बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव की तारीख 23 अक्टूबर घोषित की गई है. इस चुनाव को लेकर राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के अंदर विवाद गहरा गया है. पार्टी ने सारण शिक्षक निर्वाचन सीट से एनडीए के उम्मीदवार के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ रहे अपने प्रदेश महासचिव सह प्रवक्ता राम पुकार सिन्हा को छह साल के लिए सस्पेंड कर दिया है. अब सवाल उन तीन विधायकों को लेकर है, जो सिन्हा के नामांकन के दौरान उनके साथ मौजूद थे. क्या उपेंद्र कुशवाहा उनके खिलाफ भी कार्रवाई करेंगे?
RLM ने 12 अक्टूबर को राम पुकार सिन्हा को सस्पेंड कर दिया. पार्टी के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष सह मुख्यालय प्रभारी प्रशांत पंकज ने इसकी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि सिन्हा ने एनडीए के घोषित उम्मीदवार के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़कर पार्टी अनुशासन तोड़ा है. इसी वजह से उन्हें छह साल के लिए निलंबित किया गया है.
आनंद पुष्कर के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं सिन्हा
सारण शिक्षक निर्वाचन सीट से एनडीए ने जनता दल यूनाइटेड (JDU) के आनंद पुष्कर को अपना उम्मीदवार घोषित किया है. इसके बावजूद राम पुकार सिन्हा ने गठबंधन के फैसले से अलग होकर निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया. वह RLM में प्रदेश महासचिव सह प्रवक्ता की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. उनके इस कदम के बाद पार्टी ने कार्रवाई की है.
हालांकि, इस विवाद में सिर्फ सिन्हा का चुनाव लड़ना ही चर्चा की वजह नहीं है. उनके नामांकन के दौरान RLM के तीन विधायक भी मौजूद थे. इनमें दिनारा के विधायक और पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष आलोक कुमार सिंह, मधुबनी के विधायक माधव आनंद और बाजपट्टी के विधायक रामेश्वर महतो शामिल हैं. तीनों की मौजूदगी को सिन्हा के समर्थन के तौर पर देखा गया. इससे पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए.
तीन विधायकों पर क्यों उठ रहे सवाल?
आलोक कुमार सिंह ने राम पुकार सिन्हा के समर्थन में पुराने कार्यकर्ताओं के सम्मान और उनके मनोबल का मुद्दा उठाया था. दूसरी ओर, पार्टी अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा का रुख एनडीए के साथ बने रहने और गठबंधन के उम्मीदवार का समर्थन करने का रहा है. ऐसे में एक तरफ पार्टी के नेता का गठबंधन के फैसले के खिलाफ चुनाव लड़ना और दूसरी तरफ तीन विधायकों का उनके नामांकन के दौरान मौजूद रहना, नेतृत्व के सामने चुनौती बन गया है.
इस विवाद के बीच 9 अक्टूबर को मुख्यमंत्री आवास पर एनडीए की बैठक हुई थी. तीनों विधायक इस बैठक में शामिल नहीं हुए. बैठक में विधान परिषद चुनाव की रणनीति और गठबंधन के उम्मीदवारों के समर्थन पर चर्चा हुई थी. उनकी गैरमौजूदगी के साथ सिन्हा के नामांकन के दौरान मौजूदगी ने भी पार्टी के भीतर मतभेद की चर्चा को बढ़ाया.
क्या उपेंद्र कुशवाहा विधायकों पर भी करेंगे कार्रवाई?
राम पुकार सिन्हा को छह साल के लिए सस्पेंड किए जाने के बाद अब सबकी नजर उपेंद्र कुशवाहा के अगले कदम पर है. सवाल है कि क्या पार्टी इन तीनों विधायकों से जवाब मांगेगी या उनके खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल, तीनों विधायकों के खिलाफ किसी कार्रवाई की घोषणा नहीं हुई है. राष्ट्रीय लोक मोर्चा के कुल चार विधायक हैं. इनमें से तीन के रुख को लेकर सवाल उठने से पार्टी नेतृत्व के सामने स्थिति और पेचीदा हो गई है. सिन्हा पर कार्रवाई करके पार्टी ने अपना रुख साफ कर दिया है. अब देखना होगा कि नेतृत्व विधायकों के मामले में क्या फैसला लेता है.
सारण सीट पर कौन-कौन हैं उम्मीदवार?
सारण शिक्षक निर्वाचन सीट पर एनडीए की ओर से आनंद पुष्कर चुनाव लड़ रहे हैं. राम पुकार सिन्हा निर्दलीय प्रत्याशी हैं, जबकि जन सुराज ने निवर्तमान विधान पार्षद आफाक अहमद को उम्मीदवार बनाया है.