का विलय सीधे टाटा संस में किया जाएगा. 

क्या है रीस्ट्रक्चरिंग का पूरा प्लान?
इस प्रस्ताव के तहत ग्रुप की दो कंपनियां टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस (TESS) और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स (TCE) का विलय टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड में किया जाएगा. इस विलय के बाद बनने वाली संयुक्त इकाई का ऑपरेटिंग रेवेन्यू (31 मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार) बढ़कर 1,05,043 करोड़ रुपये हो जाएगा, जो कि कंपनी की कुल आय का 64.3% हिस्सा होगा. वहीं इसके विपरीत वित्तीय संपत्तियों से होने वाली आय 40,072 करोड़ रुपये ही रह जाएगी.

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लिस्टिंग और NBFC नियम क्यों लागू नहीं होंगे?
RBI के नियमों के अनुसार अगर किसी कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू कुल आय के बड़े हिस्से से आता है, तो वह नियम के तहत NBFC की श्रेणी में नहीं आती है. साथ ही विलय के बाद टाटा संस की कुल संपत्ति 2,00,158 करोड़ रुपये होगी, जिसमें समूह की कंपनियों में निवेश घटकर 88.5% (1,77,120 करोड़ रुपये) रह जाएगा. यह CIC के 90% वाले थ्रेशोल्ड नियम से नीचे है. यानी फिर RBI टाटा संस को लिस्टिंग के लिए नहीं कह सकता. क्योंकि कंपनी नियम के दायरे से बाहर हो जाएगी.

क्यों पड़ी इस कदम की जरूरत?
बता दें, सितंबर 2026 में ही RBI ने टाटा संस के कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) का दर्जा वापस लेने और अनलिस्टेड रहने के आवेदन को खारिज कर दिया था. इसके बाद टाटा संस के बोर्ड ने फरवरी 2027 तक शेयर बाजार में आईपीओ लाने की दिशा में कदम बढ़ाए थे.

हालांकि, टाटा ट्रस्ट्स का हमेशा से मानना रहा है कि टाटा संस को एक प्राइवेट होल्डिंग कंपनी के रूप में ही रहना चाहिए. इस विलय के माध्यम से टाटा संस दोबारा एक ऑपरेटिंग-कम-होल्डिंग कंपनी बन जाएगी, जिससे उसे अपना NBFC लाइसेंस और सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन (CoR) सरेंडर करने की कानूनी अनुमति मिल जाएगी.

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इस प्रस्ताव को अमलीजामा पहनाने के लिए अब भारतीय रिज़र्व बैंक के Non-Banking Financial Companies- Voluntary Amalgamation Directions, 2025 के तहत एनओसी और नियामक मंजूरियां लेनी होंगी.

नोएल टाटा IPO के विरोध में 

बता दें, 17 सितंबर 2026 टाटा संस की हुई बोर्ड बैठक में कंपनी की शेयर बाजार में लिस्टिंग और आईपीओ (IPO) लाने की प्रक्रिया शुरू करने को औपचारिक मंजूरी दी गई थी.  इस बैठक में RBI द्वारा कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के छूट आवेदन को खारिज करने के बाद यह फैसला लिया गया था. करीब 3 घंटे लंबी चली इस बैठक में बोर्ड ने IPO की दिशा में आगे बढ़ने के साथ-साथ अध्यक्ष एन. चंद्रशेखरन को अगले 5 वर्षों के लिए फिर से सेवा विस्तार देने के प्रस्ताव को 4-1 के बहुमत से पास किया था. टाटा ट्रस्ट्स के अध्यक्ष नोएल टाटा इस फैसले के विरोध में एकमात्र असंतुष्ट सदस्य थे. 

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