बांकीपुर उपचुनाव में बड़ी जीत दर्ज करने के बाद जनसुराज पार्टी के फाउंडर और चीफ पीके यानी प्रशांत किशोर ने आजतक से खास बातचीत की. इस दौरान उन्होंने कहा कि बीजेपी के सभी समीकरण ध्वस्त हुए हैं, जनता बीजेपी की कार्यशैली से नाराज है. उन्होंने यह भी बताया कि सीएम सम्राट चौधरी से उन्हें क्या दिक्कत है. पीके ने सम्राट चौधरी को जंगलराज का ही प्रतीक बताया और कहा बीजेपी ने नेतृत्व थोपा गया है.
प्रशांत किशोर ने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी जीतने वाली पार्टी को अपना नेता चुनने का अधिकार है, लेकिन जनता के पास भी अपने मत के जरिए संदेश देने का अधिकार होता है. उन्होंने दावा किया कि बांकीपुर में जन सुराज को वोट देने वाले अधिकांश लोग भाजपा विरोधी नहीं, बल्कि भाजपा के पारंपरिक समर्थक थे. उन्होंने कहा कि इन मतदाताओं ने भाजपा के खिलाफ इसलिए मतदान किया क्योंकि उन्हें पार्टी का अहंकार स्वीकार नहीं है.
प्रशांत किशोर ने कहा- 'जो पार्टी जीत कर आए उसका उसका नेता जिसको चाहे वो मुख्यमंत्री बना दे, लेकिन अगर वो मुख्यमंत्री बनाएगा तो जनता के पास भी ये अवसर है अपना मत देने का, तो पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री यहां बना है और लोगों ने जब वोट दिया तो इस बात को बिल्कुल स्पष्ट मोदी जी को मैसेज दिया है.
उन्होंने कहा कि भाजपा के विरोधी लोग नहीं है. ये भाजपा के समर्थक हैं. गौर करने वाली बात है की बांकीपुर में जनसुराज को जिन लोगों ने वोट दिया है, ज्यादातर लोग भाजपा के समर्थक लोग हैं. इन्होंने इसलिए वोट दिया क्योंकि उनको भाजपा का अहंकार स्वीकार्य नहीं है. उनको भाजपा का ये वक्तव्य नहीं स्वीकार है कि कुत्ता बिल्ली को भी हम टिकट देंगे तो भी तुमको वोट देना पड़ेगा.'
'जंगलराज से मुक्ति की बात कर उसी चेहरे को बना दिया सीएम'
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा का रवैया ऐसा हो गया है मानो वह किसी भी उम्मीदवार को टिकट दे दे और जनता को उसे ही वोट देना पड़े. किशोर ने कहा कि बिहार को जंगलराज से मुक्त कराने के नाम पर जनता से वोट लेने वाली भाजपा ने अब उसी दौर के एक चेहरे को मुख्यमंत्री बना दिया, जिसे लोगों ने स्वीकार नहीं किया.
जनता का संदेश बीजेपी तक पहुंच गया- पीके
उन्होंने कहा कि आम लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे मिलकर अपनी बात नहीं कह सकते, इसलिए उनके पास मतदान ही अपनी राय जताने का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक माध्यम है. उन्होंने दावा किया कि जन सुराज ने लोगों से अपील की थी कि यदि वे भाजपा नेतृत्व और नए मुख्यमंत्री को लेकर अपनी असहमति जताना चाहते हैं तो जन सुराज के पक्ष में मतदान करें.
प्रशांत किशोर ने दावा किया कि चुनाव परिणाम इस बात का संकेत हैं कि जनता का संदेश भाजपा तक पहुंच गया है. उन्होंने कहा कि बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के 422 बूथों में से 400 से अधिक बूथों पर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा बूथ प्रबंधन, पन्ना प्रमुख और शक्ति केंद्र की बात करती है, लेकिन इस चुनाव में उसके सभी चुनावी समीकरण ध्वस्त हो गए.
बिहार की जनता को सिर्फ 5 किलो मुफ्त राशन नहीं चाहिए- पीके
उन्होंने दावा किया कि बांकीपुर के 422 बूथों में से 400 से अधिक बूथों पर भाजपा को हार मिली, जो उसके नेतृत्व मॉडल को जनता द्वारा खारिज किए जाने का संकेत है. उन्होंने कहा कि बिहार की जनता को केवल 5 किलो मुफ्त राशन नहीं, बल्कि रोजगार, बेहतर शिक्षा और उद्योगों की जरूरत है. उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष, खासकर सम्राट चौधरी से नहीं है, बल्कि बिहार पर थोपे गए नेतृत्व के खिलाफ है. उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री भाजपा का ही बने तो कोई आपत्ति नहीं, लेकिन वह योग्य और सक्षम व्यक्ति होना चाहिए.
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का जिक्र करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि वह चाहते हैं कि नितिन नवीन एक मजबूत राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में काम करें, न कि केवल रबर स्टैंप बनकर रहें. उन्होंने कहा कि जन सुराज की लड़ाई नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी पाने की नहीं, बल्कि बिहार की जनता के मुद्दों और अधिकारों के लिए है.
तेजस्वी यादव पर टिप्पणी करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि उन्हें यूरोप जन सुराज ने नहीं भेजा, बल्कि वह अपनी इच्छा से वहां गए थे. उन्होंने यह भी दावा किया कि जन सुराज आंदोलन ने राज्य में राजनीतिक माहौल तैयार किया, लेकिन अंतिम फैसला पारंपरिक भाजपा समर्थक मतदाताओं ने अपने मतदान के जरिए दिया.