बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था को पारदर्शी, निष्पक्ष और एडवांस बनाने के लिए सम्राट सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए 5 सदस्यीय विशेष समिति के बनाने का फैसला लिया है. इसे लेकर राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है.
इस विशेष समिति की अध्यक्षता के लिए उच्चतम न्यायालय के रिटायर्ड जस्टिस या उच्च न्यायालय के सेवारत या रिटायर्ड जस्टिस से अनुरोध किया जाएगा. गठित होने की तारीश से तीन महीने के भीतर इस समिति को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी.
इस विशेष समिति के अंतर्गत माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर की परीक्षाएं, विश्वविद्यालय स्तरीय परीक्षाएं, व्यावसायिक और तकनीकी परीक्षाएं, प्रवेश और पात्रता परीक्षाएं, राज्य की भर्ती और परीक्षाएं शामिल होंगी.
गड़बड़ियों पर लगाम और AI के इस्तेमाल पर जोर
ये समिति पेपर लीक, परीक्षा केंद्रों में हेराफेरी, नकल, उत्तर पुस्तिकाओं से छेड़छाड़ और नतीजों में दखलअंदाजी जैसी गड़बड़ियों को रोकने के उपायों की समीक्षा करेगी.
इसके साथ ही, परीक्षाओं को सुरक्षित बनाने के लिए डिजिटल तकनीक, डेटा एनालिटिक्स, AI और एडवांस साइबर सुरक्षा टूल्स के सही इस्तेमाल पर खास जोर दिया जाएगा.
सम्राट चौधरी का बड़ा ऐलान
इसके अलावा, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार के स्कूलों के लिए इंटरैक्टिव लर्निंग सपोर्ट कार्यक्रम शुरू करने का भी ऐलान किया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'बिहार के 38 जिलों के 700 मॉडल विद्यालयों में 24×7 इंटरैक्टिव लर्निंग सपोर्ट कार्यक्रम विद्या साथी शुरू किया जा रहा है, जिससे करीब 3 लाख विद्यार्थियों को जरूरत के समय गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सहायता मिल सकेगी.'
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उन्होंने आगे कहा, 'कक्षा 9वीं-10वीं के सभी विद्यार्थियों तथा 11वीं-12वीं के विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों को लाइव ट्यूटर सपोर्ट के साथ ही बिहार बोर्ड, JEE और NEET की तैयारी के लिए डिजिटल अध्ययन सामग्री मुहैया कराई जाएगी. हमारी कोशिश है कि बच्चा जहां भी हो, जब भी पढ़े. उसके सवाल का जवाब और टीचर का सहयोग उसके साथ हो.'