प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से अपने संबोधन में एक लक्ष्य देशवासियों के साथ साझा किया. यह लक्ष्य था भारत को 2047 तक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने का. अब नीति आयोग ने इस लक्ष्य को हासिल करने का रोडमैप सामने रखा है, जिसके तहत 12 प्रमुख सेक्टरों पर फोकस करने की रणनीति अपनाई गई है. नीति आयोग की नई रिपोर्ट के मुताबिक, इन सेक्टरों में उत्पादन बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की हिस्सेदारी मजबूत करने की बड़ी संभावनाएं हैं.
फिलहाल देश के ग्रॉस वैल्यू एडेड (किसी देश, राज्य या क्षेत्र के भीतर उत्पादित कुल वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य) में मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी करीब 17.5% है. वित्त वर्ष 2021-22 में इस सेक्टर ने करीब 1.85 करोड़ रोजगार को सपोर्ट किया था. नीति आयोग की रिपोर्ट 'Key Sectors to Position India as a Global Manufacturing Hub' में भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की क्षमता और चुनौतियों का आकलन किया गया है. आयोग ने 62 सेक्टरों का अध्ययन करने के बाद 12 सेक्टरों की पहचान की है, जिनमें आने वाले वर्षों में बड़े स्तर पर विस्तार की संभावना है. यह रणनीति 2047 तक भारत को 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के व्यापक लक्ष्य से भी जुड़ी है.
किन 12 सेक्टरों पर फोकस?
नीति आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक्स, टेलीकॉम इक्विपमेंट, सोलर PV, फार्मास्यूटिकल्स, केमिकल्स, ऑटोमोबाइल, डिफेंस और ड्रोन समेत 12 सेक्टरों को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में रखा है. इनमें से चार सेक्टरों का रिपोर्ट में विस्तार से अध्ययन किया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए निवेशकों के लिए मुनाफे वाले अवसर तैयार करने होंगे. साथ ही बड़े पैमाने पर उत्पादन और स्केल की इकोनॉमी हासिल करना जरूरी होगा. नीति आयोग के सदस्य अशोक कुमार लाहिड़ी के मुताबिक, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश की जरूरत होगी और इसमें निजी क्षेत्र की भूमिका अहम रहेगी.
केमिकल्स सेक्टर में एक्सपोर्ट का बड़ा अवसर
केमिकल्स सेक्टर को भारत के लिए बड़े अवसर वाले क्षेत्रों में शामिल किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, अगले पांच वित्त वर्षों में देश में केमिकल्स की खपत को हर साल करीब 10-11% की दर से बढ़ाना होगा. वहीं, उत्पादन में लगभग 14% सालाना वृद्धि की जरूरत होगी. रिपोर्ट में 2030 तक स्पेशियलिटी केमिकल्स में करीब 45 अरब डॉलर, इनऑर्गेनिक केमिकल्स में 5-10 अरब डॉलर और पेट्रोकेमिकल्स में करीब 26 अरब डॉलर के एक्सपोर्ट अवसर की पहचान की गई है.
टेक्सटाइल्स सेक्टर में बड़े पैमाने पर रोजगार
टेक्सटाइल सेक्टर भारत की मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. रिपोर्ट के मुताबिक, टेक्सटाइल्स की हिस्सेदारी भारत की GDP में करीब 2%, मैन्युफैक्चरिंग GVA में 11% और मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट में 9% है. FY25 में भारत ने करीब 37.7 अरब डॉलर के टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स का एक्सपोर्ट किया. इस सेक्टर ने 4.5 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार दिया. 2024 में ग्लोबल एक्सपोर्ट में 4.1% हिस्सेदारी के साथ भारत दुनिया का छठा सबसे बड़ा टेक्सटाइल एक्सपोर्टर रहा. हालांकि, सेक्टर के सामने कुछ बड़ी चुनौतियां भी हैं. करीब 80% मैन्युफैक्चरिंग क्षमता MSME क्लस्टर्स में है. रिपोर्ट में मैन-मेड फाइबर (MMF) में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने, कच्चे माल की लागत कम करने, नई तकनीक अपनाने और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक रिश्ते मजबूत करने पर जोर दिया गया है.
टेलीकॉम सेक्टर में चीन पर निर्भरता बड़ी चुनौती
टेलीकॉम और नेटवर्क इक्विपमेंट का घरेलू बाजार FY25 में करीब 25 अरब डॉलर का था. इसके 2032 तक बढ़कर लगभग 50 अरब डॉलर होने का अनुमान है. इसके बावजूद भारत का एक्सपोर्ट प्रदर्शन अभी सीमित है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 से 2024 के बीच टेलीकॉम और नेटवर्क इक्विपमेंट का सालाना एक्सपोर्ट करीब 0.6-1 अरब डॉलर रहा, जबकि इंपोर्ट 4-5 अरब डॉलर के आसपास था. अहम कंपोनेंट्स के मामले में चीन पर निर्भरता 80% से ज्यादा है. ऐसे में भारत के लिए सिर्फ अंतिम उत्पादों का निर्माण बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा. घरेलू स्तर पर महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित करना भी जरूरी होगा.
सोलर PV में इनपुट्स पर निर्भरता
सोलर PV सेक्टर में भारत ने मॉड्यूल और सेल मैन्युफैक्चरिंग में अपनी क्षमता बढ़ाई है. हालांकि, पॉलीसिलिकॉन और वेफर्स जैसे महत्वपूर्ण इनपुट्स के लिए देश अब भी आयात पर निर्भर है. रिपोर्ट के मुताबिक, क्लीन एनर्जी से जुड़े इस सेक्टर में भारत को पूरी वैल्यू चेन विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ना होगा. इससे आयात निर्भरता कम करने के साथ घरेलू उत्पादन और एक्सपोर्ट क्षमता को बढ़ाया जा सकता है.
सिर्फ उत्पादन बढ़ाना ही काफी नहीं
नीति आयोग की रिपोर्ट का व्यापक संदेश यह है कि 2047 तक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनने के लिए भारत को सिर्फ उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर निर्भर नहीं रहना होगा. देश को ग्लोबल वैल्यू चेन में ऊपर जाना होगा और ज्यादा वैल्यू वाले उत्पादों का निर्माण बढ़ाना होगा. इसके लिए अहम कंपोनेंट्स का घरेलू उत्पादन, नई तकनीक का इस्तेमाल, उत्पादकता में सुधार, निजी निवेश को आकर्षित करना और एक्सपोर्ट क्षमता बढ़ाना जरूरी होगा. साथ ही कच्चे माल और महत्वपूर्ण तकनीकी इनपुट्स के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम करनी होगी. आने वाले वर्षों में इन 12 सेक्टरों पर नीति और निवेश का फोकस भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को नई दिशा दे सकता है. हालांकि, 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन, निजी निवेश और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत करना सबसे अहम होगा.