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चीनी के निर्यात पर लगा बैन, सरकार का बड़ा ऐलान

दुनिया के दूसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक भारत ने घरेलू कीमतें काबू में रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है. केंद्र सरकार ने कच्ची, सफेद और रिफाइंड चीनी के निर्यात पर सितंबर 2026 तक रोक लगा दी है. कमजोर गन्ना पैदावार और अल नीनो के असर की आशंका के बीच लिए गए इस फैसले से वैश्विक बाजार में चीनी की कीमतें तुरंत चढ़ गईं.

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चीनी निर्यात पर लगा प्रतिबंध सितंबर 2026 तक लागू रहेगा (सांकेतिक फोटो- Pexels)
चीनी निर्यात पर लगा प्रतिबंध सितंबर 2026 तक लागू रहेगा (सांकेतिक फोटो- Pexels)

केंद्र सरकार ने बुधवार को बड़ा ऐलान किया. इसमें चीनी के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया गया है. कच्ची, सफेद और रिफाइंड चीनी के निर्यात (एक्सपोर्ट) पर सितंबर 2026 तक रोक रहेगी. इस रोक को आगे भी बढ़ाया जा सकता है. ये फैसला देश में चीनी की कीमतों को कंट्रोल में रखने के लिए किया गया है.

बता दें कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है. केंद्र सरकार ने बुधवार को एक अधिसूचना में कहा कि उसने 30 सितंबर, 2026 तक या अगले आदेश तक तत्काल प्रभाव से चीनी निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है. बताया गया कि ये स्थानीय कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश है.

उत्पादन खपत से कम रहने की आशंका

भारत, ब्राजील के बाद दुनिया का सबसे बड़ा चीनी निर्यातक देश है. भारत ने घरेलू मांग से अधिक उत्पादन की उम्मीद में मिलों को 15 लाख मीट्रिक टन चीनी निर्यात करने की अनुमति दी थी. लेकिन अब आशंका है कि प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में गन्ने की पैदावार कमजोर होने की वजह से उत्पादन लगातार दूसरे वर्ष खपत से कम रहेगा.

अल नीनो वेदर कंडीशन की वजह से मानसून में रुकावट होने की आशंका है. इसने पैदावार के प्रारंभिक अनुमानों से कम होने के जोखिम को भी बढ़ा दिया है.

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रॉयटर्स की खबर के मुताबिक, डीलरों ने बताया कि निर्यात के लिए स्वीकृत 15 लाख मीट्रिक टन में से व्यापारियों ने लगभग 8 लाख टन के लिए अनुबंध पर हस्ताक्षर किए, जिसमें से 6 लाख टन से अधिक पहले ही भेजा जा चुका है.

सरकार ने भी कहा है कि जो माल पहले से निर्यात प्रक्रिया में है उनको नहीं रोका जाएगा. अधिसूचना में कहा गया है कि पहले ही माल की लोडिंग शुरू हो चुकी हो तो माल की ढुलाई की अनुमति दी जाएगी. ये अनुमति उन मामलों में भी दी जाएगी जहां शिपिंग बिल दाखिल किया गया हो और जहाज पहले ही किसी भारतीय बंदरगाह पर लंगर डाल चुका हो.

भारत द्वारा निर्यात पर प्रतिबंध के ऐलान के बाद न्यूयॉर्क में कच्चे चीनी के वायदा भाव में 2% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि लंदन में सफेद चीनी के वायदा भाव में 3% की उछाल आया.

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