निशांत कुमार (Nishant Kumar) बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Bihar CM Nitish Kumar) के इकलौते बेटे हैं. उन्होंने मार्च 2026 को अपने पिता की पार्टी जेडीयू में शामिल होकर अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की.
निशांत कुमार का जन्म 20 जुलाई 1975 को बिहार में हुआ था. हालांकि वे एक बड़े राजनीतिक परिवार से आते हैं, लेकिन उन्होंने हमेशा सार्वजनिक जीवन और राजनीति से दूरी बनाए रखी. पिछले चुनाव में पटना में जनता दल यूनाइटेड के दफ्तर के बाहर निशांत कुमार के राजनीति में आने की अपील करते हुए कई पोस्टर लगाए गए थे. निशांत के राजनीति में आने को लेकर केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के संरक्षक जीतन राम मांझी ने भी वकालत की थी.
बिहार में जन्मे निशांत कुमार ने सेंट लॉरेंस स्कूल मसूरी, मानव भारती स्कूल और केंद्रीय विद्यालय से शुरुआती शिक्षा ली है. उन्होंने बिरला टेक्नीकल इंस्टीट्यूट मेसरा से इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की है. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सामान्य और सादा जीवन जीने का रास्ता चुना. वे आम तौर पर मीडिया और सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रहते हैं.
जेडीयू नेता निशांत कुमार ने रविवार को चंपारण से 'सद्भाव यात्रा' शुरू की. इससे पहले उन्होंने अपने पिता नीतीश कुमार के पैर छूकर आशीर्वाद लिया. इस अवसर पर निशांत कुमार ने कहा कि सबको साथ लेकर चलना है. देखें वीडियो.
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार आज अपनी पहली बड़ी जनसंपर्क यात्रा पर निकल गए हैं. निशांत ने 'सद्भाव यात्रा' से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की है.निशांत कुमार ने अपनी यात्रा शुरू करने से पहले पटना में अपने पिता नीतीश कुमार से मुलाकात की और उनका आशीर्वाद लिया.
नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने अपनी पहली बड़ी जनसंपर्क यात्रा 'सद्भाव यात्रा' की शुरुआत पश्चिम चंपारण से की है. उनके पिता ने भी अपनी राजनीतिक यात्राएं यहीं से शुरू की थीं. ये यात्रा निशांत के लिए राजनीतिक अनुभव जुटाने और जेडीयू में अपनी अलग पहचान बनाने का मौका है.
निशांत कुमार अपनी बिहार यात्रा की शुरुआत चंपारण की भूमि से करने जा रहे हैं. इस दौरान वह पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं से मिलकर संगठन को मजबूत करने की योजना पर काम करेंगे. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद कार्यकर्ता दुखी हैं.
नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार बिहार में सद्भाव यात्रा पर निकलने वाले हैं. चंपारण से वो यात्रा की शुरुआत करेंगे. निशांत ने आजतक से बातचीत में कहा कि नीतीश कुमार के इस्तीफे से बिहार के लोग दुखी हैं. साथ ही उन्होंने अपनी सद्भाव यात्रा का मकसद भी बताया. देखें वीडियो.
निशांत कुमार सक्रिय राजनीति में कदम रखने के बाद अब 'सद्भाव यात्रा' पर निकल रहे हैं. 3 मई से शुरू होने वाली इस यात्रा को जेडीयू भविष्य की राजनीति के लिए मील का पत्थर मान रही है. पार्टी का दावा है कि नीतीश कुमार के सभी संस्कार और गुण उनके पुत्र निशांत में समाहित हैं.
नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के सियासी भविष्य को लेकर अटकलें लगाई जा रही है. लेकिन निशांत ने खुद फैसला किया है सरकार और संगठन में कोई रोल अदा करने से पहले अपना पावर ग्राउंड तैयार करेंगे. ऐसे में निशांत कुमार के लिए जून का महीना राजनीतिक रूप से अहम होना है.
बिहार की सियासत में सबसे लंबी लकीर खींचने वाले नीतीश कुमार के बेटे निशांत इन दिनों चर्चा में हैं. नीतीश ने जब मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़कर राज्यसभा जाने का फैसला किया तो उसी वक्त से निशांत को जेडीयू का भविष्य माना जाने लगा.
नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार इन दिनों बिहार की राजनीति में चर्चा में हैं. उपमुख्यमंत्री पद ठुकराने के बाद अब वे 3 मई से बिहार यात्रा शुरू करने जा रहे हैं, जिसे जेडीयू के भविष्य की दिशा तय करने वाला कदम माना जा रहा है.
जनता दल यूनाइटेड ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया है, जिसमें नीतीश कुमार एक बार फिर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गए हैं. लेकिन सबसे बड़ी चर्चा का विषय ये है कि निशांत कुमार को किसी भी पद पर जगह नहीं दी गई है. उनकी गैरमौजूदगी को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
जनता दल (यूनाइटेड) की नई राष्ट्रीय टीम में नीतीश कुमार अध्यक्ष बने रहे, जबकि निशांत कुमार को कोई पद नहीं मिला, जिससे उत्तराधिकार पर सवाल उठे हैं. संजय कुमार झा कार्यकारी अध्यक्ष बने. उपाध्यक्ष पद एक कर चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी को जिम्मेदारी दी गई. कई वरिष्ठ नेताओं को बरकरार रखते हुए संगठन संतुलन और मजबूती पर जोर दिया गया है.
नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री की कुर्सी भले ही छोड़ दी हो, लेकिन बिहार की राजनीति पर अपना सियासी दबदबा बनाए रखना चाहते हैं. ऐसे में उन्होंने बेटे निशांत कुमार के साथ बिहार की यात्रा पर निकल रहे हैं तो दूसरी तरफ जेडीयू विधायकों को 200 सीटों का टारगेट दिया है. ऐसे में नीतीश कुमार के मन में क्या चल रहा है?
जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने सियासत में एंट्री करने के बाद अब बिहार की यात्रा पर निकल रहे हैं. पश्चिमी चंपारण से 3 मई को अपनी यात्रा शुरू करेंगे और अलग-अलग जिलों में जाकर कार्यकर्ताओं के साथ संवाद कर अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूत करने का काम करेंगे?
बिहार में नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किया गया है. पूर्व डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा की सुरक्षा Z+ से घटाकर Z कर दी गई है. निशांत कुमार को Z कैटेगरी सुरक्षा मिली है, जबकि जेडीयू नेता श्रवण कुमार को Y+ सुरक्षा दी गई है. फैसले के बाद VIP सुरक्षा सूची में हलचल बढ़ गई है.
बिहार में नई सरकार बन चुकी है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ जेडीयू से दो डिप्टी सीएम भी शपथ ले चुके हैं, लेकिन निशांत कु्मार सरकार में शामिल नहीं हुए हैं - क्या यह निशांत कुमार का निजी फैसला है, या फिर नीतीश कुमार की रणनीति का हिस्सा है?
बिहार में नई सरकार के गठन को लेकर सियासी हलचल तेज है. सूत्रों के मुताबिक, नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार फिलहाल कैबिनेट में शामिल नहीं होना चाहते और डिप्टी सीएम बनने को लेकर सस्पेंस बना हुआ है. इस बीच श्रवण कुमार ने सम्राट चौधरी से मुलाकात की. उधर, नितिन नवीन, शिवराज सिंह चौहान और बीएल संतोष के पटना दौरे से गतिविधियां बढ़ गई हैं, जबकि शपथ ग्रहण से पहले सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है.
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 14 अप्रैल को अपनी आखिरी कैबिनेट बैठक करेंगे. इसके बाद वह पद से इस्तीफा दे देंगे और 15 अप्रैल को राज्य में नए मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिमंडल का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाना तय माना जा रहा है.
बिहार में नई सरकार को लेकर राजनीति में हलचल तेज हो गई है. नई सरकार के गठन की चर्चाओं के बीच डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उनके आवास पर मुलाकात की. वहीं, जदयू नेता संजय झा ने स्पष्ट कर दिया है कि नीतीश कुमार बिहार नहीं छोड़ रहे हैं और नई सरकार उन्हीं की नीतियों पर चलेगी.
नीतीश कुमार अपनी राजनीतिक विरासत सम्राट चौधरी और निशांत कुमार के हवाले करने जा रहे हैं. राजनीतिक विश्लेषकों को लगता है कि नीतीश कुमार के बाद नेतृत्व की स्वीकार्यता, सामाजिक संतुलन और लोगों का भरोसा बनाए रखना सम्राट चौधरी के साथ साथ बीजेपी के सामने भी बड़ी चुनौती होगी.
बिहार में एक बार फिर सियासी बदलाव होने जा रहा है. दो दशक के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेंगे और उनकी जगह पर नया मुख्यमंत्री चुना जाएगा. माना जा रहा है कि बीजेपी 10 अप्रैल को नए सीएम के नाम पर मुहर लगा सकती है.
बिहार में सत्ता के हस्तांतरण की प्रक्रिया करीब करीब पूरी हो चुकी है. 10 अप्रैल को नीतीश कुमार दिल्ली पहुंच रहे हैं. दिल्ली में महत्वपूर्ण मीटिंग है. फाइनल तो सब पहले ही हो चुका है, मीटिंग में मोहर लगाई जानी है. राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करने और मीटिंग के बाद नीतीश कुमार दिल्ली से पटना लौट जाएंगे.