नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने शनिवार जम्मू-कश्मीर में 10 जगहों पर छापेमारी की. यह तलाशी प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स और उनके स्थानीय 'ओवर ग्राउंड वर्कर्स' (OGW) के कथित नेटवर्क से जुड़ी सीमा-पार आतंकी साज़िश के सिलसिले में ली गई.
यह तलाशी कुपवाड़ा, कुलगाम, बांदीपोरा, बारामूला और सोपोर में ली गई. इसका मकसद साज़िश से जुड़े और सबूत जुटाना और घुसपैठ करने वाले आतंकियों को लॉजिस्टिकल और दूसरी मदद देने वाले लोगों की भूमिका का पता लगाना था.
यह मामला शुरू में श्रीनगर के ज़कूरा पुलिस स्टेशन में FIR नंबर 0024/2026 के तौर पर दर्ज किया गया था. बाद में NIA ने इसे UA(P) एक्ट, 1967 की धारा 23, आर्म्स एक्ट, 1959 की धारा 7 और 25, और एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट, 1908 की धारा 4 के तहत RC-02/2026/NIA/JMU के तौर पर फिर से दर्ज किया.
जांच तब शुरू हुई जब 31 मार्च 2026 की देर रात एक नाका पॉइंट पर LeT से जुड़े एक OGW को गिरफ्तार किया गया. उसके पास से एक हैंड ग्रेनेड और ज़िंदा कारतूस बरामद हुए. इसके बाद हुई जांच में साज़िश से जुड़े पाकिस्तानी नागरिकों की गिरफ्तारी हुई और स्थानीय सपोर्ट नेटवर्क के सदस्यों की पहचान और उनकी संदिग्ध भूमिकाओं का पता चला.
अब तक की जांच से पाकिस्तान में बैठे LeT हैंडलर्स और उनके स्थानीय साथियों के बीच संबंधों का पता चला है. इन साथियों का इस्तेमाल घुसपैठ करने वाले आतंकियों के साथ बातचीत, उनकी आवाजाही, उन्हें छिपाने, पनाह देने और दूसरी लॉजिस्टिकल मदद देने के लिए किया जा रहा था.
NIA पूरे नेटवर्क का पता लगाने और उनकी गतिविधियों के दायरे को समझने के लिए फाइनेंशियल ट्रेल, बातचीत के तरीकों, आरोपियों की आवाजाही और हथियारों व विस्फोटकों के सोर्स और सप्लाई चेन की भी जांच कर रही है.
NIA साज़िश में शामिल सभी लोगों की पहचान करने और उनकी भूमिकाओं का पता लगाने के लिए अपनी जांच जारी रखे हुए है. जांच के नतीजों के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें गिरफ्तारी और रिकवरी शामिल हो सकती है.