
नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भारी बारिश के कारण बिहार के कई जिले इस समय भीषण त्रासदी झेल रहे हैं. कटिहार जिले में गंगा, कोसी, ब्रांडी और कारी कोसी नदियों का जलस्तर उफान पर है, जिससे करीब 4 प्रखंडों की 4 लाख आबादी बुरी तरह प्रभावित है. लोग अपने घर-बार छोड़कर ऊंचे स्थानों और बांधों पर शरण लेने को मजबूर हैं.
लेकिन इस भयानक प्राकृतिक आपदा और चारों तरफ फैले पानी के बीच से एक बेहद खूबसूरत और दिल को छू लेने वाली तस्वीर सामने आई है. आपदा की इस घड़ी में मनिहारी और बरारी प्रखंड के बीच नाव पर सवार होकर एक अनोखी बारात निकली और सभी रस्मों के साथ शफीक और फरहद का निकाह संपन्न हुआ.
बाढ़ के पानी को चीरकर पहुंची 80 बारातियों की नाव
मनिहारी प्रखंड की कलीगंज पंचायत स्थित चिकनी टोला के रहने वाले शफीक का निकाह बरारी प्रखंड के झरकाहा गांव की रहने वाली फरहद के साथ तय हुआ था. शफीक दिल्ली की एक कपड़ा फैक्ट्री में सिलाई का काम करता है.
दोनों परिवारों ने निकाह की तारीख 8 सितंबर तय की थी. हालांकि, तारीख तय होने के बाद इलाके में बाढ़ का तांडव शुरू हो गया और दूल्हे व दुल्हन दोनों के घरों में पानी भर गया. इसके बावजूद दूल्हे शफीक ने हार नहीं मानी. शफीक का कहना था कि "वादा तो वादा होता है, जुबान दी है तो निकाह तय तारीख पर ही होगा." शफीक करीब 80 बारातियों को लेकर नाव पर सवार होकर दुल्हन के घर पहुंचा.

दुल्हन के नाना बोले: दोनों घरों में पानी, फिर भी पूरी की रस्म
दुल्हन फरहद के नाना जहांगीर ने भावुक होते हुए बताया कि जब निकाह की तारीख तय हुई थी, तब स्थिति इतनी भयावह नहीं थी. लेकिन बाद में पानी अचानक बढ़ गया.
नाना ने बताया कि जलभराव के कारण निकाह की रस्मों को पूरा करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी. दुल्हन अपने ससुराल जाकर भी अभी पानी के बीच ही रहेगी, क्योंकि वहां भी चारों तरफ जलभराव है. लेकिन तय सीमा में रस्म निभाना धार्मिक और सामाजिक रूप से जरूरी था.
निकाह के बाद दूल्हा शफीक अपनी नई-नवेली दुल्हन फरहद को उसी नाव पर बैठाकर वापस अपने घर ले गया.
आपदा में उम्मीद का संदेश
कटिहार जिले में जहां लाखों लोग बाढ़ के कारण दाने-दाने को मोहताज हैं और सुरक्षित ठिकाने तलाश रहे हैं, वहीं शफीक और फरहद की यह अनोखी शादी एक सकारात्मक संदेश देती है. यह शादी साबित करती है कि अगर इरादे बुलंद हों, तो रास्ते भले ही जलमग्न हो जाएं, लेकिन इंसान अपनी मंजिल तक जरूर पहुंच जाता है.