शेयर बाजार में सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन तूफानी तेजी के साथ कारोबार की शुरुआत हुई. अमेरिका से एक खबर आते ही सेंसेक्स-निफ्टी ने गदर मचा दिया. दरअसल, अमेरिकी मिडटर्म इलेक्शन के रिजल्ट आ गए हैं और इसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी को बड़ी हार का सामना करना पड़ा है. इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिला, जो देखते ही देखते क्रैश हो गईं.
इससे दुनियाभर के शेयर मार्केट्स का सेंटीमेंट सुधरा और विदेशों से मिले पॉजिटिव संकेतों की वजह से Sensex-Nifty रॉकेट की रफ्तार से भागते हुए दिखाई दिए. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स ओपनिंग के साथ ही 1600 अंक से ज्यादा की छलांग लगा गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 400 अंक से ज्यादा उछल गया.
सेंसेक्स-निफ्टी खुलते ही बने रॉकेट
शेयर बाजार में गुरुवार को बीएसई का सेंसेक्स इंडेक्स अपने पिछले बंद 77,301 की तुलना में तूफानी तेजी लेकर खुला और फिर महज कुछ सेकंड में ही 1621 अंकों की उछाल के साथ 78,922 के लेवल पर पहुंचकर कारोबार करने लगा. BSE Sensex के जैसी ही चाल 50 शेयरों वाले एनएसई निफ्टी इंडेक्स की नजर आए. NSE Nifty बुधवार के अपने बंद 23,960 की तुलना में उछाल के साथ खुला और फिर 432 अंक की तेजी लेकर 24,392 पर जा पहुंचा.
ट्रंप की हार का मना जश्न
अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी को मिडटर्म चुनाव में करारी हार (Donald Trump Lost Election) का सामना करना पड़ा है. रिपब्लिकन पार्टी को इलेक्शन रिजल्ट में बड़ा झटका दिया है और डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में बहुमत हासिल कर लिया है. प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों पर चुनाव हुए. रिजल्ट पर नजर डालें, तो डेमोक्रेटिक पार्टी ने 228 सीटें जीतीं, जबकि रिपब्लिकन पार्टी को 139 सीटें मिलीं. सदन में बहुमत के लिए 218 सीटों की जरूरत होती है. ट्रंप की हार के बाद अमेरिकी शेयर बाजार भी जश्न मनाता हुआ नजर आया और डाउ जोन्स में तो तूफानी तेजी देखने को मिली.
झटके में कच्चे तेल की कीमतें क्रैश
इधर डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में हारे, तो दूसरी ओर एक झटके में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें क्रैश (Crude Oil Price Crash) हो गईं, जो लंबे समय से भारत समेत दुनियाभर के शेयर बाजारों का सेंटीमेंट खराब कर रही थीं. खबर लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड का दाम करीब 10 फीसदी क्रैश होकर 90 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया था. तेल की कीमतें क्रैश होने से दुनियाभर में खासतौर पर तेल आयात पर निर्भर देशों में महंगाई का जोखिम घटता दिखाई दे रहा है और भारत भी इनमें शामिल है.