विदेश में रहने वाले भारतीयों यानी एनआरआई (Non-Resident Indian) के लिए भारत में निवेश करना आसान होने जा रहा है. सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने ऐसा प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत एनआरआई अपने मौजूदा देश से ही डिजिटल तरीके से इंवेस्टमेंट अकाउंट खोल सकेंगे. अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो अकाउंट खोलने के लिए भारत आने की जरूरत काफी हद तक खत्म हो सकती है.
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब पिछले कुछ रेगुलेटरी बदलावों से एनआरआई के लिए भारतीय शेयर मार्केट में निवेश करना आसान हुआ है, लेकिन अकाउंट ऑनबोर्डिंग की प्रक्रिया अब भी बड़ी अड़चन बनी हुई है. जेरोधा (Zerodha) के फाउंडर और सीईओ नितिन कामथ ने भी इस समस्या को भारतीय शेयर मार्केट में एनआरआई इंवेस्टमेंट की राह का सबसे बड़ा रोड़ा बताया है.
क्या बदलेगा?
SEBI के नए कंसल्टेशन पेपर में प्रस्ताव दिया गया है कि एनआरआई अपने निवास वाले देश से इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर का इस्तेमाल कर इंवेस्टमेंट अकाउंट खोल सकें. इससे अकाउंट ओपनिंग और जरूरी दस्तावेजों की प्रक्रिया का बड़ा हिस्सा ऑनलाइन पूरा किया जा सकेगा. अगर यह प्रस्ताव अंतिम नियम का हिस्सा बनता है, तो विदेश में रहने वाले भारतीयों को सिर्फ अकाउंट खोलने के लिए भारत आने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इससे पूरी प्रक्रिया तेज और सुविधाजनक होने की उम्मीद है.
अभी कहां आती है परेशानी?
नितिन कामथ के मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था में एनआरआई के लिए डिजिटल तरीके से अकाउंट खोलना पूरी तरह आसान नहीं है. कई मामलों में उन्हें भारत में मौजूद रहना पड़ता है. विदेश में रहने वाले निवेशकों को फिजिकल पेपरवर्क पूरा करना पड़ता है और दस्तावेजों को इंटरनेशनल कूरियर के जरिए भेजने में अतिरिक्त समय लगता है. इस पूरी प्रक्रिया के कारण अकाउंट खोलने में कई सप्ताह और कुछ मामलों में महीनों तक का समय लग सकता है. SEBI का प्रस्ताव इस समस्या को डिजिटल ऑनबोर्डिंग के जरिए दूर करने की कोशिश है.
पहले से क्या हुआ है आसान?
कामथ के मुताबिक, पहले हुए रेगुलेटरी बदलावों के बाद एनआरआई इंवेस्टर्स के लिए भारतीय शेयर मार्केट में निवेश की प्रक्रिया पहले की तुलना में सरल हुई है. अब कई एनआरआई भारतीय शेयर मार्केट में निवेश के लिए NRO Non-PIS अकाउंट का इस्तेमाल कर सकते हैं. इन अकाउंट्स में रेजिडेंट अकाउंट जैसी कई सुविधाएं उपलब्ध हैं. इनके जरिए इंट्राडे ट्रेडिंग, BTST और F&O जैसी गतिविधियां भी की जा सकती हैं. इसके अलावा इन अकाउंट्स के लिए CP कोड की जरूरत नहीं होती. हालांकि, अकाउंट खोलने की शुरुआती प्रक्रिया अब भी काफी हद तक फिजिकल होने के कारण निवेशकों के लिए यह बड़ी बाधा बनी हुई है.
2-3 हफ्ते का काम 1-2 दिन में?
नितिन कामथ का मानना है कि अगर डिजिटल ऑनबोर्डिंग की व्यवस्था लागू होती है, तो अकाउंट खोलने में लगने वाला समय काफी कम हो सकता है. उनके मुताबिक, जिस प्रक्रिया में अभी दो-तीन सप्ताह या कई बार महीनों का समय लग जाता है, वह भविष्य में एक-दो दिन में पूरी हो सकती है. कामथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए इसे SEBI का प्रैक्टिकल कदम बताया. उन्होंने लंबे समय से एनआरआई के लिए भारत में निवेश की प्रक्रिया आसान बनाने की जरूरत पर जोर दिया है.
भारत के लिए क्यों अहम है NRI निवेश?
एनआरआई इंवेस्टर्स भारतीय कैपिटल मार्केट के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं. नितिन कामथ के मुताबिक, विदेश में रहने वाले भारतीयों के पास निवेश के लिए बड़ी पूंजी हो सकती है और वे भारतीय बाजार में लंबे समय तक कैपिटल फ्लो का एक मजबूत स्रोत बन सकते हैं. अगर अकाउंट खोलने और निवेश की मौजूदा व्यावहारिक बाधाएं कम होती हैं, तो एनआरआई इंवेस्टर्स का आधार काफी बढ़ सकता है. इससे भारतीय शेयर मार्केट में फॉरेन कैपिटल का फ्लो बढ़ने के साथ डॉलर के मुकाबले रुपये को भी समर्थन मिल सकता है.
एनआरआई इंवेस्टर्स को फायदा होगा?
अगर SEBI का प्रस्ताव अंतिम नियम के रूप में लागू होता है, तो विदेश में रहने वाले भारतीयों को निवेश अकाउंट खोलने के लिए भारत आने की जरूरत नहीं पड़ेगी. पेपरवर्क, इंटरनेशनल कूरियर और लंबी प्रक्रिया से जुड़ी परेशानियां भी कम हो सकती हैं. हालांकि, फिलहाल यह प्रस्ताव कंसल्टेशन स्टेज में है. अंतिम नियमों में बदलाव संभव है और डिजिटल ऑनबोर्डिंग किस तरीके से लागू होगी, यह SEBI के अंतिम फैसले के बाद ही स्पष्ट होगा. अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो विदेश में रहने वाले भारतीयों के लिए भारतीय शेयर बाजार में निवेश की सबसे बड़ी व्यावहारिक अड़चनों में से एक दूर हो सकती है.