भारत में एप्पल (Apple) का कारोबार लगातार नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है. इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में कंपनी का राजस्व 20% से अधिक बढ़कर करीब 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. इस रिकॉर्ड परफॉर्मेंस के पीछे आईफोन की मजबूत बिक्री और प्रीमियम स्मार्टफोन की बढ़ती मांग को सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है.
काउंटरपॉइंट रिसर्च (Counterpoint Research) के अनुसार, FY26 में भारत में आईफोन की शिपमेंट 24 फीसदी बढ़कर करीब 1.4 करोड़ (14 मिलियन) यूनिट रही. इससे एप्पल का भारत में कारोबार पहली बार 10 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गया. इससे पहले FY25 में एप्पल इंडिया का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू करीब 79,000 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था.
iPhone की रिकॉर्ड बिक्री से मिला बड़ा बूस्ट
भारत में एप्पल की कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा आईफोन से आता है. रिकॉर्ड शिपमेंट की बदौलत FY26 में कंपनी का रेवेन्यू करीब 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया. भारत अब एप्पल के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में शामिल हो गया है.
भारत क्यों बन रहा है एप्पल का बड़ा बाजार?
काउंटरपॉइंट रिसर्च के को-फाउंडर और वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) नील शाह का कहना है कि भारत एप्पल के लिए मजबूत ग्रोथ मार्केट बन चुका है. उनके मुताबिक, बड़ी संख्या में स्मार्टफोन यूजर अब प्रीमियम डिवाइस की ओर अपग्रेड कर रहे हैं, जिससे आईफोन की मांग लगातार बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने अपने रिटेल नेटवर्क का विस्तार किया है, भारत में लोकल मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाई है और ग्राहकों के लिए आसान फाइनेंसिंग विकल्प उपलब्ध कराए हैं. इन रणनीतियों ने कंपनी की बिक्री को लगातार गति दी है.
पूरे एप्पल इकोसिस्टम को मिल रहा फायदा
नील शाह के अनुसार, आईफोन यूजर्स की बढ़ती संख्या का असर केवल स्मार्टफोन बिक्री तक सीमित नहीं है. जैसे-जैसे आईफोन अपनाने वालों की संख्या बढ़ रही है, वैसे-वैसे ग्राहक मैक, आईपैड, एयरपॉड्स, एप्पल वॉच और एप्पल म्यूजिक जैसी सेवाओं और डिवाइस की ओर भी आकर्षित हो रहे हैं. इससे एप्पल के पूरे इकोसिस्टम को फायदा मिल रहा है.
आगे क्या हैं चुनौतियां?
इंटरनेशनल डेटा कॉर्पोरेशन-इंडिया (IDC- India) के एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट नवकेंदर सिंह का कहना है कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन बाजार है, लेकिन यहां एप्पल की हिस्सेदारी अभी भी सीमित है. ऐसे में कंपनी के लिए लंबी अवधि में विकास की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं. पहली बार आईफोन खरीदने वाले ग्राहकों की संख्या बढ़ रही है, रिटेल और फाइनेंसिंग नेटवर्क मजबूत हो रहा है और अब करीब एक-चौथाई आईफोन भारत में ही असेंबल किए जा रहे हैं. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले कुछ क्वॉर्टर कंपनी के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं. एप्पल पहले ही सप्लाई से जुड़ी संभावित दिक्कतों का संकेत दे चुकी है. इसके अलावा वैश्विक स्तर पर मेमोरी चिप की बढ़ती लागत का असर भी देखने को मिल सकता है.
बढ़ सकती हैं आईफोन की कीमतें
अगले कुछ हफ्तों में आईफोन की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है. हालांकि मजबूत ब्रांड और लगातार बनी मांग के चलते इसका बिक्री पर बड़ा असर पड़ने की संभावना फिलहाल कम मानी जा रही है. यह इस बात पर निर्भर करेगा कि सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियां कितनी गंभीर होती हैं और संभावित कीमत बढ़ने के बावजूद भारत में आईफोन की मांग किस तरह बनी रहती है.