उपेंद्र सिंह कुशवाहा (Upendra Singh Kushwaha) एक राजनीतिज्ञ और बिहार विधान परिषद के सदस्य हैं (Upendra Kushwaha, MLA Bihar). वह भारत सरकार में पूर्व मानव संसाधन और विकास राज्य मंत्री रह चुके हैं. कुशवाहा बिहार के रोहतास जिले के काराकाट निर्वाचन क्षेत्र से पूर्व सांसद हैं. वे राज्यसभा के पूर्व सदस्य भी रहे हैं.
उन्होंने 3 मार्च 2013 को अपनी एक अलग पार्टी, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (Rashtriya Lok Samata Party) की स्थापना की, जो 2021 में जनता दल (यूनाइटेड) (Janata Dal(U) के साथ विलय हो गई.
उपेंद्र सिंह का जन्म 6 फरवरी 1960 को बिहार के वैशाली (Vaishali, Bihar) में हुआ था (Upendra Kushwaha Born). उनके पिता का नाम मुनेश्वर सिंह और मां का नाम मुनेश्वरी देवी है (Upendra Kushwaha Parents). वह एक मध्यमवर्गीय परिवार से आते है. उन्होंने पटना साइंस कॉलेज से स्नातक किया और फिर बीआर अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर से राजनीति विज्ञान में एमए किया. कुशवाहा ने समता कॉलेज के राजनीति विभाग में व्याख्याता के रूप में भी काम किया है (Upendra Kushwaha Education).
उपेंद्र कुशवाहा ने 1985 में राजनीति की दुनिया में कदम रखा. 1985 से 1988 तक वे युवा लोकदल के प्रदेश महासचिव रहे. उन्हें मगध और शाहाबाद संभाग के विभिन्न जिलों में कुशवाहा जाति के मतदाताओं का समर्थन प्राप्त था, जिसमें जहानाबाद, गया, अरवल, औरंगाबाद, आरा, रोहतास, बक्सर और समस्तीपुर शामिल हैं. बाद में, वे 1988 में युवा जनता दल में राष्ट्रीय महासचिव बनाए गए. उन्होंने 1994 से 2002 तक समता पार्टी के महासचिव के रूप में भी काम किया था. कुशवाहा 2000-2005 में बिहार विधानसभा के सदस्य थे और उप नेता (समता पार्टी) बिहार विधानसभा के रूप में नियुक्त हुए. मार्च 2004 में लोकसभा चुनाव के बाद सुशील मोदी लोकसभा के लिए चुने गए और उसी समय जद (यू) के विधायकों की संख्या भाजपा की तुलना में बढ़ गई. चूंकि जद (यू) के नेता ने अपनी पार्टी बदल दी। इसलिए कुशवाहा विपक्ष के नेता बन गए (Upendra Kushwaha Political career).
आरएलएम में नाराजगी और टूट की अटकलों के बीच अब पार्टी अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा डैमेज कंट्रोल के मोड में आ गए हैं. उपेंद्र कुशवाहा ने नाराज विधायक को ही बिहार में पार्टी की कमान सौंप दी है.
अभी कुछ महीने पहले ही भारी बहुमत से बिहार विधानसभा चुनाव जीतने वाली एनडीए की सबसे खास दो पार्टियों में आखिर अपना वजन बढ़ाने की रेस जारी है. बीजेपी और जेडीयू में और विधायक हासिल करने की होड़ क्यों मची हुई है?
उपेंद्र कुशवाहा पार्टी के तीनों विधायक रामेश्वर महतो, आलोक सिंह और माधव आनंद ने सोशल मीडिया पर साझा तस्वीर के जरिए अपनी एकजुटता का सार्वजनिक संदेश दिया है. विधायक रामेश्वर महतो ने सोशल मीडिया पर आलोक सिंह और माधव आनंद के साथ एक तस्वीर साझा की है.
बिहार के सियासी चक्रव्यूह में उपेंद्र कुशवाहा लगातार घिरते जा रहे हैं. एक तरफ आरएलएम के विधायकों के बागी तेवर हैं तो दूसरी तरफ अपनी राज्यसभा सीट को बचाए रखने की चुनौती है. इस तरह उपेंद्र कुशवाहा के सामने ट्रिपल संकट गहरा गया है.
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा से चार विधायक जीते थे, जिसमें से तीन विधायक नाराज बताए जा रहे हैं. कुशवाहा ने बुधवार को डिनर पार्टी रखी थी, जिसमें उनकी पार्टी के तीन विधायक शामिल नहीं हुए, जबकि एक दिन पहले इन विधायकों ने बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन से दिल्ली में मुलाकात की थी.
साल 2026 में देश के अलग-अलग राज्यों की 75 राज्यसभा सीटें खाली होंगी. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से लेकर पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा सहित तमाम दिग्गज नेताओं के कार्यकाल खत्म हो रहे हैं. ऐसे में सबसे ज्यादा मुश्किल शरद पवार, उपेंद्र कुशवाहा और देवगौड़ा की है.
बिहार चुनाव के नतीजे राजनीतिक स्टैंड और समीकरण सभी पर भारी पड़ रहे हैं. बिहार पहुंचकर राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के साथ SIR का विरोध कर चुके अखिलेश यादव अब यूपी में समाजवादी पार्टी नेताओं को फार्म भरवाने की हिदायत दे रहे हैं, और चेतावनी दी गई है कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
नीतीश कुमार की नई कैबिनेट में RLM कोटे से मंत्री बनाए गए दीपक प्रकाश का चुनावी सफर जितना छोटा दिखता है, उससे कहीं ज्यादा दिलचस्प है. चुनाव आयोग के दस्तावेज बताते हैं कि वे हाल ही में सासाराम सीट पर एक ऐसे निर्दलीय उम्मीदवार के काउंटिंग एजेंट बने थे, जिसकी जमानत तक जब्त हो गई और अब वे खुद नीतीश सरकार में मंत्री बन गए हैं.
बिहार में नीतीश कुमार की नई सरकार पर परिवारवाद को लेकर विवाद छिड़ गया है. खासतौर पर उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को बिना चुनाव लड़े मंत्री पद मिलना मुद्दा बना हुआ है. आरजेडी ने इस मामले को लेकर सरकार पर सख्त निशाना साधा है. परिवारवाद बिहार की राजनीति में एक पुरानी समस्या रही है.
RLM ने उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बनाकर सभी को चौंकाया. MLA/MLC न होते हुए भी उन्हें पद मिला. दीपक प्रकाश राजनीति, युवाओं, रोजगार और शिक्षा पर काम करने की बात कहते हैं.
बिहार चुनाव से पहले राजनीति में परिवारवाद पर खूब चर्चा होती रही, लेकिन टिकट तो बांटे ही गए, एनडीए की नई सरकार में ऐसे मंत्री भी देखने को मिल रहे हैं. सम्राट चौधरी को छोड़ भी दें, तो दीपक प्रकाश और संतोष कुमार सुमन जैसे विधायकों को मंत्री बनाया है, जो परिवारवाद की राजनीतिक पृष्ठभूमि से ही आते हैं.
नीतीश कुमार को एनडीए विधायक दल का नेता चुना गया. एनडीए के तमाम नेताओं ने नीतीश कुमार के नाम पर सर्वसम्मति से मुहर लगाई. नीतीश कुमार ने राज्यपाल से मुलाकात अपना इस्तीफा सौंप दिया है.
बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण की 122 सीटों पर 1302 उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर लगी है. इसके अलावा कई चेहरे ऐसे भी हैं, जो भले ही चुनावी मैदान में नहीं है, लेकिन असल परीक्षा उन्हीं की होनी है. इसमें पप्पू यादव से लेकर असदुद्दीन ओवैसी, उपेंद्र कुशवाहा और जीतनराम मांझी तक हैं?
उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि गठबंधन में रहते हुए सीटों का बंटवारा पहले से तय नहीं होता है. लोकसभा चुनाव अलग परिस्थितियों में हुए थे. उन्होंने स्वीकार किया कि NDA और सभी सहयोगियों से हुई गलतियों के कारण कड़ाकाट समेत आस-पास के क्षेत्रों में नतीजे अनुकूल नहीं रहे थे.
RLM ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए अपने कैंडिडेट्स की पूरी लिस्ट जारी की, जिसमें उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता सासाराम से मैदान में हैं. कुल छह सीटों पर एनडीए गठबंधन में उनके कैंडिडेट उतारे गए हैं. RLM पिछड़े वर्ग और छोटे जातीय समूहों के वोट बैंक पर असर डाल सकता है और एनडीए की सफलता में अहम भूमिका निभाएगा.
'पंचायत आजतक' के मंच से राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेता उपेंद्र कुशवाहा ने एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है. उन्होंने कहा कि 24 सीटों के बजाय उन्हें 6 सीटें मिली हैं, जो राजनीतिक विमर्श के बाद तय हुआ. कुशवाहा ने पवन सिंह के बीजेपी में शामिल होने की प्रक्रिया और एनडीए की चुनावी तैयारियों पर भी खुलकर बात की.
बिहार एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर मचा घमासान अब थमता दिख रहा है. उपेंद्र कुशवाहा, जो महुआ सीट चिराग पासवान की पार्टी को दिए जाने से नाराज थे, दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद मान गए हैं. अमित शाह से मिलने के बाद उपेंद्र कुशवाहा बोले कि 'NDA में आगे कोई दिक्कत नहीं होगी.'
बिहार एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर मचा घमासान अब थमता दिख रहा है. उपेंद्र कुशवाहा, जो महुआ सीट चिराग पासवान की पार्टी को दिए जाने से नाराज थे, दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद मान गए हैं. कुशवाहा ने अपनी नाराजगी खत्म करते हुए पत्नी स्नेहलता को सासाराम से उम्मीदवार बनाया है.
बिहार में एनडीए के भीतर सीट बंटवारे को लेकर सियासी घमासान छिड़ा हुआ है, जिसमें मुख्य रूप से चिराग पासवान, नीतीश कुमार, उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी के बीच तनाव है. एक तरफ जहां अमित शाह और योगी आदित्यनाथ जैसे एनडीए के नेता बिहार में डेरा डाल रहे हैं, वहीं चिराग दिल्ली में रहकर ही अपनी पार्टी के उम्मीदवारों को सिंबल बांट रहे हैं.
बिहार के चुनावी घमासान में एनडीए और महागठबंधन, दोनों खेमों में हलचल तेज है. आरएलएसपी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा सीट बंटवारे से नाराज होकर दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मिले, कुशवाहा ने पहले दावा किया कि 'एनडीए में सब कुछ ठीक नहीं है', लेकिन अब सवाल यह है कि उपेंद्र कुशवाहा NDA में बने रहेंगे या फिर NDA छोड़ देंगे?
बिहार विधानसभा चुनाव में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं, जहाँ प्रमुख गठबंधनों में सीटों के बंटवारे को लेकर घमासान जारी है. एनडीए में उपेंद्र कुशवाहा की नाराजगी और उनके 'दिस टाइम नथिंग इज वेल इन एनडीए' बयान के बाद दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात ने हलचल बढ़ा दी. देखें दंगल.