scorecardresearch
 

14 साल के छात्र ने बना डाली ‘केमिकल नोज’, चींटी से आया आइडिया, जानें पूरी कहानी

ऑनलाइन हो या किसी दोस्त का घर, ये पता लगाना आसान नहीं होता है कि उसमें मूंगफली, काजू या किसी दूसरे एलर्जेन की मौजूदगी है या नहीं. इसी परेशानी को हल करने की कोशिश अमेरिका के टेक्सास के 14 साल छात्र समविथ महादेवन ने की है. उन्होंने एक ऐसा छोटा डिवाइस तैयार किया है, जो खाने से निकलने वाले केमिकल संकेतों का विश्लेषण कर संभावित फूड एलर्जेंस की पहचान कर सकता है. 

Advertisement
X
चींटी से आया आइडिया, बना दी ये डिवाइस.
चींटी से आया आइडिया, बना दी ये डिवाइस.

अमेरिका के टेक्सास में रहने वाले 14 साल के छात्र समविथ महादेवन ने एक ऐसा डिवाइस तैयार किया है, जो खाने में मौजूद कुछ आम एलर्जेंस का पता लगाने में मदद कर सकता है. इस डिवाइस को उन्होंने ‘The Allergent’ नाम दिया है. यह सेंसर और मशीन लर्निंग की मदद से खाने से निकलने वाले केमिकल संकेतों को पहचानता है. समविथ खुद गंभीर फूड एलर्जी से जूझते हैं. कई बार बिना लेबल वाले या दूसरे लोगों के बनाए खाने में मौजूद एलर्जेंस की जानकारी न होने से उनके लिए खाना जोखिम भरा हो जाता था.

इसी परेशानी को दूर करने के लिए उन्होंने ऐसा डिवाइस बनाने के लिए प्रेरित किया, जो खाने को छुए बिना उसमें मौजूद संभावित एलर्जेंस का पता लगाने में मदद करता है. समविथ को यह आइडिया चींटियों से भी मिला. उन्होंने देखा कि चींटियां रासायनिक संकेतों के जरिए दूर से भोजन का पता लगा सकती हैं. इसके बाद उन्होंने सोचा कि इसी तरह खाने से निकलने वाली गंध या रासायनिक संकेतों का इस्तेमाल एलर्जेंस की पहचान के लिए क्यों न किया जाए. 

कैसे काम करती है ‘केमिकल नोज’?

इस डिवाइस में कम कीमत वाला VOC यानी Volatile Organic Compound सेंसर लगाया गया है. यह खाने के आसपास हवा में मौजूद छोटे रासायनिक यौगिकों को सेंस करता है. इसके बाद मशीन लर्निंग सिस्टम इन संकेतों के पैटर्न को पहचानकर संभावित एलर्जेन का अनुमान लगाता है. डिवाइस को इलेक्ट्रॉनिक्स के जरिए वायरलेस तरीके से फोन से भी जोड़ा गया है.

Advertisement

समविथ ने इस सिस्टम को मूंगफली, अंडे, पिस्ता, बादाम, काजू और अखरोट जैसे एलर्जेंस के नमूनों से ट्रेन किया. उन्होंने इसके लिए 2,048 से ज्यादा टेस्ट रन किए. इसके बाद कुकीज, मफिन, करी और दूसरे वास्तविक खाद्य पदार्थों पर भी इसका परीक्षण किया. टेस्ट के दौरान डिवाइस ने एलर्जेंस की पहचान 94 से 97 प्रतिशत तक की सटीकता के साथ की. हालांकि, यह अभी एक छात्र का विकसित किया हुआ प्रोजेक्ट है और इसे मेडिकल जांच के लिए प्रमाणित डिवाइस नहीं माना जाना चाहिए. 

14 साल की उम्र में मिला बड़ा सम्मान

समविथ का यह प्रोजेक्ट 2024 थर्मो फिशर साइंटिफिक जूनियर इनोवेटर्स चैलेंज में फाइनलिस्ट बना. उनके इस आविष्कार के लिए उन्हें $10,000 कालेमेल्सन फाउंडेशन अवॉर्ड भी मिला. समविथ उस समय ऑस्टिन, टेक्सास के Canyon Vista Middle School में 7वीं कक्षा के छात्र थे. वह आगे चलकर बायोमेडिकल इंजीनियर बनना चाहते हैं.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement