बिहार के लव-कुश सम्मान समारोह में कुर्मी-कुशवाहा एकता का मुद्दा केंद्र में रहा. पटना के बापू सभागार में हुए लव-कुश सम्मान समारोह में उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि 'हम एक हैं तो सेफ हैं, बंटेंगे तो कटेंगे'. इसके कुछ देर बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एनडीए के पांच दलों को 'पांच पांडव' बताते हुए 2010, 2020 और 2025 के चुनावी आंकड़ों से एकता का मतलब समझाया.
कार्यक्रम का केंद्र लव-कुश समाज की एकता थी. अलग-अलग क्षेत्रों में अच्छा काम करने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया. मंच से बिहार की शिक्षा, संस्कृति, विरासत और विकास पर भी बात हुई.
उपेंद्र कुशवाहा ने क्यों कहा- 'एक हैं तो सेफ हैं'?
उपेंद्र कुशवाहा का साफ कहना था कि समाज को बांटने की किसी भी कोशिश को कामयाब नहीं होने देना है. अगर कोई मतभेद सामने आए भी, तो तकरार के बजाय बातचीत से हल निकालना समझदारी है. उनका पूरा जोर इस बात पर था कि लोग कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहें.
बिहार में कुर्मी-कुशवाहा यानी लव-कुश का सामाजिक समीकरण हमेशा से चुनावी बिसात का केंद्र रहा है. ऐसे में इस मंच से उठी एकता की आवाज सिर्फ सामाजिक भाईचारे तक सीमित नहीं है, इसके पीछे सीधा सियासी गणित भी छिपा है.
सम्राट चौधरी ने गिनाए तीन चुनाव
उपेंद्र कुशवाहा के बाद सीएम सम्राट ने माइक संभाला, तो बात सीधे चुनावी नतीजों और आंकड़ों पर ले आए. उन्होंने याद दिलाया कि 2010 में जब सब मिलकर लड़े, तो जनता ने 206 सीटें झोली में डाल दी थीं. 2020 में रास्ते अलग हुए, तो आंकड़ा सीधे 127 पर सिमट गया. वहीं 2025 में जब पांचों दल एक साथ आए, तो फिर से 200 के पार पहुंच गए. इन्हीं नतीजों का हवाला देते हुए उन्होंने बीजेपी, जेडीयू, एलजेपी (रामविलास), आरएलएम और हम की तुलना 'पांच पांडवों' से की. उनका सीधा संदेश यही था कि सबकी भूमिका भले अलग हो, लेकिन एकजुट रहने की ताकत चुनावी नतीजों में साफ नजर आती है.
'पांच पांडव' में कौन-कौन?
यहां 'पांच पांडव' कोई नया संगठन नहीं, बल्कि पांच सहयोगी दलों के लिए इस्तेमाल किया गया उदाहरण था. सम्राट चौधरी ने इसे साथ आने की ताकत समझाने के लिए इस्तेमाल किया. उन्होंने यह भी कहा कि सभी की अपनी अलग पहचान है, फिर भी बिहार के विकास के लिए मिलकर काम किया जा सकता है. मंच पर आए इस संदेश में सामाजिक समीकरण भी था, गठबंधन की राजनीति भी. एक तरफ कुर्मी-कुशवाहा एकता की बात हुई, दूसरी ओर सहयोगी दलों के साथ बने रहने को चुनावी आंकड़ों से समझाया गया.
निशांत कुमार ने गिनाए बिहार में बदलाव
मंच से बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने भी अपनी बात रखी. उन्होंने अपने पिता के कार्यकाल का ज़िक्र करते हुए बताया कि कैसे बीते सालों में बिहार की बुनियादी तस्वीर बदली है. इस दौरान, 'विकसित बिहार: नींव से निर्माण तक' नाम से सजे इस मंच पर युवाओं के सम्मान के साथ-साथ शिक्षा, संस्कृति और राज्य के विकास पर भी चर्चा हुई.
पूरे कार्यक्रम की सबसे बड़ी बात यही रही कि लव-कुश समाज को एकजुट कैसे रखा जाए. उपेंद्र कुशवाहा ने जहां इसे सीधे सामाजिक एकता से जोड़कर देखा, वहीं सम्राट चौधरी ने इसी बात को पांच सहयोगी दलों के तालमेल के ज़रिए समझाया.