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चोरवाड़ का वो लड़का, जिसने करोड़ों भारतीयों को बड़ा सपना देखना सिखाया

गुजरात के छोटे-से गांव चोरवाड़ में एक स्कूल टीचर के घर जन्मे धीरूभाई अंबानी ने अपनी मेहनत, दूरदर्शिता और बड़े सपने देखने के हौसले से रिलायंस की नींव रखी.

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धीरूभाई अंबानी की कहानी, छोटे गांव से रिलायंस तक का सफर (Photo-ITG)
धीरूभाई अंबानी की कहानी, छोटे गांव से रिलायंस तक का सफर (Photo-ITG)

कुछ कहानियां इतनी शानदार होती हैं कि सुनकर फ़िल्मी लगती हैं. पर जब पता चलता है कि वे सच हैं, तो मन में अलग ही जोश भर जाता है, यह कहानी भी ऐसी ही है, यह गुजरात के एक छोटे-से गांव से शुरू होती है और उस मुक़ाम तक पहुंचती है जहां आज रिलायंस खड़ा है, इसके नायक हैं धीरूभाई अंबानी, उन्होंने सिर्फ अपने लिए बड़ा सपना नहीं देखा, उन्होंने करोड़ों भारतीयों को यह यक़ीन भी दिलाया कि बड़े सपने देखना उनका भी हक़ है.

गुजरात का छोटा-सा गांव, चोरवाड़

धीरूभाई की कहानी गुजरात के छोटे-से गांव चोरवाड़ से शुरू होती है, वे एक स्कूल टीचर के बेटे थे. यानी न कोई बड़ा कारोबारी नाम था, न कोई बड़ी विरासत जो उनके लिए रास्ते खोल दे, उनके पास जो था, वह था एक सपना और उसे पूरा करने की हिम्मत, उस वक़्त शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इस गांव का एक लड़का आगे चलकर देश की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक की नींव रखेगा.

17 साल की उम्र और यमन का पेट्रोल पंप

ज़्यादातर बच्चे 17 साल की उम्र में अपने भविष्य को लेकर उलझन में होते हैं, धीरूभाई उस उम्र में यमन में थे और एक पेट्रोल पंप पर काम कर रहे थे, काम छोटा था, पर सपना छोटा नहीं था. कहते हैं कि इंसान की असली पहचान इससे नहीं होती कि वह कहां खड़ा है, वह इससे होती है कि वह कहां पहुंचना चाहता है. धीरूभाई की नज़र हमेशा उस ऊंचाई पर थी जो अभी दूर थी.

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वतन वापसी और मुंबई की शुरुआत

इसके बाद वे भारत लौट आए और मुंबई में एक छोटा-सा ट्रेडिंग बिज़नेस शुरू किया, शुरुआत छोटी थी, पर उसके पीछे इरादे बहुत बड़े थे, इसी छोटे कारोबार से वह सफ़र शुरू हुआ जो आगे चलकर दुनिया के सबसे बड़े बिज़नेस साम्राज्यों में से एक तक पहुंचा, ऐसा साम्राज्य, जिसकी क़ीमत अरबों में आंकी जाती है.

कामयाबी के पीछे की चार चीज़ें
 

इतना बड़ा सफ़र किसी एक चीज़ से नहीं होता, धीरूभाई की कामयाबी के पीछे चार बातें थी.

  • महत्वाकांक्षा: बड़ा सोचने का हौसला.
  • मेहनत और धैर्य: हार न मानने की आदत.
  • उद्यमी समझ: मौक़े पहचानने की नज़र और जोखिम उठाने का दम.
  • भारत और भारतीयों पर भरोसा: यह सबसे ख़ास थी.


उनका यक़ीन था कि इस देश के लोगों में बहुत दम है, यही यक़ीन आगे चलकर उनके सबसे बड़े फ़ैसले की वजह बना.

1977: जब आम आदमी को मिला बुलावा
 

यह फ़ैसला था रिलायंस का 1977 का पब्लिक इश्यू, अपने इसी भरोसे की वजह से धीरूभाई वह पहले भारतीय बने जिसने आम भारतीयों को रिलायंस की तरक़्क़ी में हिस्सेदार बनने का न्योता दिया. यह रिलायंस और भारत के निवेशकों के रिश्ते का एक निर्णायक अध्याय था. इस पब्लिक इश्यू के साथ उन्होंने शेयरों की मालिकी को आम घरों के सपनों से जोड़ दिया. संदेश साफ़ था कि आप सिर्फ़ तमाशबीन बनकर देश की आर्थिक तरक़्क़ी को मत देखिए, उसमें भागीदार बनिए.

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पहला शेयर, पहला भरोसा
बहुत-से भारतीयों के लिए यह देश के भविष्य में उनका पहला शेयर था, कल्पना कीजिए उस परिवार की, जिसने पहली बार अपना नाम किसी कंपनी के हिस्सेदारों में देखा होगा, उस दिन उन्हें लगा होगा कि वे सिर्फ़ दर्शक नहीं, इस कहानी का हिस्सा हैं.

और जिन लोगों ने शुरू में उन पर भरोसा किया, उनमें से बहुतों की छोटी-सी रक़म समय के साथ ऐसी संपत्ति बन गई जिसका उन्होंने कभी सपना भी नहीं देखा था, आम परिवार धीरूभाई के साथ-साथ अमीर होते गए.

जब "बड़ा बनना" कुछ लोगों का हक़ नहीं रहा
 

धीरूभाई से पहले माना जाता था कि बड़ी कंपनी खड़ी करना कुछ ख़ास लोगों का ही काम है, उन्होंने इस सोच को बदल दिया, गुजरात के एक छोटे-से गांव के स्कूल टीचर का बेटा भी साम्राज्य खड़ा कर सकता है, यह उन्होंने करके दिखाया और यह भी कि आम परिवार भी कंपनी के साथ जुड़कर उसके मुनाफ़े में हिस्सेदार बन सकते हैं.

आज रिलायंस का अपने निवेशकों के साथ जो रिश्ता है, उसकी नींव इसी ऐतिहासिक पल में पड़ी थी.

सपना जो सबका बना

इस कहानी की ख़ूबसूरती यह है कि धीरूभाई ने अपने सपने को अपने तक सीमित नहीं रखा, उन्होंने उसे बांटा, रिलायंस की सोच यही है कि किसी भी कंपनी की सबसे बड़ी उपलब्धि सिर्फ़ अपनी कामयाबी नहीं है, असली उपलब्धि यह है कि लाखों भारतीयों को उस कामयाबी का हिस्सा बनने का मौक़ा मिले.
"बड़ा सपना देखो" का मतलब यही था कि सपना इतना बड़ा हो कि उसमें सबके लिए जगह हो. 

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धीरूभाई अंबानी की कहानी सिर्फ इतनी ही नहीं है. एक छोटे कारोबारी से देश के बड़े उद्योगपतियों में शामिल होने तक के इस सफर में कई ऐसे मोड़ आए, जिन्होंने भारतीय कारोबार की तस्वीर बदल दी. अगले आर्टिकल में जानिए, कैसे धीरूभाई ने अपने सपनों को हकीकत में बदला और रिलायंस को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया.

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