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BRICS 2026: क्या है 'ग्लोबल साउथ'? जिसे मजबूत बनाने पर PM मोदी ने दिया जोर

PM Modi On Global South: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स 2026 के अपने संबोधन में ग्लोबल साउथ को सशक्त बनाने की अपील की और इसे Rule Takers से बदलकर Rule Shapers में बदलना होगा.

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ग्लोबल साउथ में शामिल देशों को मजबूत बनाने की पीएम मोदी की अपील. (Photo: AP)
ग्लोबल साउथ में शामिल देशों को मजबूत बनाने की पीएम मोदी की अपील. (Photo: AP)

नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit 2026) की शुरुआत हो गई है. इसके अध्यक्ष के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने अपने शुरुआती भाषण में कई अहम मुद्दों का जिक्र किया और इसके 'ग्लोबल साउथ' भी महत्वपूर्ण था, जिसे सश्क्त बनाने के लिए कदम उठाए जाने की अहमियत पर पीएम ने जोर दिया. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि फिलहाल Global South वैश्विक संकट के पहली कतार में है और हमें मिलकर इसे रोल टेकर से रोल शेपर बनाने के प्रयास करने होंगे.

क्या है ग्लोबल साउथ, क्यों महत्वपूर्ण? 
यहां सबसे पहले जान लेना जरूरी हैं कि आखिर ये ग्लोबल साउथ (Global South) है क्या जिसे लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चिंता जता रहे हैं और इसे सशक्त बनाने की अपील कर रहे हैं. तो बता दें कि ये उन विकासशील, कम विकसित या उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है, जो खासतौर पर एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और ओशिनिया में हैं.

दुनिया की आबादी का बड़ा हिस्सा ग्लोबल साउथ में रहता है. ऐसे में ये बड़ा महत्वपूर्ण हो जाता है, आज ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ में उभरती अर्थव्यवस्थाओं का रोल अहम है. ऐसा इसलिए क्योंकि इस समूह में शामिल देशों के पास तेल और गैस, लिथियम, कॉपर समेत  अन्य जरूरी रेयर अर्थ मिनरल्स का खजाना है. 

PM मोदी ने क्या कहा? 
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की उपस्थिति में ग्लोबल साउथ को लेकर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महत्वपूर्ण अपील करते हुए इस बात पर जोर दिया कि विकासशील देशों को नियम मानने वाले से नियम बनाने वाला बनना होगा. Global South अभी वैश्विक संकट की पहली कतार में है और हमें मिलकर इसे अधिक सशक्त बनाना होगा. 

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प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में जहां ग्लोबल साउथ में शामिल देश आगे हैं, वहीं निर्णय लेने के समय वे हाशिए पर रहते हैं. उन्होंने कहा कि, 'हमें ग्लोबल साउथ को अब नियम मानने वालों से नियम बनाने वालों में बदलने के लिए काम करना होगा.'

पिरामिड की तरह वैश्विक शासन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में आगे कहा कि वैश्विक शासन की वर्तमान संरचना पर नजर डालें, तो ये एक पिरामिड की तरह है. शक्ति और निर्णय लेने की शक्ति टॉप लेवल पर केंद्रित है, जबकि निचले स्तरों में वे देश शामिल हैं, जो इन लिए गए निर्णयों से प्रभावित होते हैं, लेकिन उन्हें आकार देने में असमर्थ हैं.

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