सोचिए, भारत में एक कंपनी हर साल 40 लाख गाड़ियां बनाए और उनमें से बड़ी संख्या सिर्फ हिंदुस्तान की सड़कों पर न दौड़े, बल्कि दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचे. सुनने में बड़ा प्लान लगता है, लेकिन Suzuki ने अब इसी दिशा में अपना अगला दांव चल दिया है. कंपनी ने टेक्नोलॉजी स्ट्रेटजी 2026 के प्लान से पर्दा उठाया है. इस 10 साल के रोडमैप में भारत को खास जगह दी है.
मतलब जापान में रिसर्च होगी, भारत में जरूरत के हिसाब से तकनीक को ढाला जाएगा और फिर यहीं से गाड़ियां दुनिया के बाजारों तक जाएंगी. ऊपर से कंपनी हाइब्रिड, टर्बो पेट्रोल, हल्की कारों और कनेक्टेड टेक्नोलॉजी पर भी बड़ा दांव लगा रही है. अब सवाल ये है कि Suzuki का ये प्लान भारत के ऑटो सेक्टर की तस्वीर कितनी बदल सकता है.
यह भी पढें: 1 लाख सस्ती, तगड़ा स्पेस! जानें Aeris और Dzire में कौन है बेस्ट
तेजी से बदलते कार बाजार में अब कंपनियों के लिए सिर्फ ज्यादा कारें बनाना ही काफी नहीं है. लो एनर्जी में बेहतर तकनीक, कम वजन, ज्यादा एफिशिएंसी और अलग-अलग बाजारों की जरूरत के हिसाब से वाहन तैयार करना भी उतना ही जरूरी हो गया है. इसी दिशा में सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन ने भविष्य की तैयारी की है, जिसमें भारत केंद्र बिंदु बनकर उभर रहा है.
दरअसल, सुजुकी का टार्गेट भारत को न सिर्फ बड़े मैन्युफैक्चरिंग बेस के तौर पर मजबूत करना है, बल्कि इसे दुनिया के कई बाजारों के लिए प्रमुख एक्सपोर्ट हब भी बनाना है. Suzuki ने अपनी ग्लोबल बिजनेस स्ट्रैटेजी में जापान के साथ भारत को भी प्रमुख आधार बनाने की योजना बनाई है. इस प्लान के तहत कंपनी भारत में अपनी प्रोडक्शन कैपेसिटी को लगातार बढ़ाएगी. इसके तहत वित्त वर्ष 2030 और उसके बाद भारत में हर साल करीब 40 लाख यूनिट वाहनों के प्रोडक्शन का टार्गेट रखा गया है. इससे भारत Suzuki के ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क में और ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
भारत से दुनिया के बाजारों में जाएंगे वाहन
Suzuki भारत में सिर्फ घरेलू ग्राहकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर वाहन तैयार नहीं करेगी. कंपनी जापान में होने वाले रिसर्च और डेवलपमेंट का इस्तेमाल भारत के ग्राहकों की जरूरत के मुताबिक प्रोडक्ट तैयार करने में करेगी. इसके साथ ही भारत में मौजूद मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशंस को एक बड़े एक्सपोर्ट हब के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा. यानी भारत में तैयार होने वाली सुजुकी की गाड़ियां दुनिया के अलग-अलग बाजारों में भेजी जाएंगी.
यह भी पढें: बस बॉडी कोड, सख्त नियम! फिर भी क्यों सड़क पर दौड़ रहे मौत के ताबूत
कंपनी की पूरी स्ट्रेटजी 'मिनिमाइजेशन ऑफ एनर्जी एंड मैक्सिमाइजेशन ऑफ इसेंशियल वैल्यू' की सोच पर बेस्ड है. आसान शब्दों में कहें तो सुजुकी कम ऊर्जा का इस्तेमाल करते हुए ग्राहकों के लिए ऐसी गाड़ियों का निर्माण करना चाहती है जो उनके जरूरतों को पूरा करे. इसके लिए कंपनी अलग-अलग देशों से जरूरत के हिसाब से हल्की और बाजार के अनुसार टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करेगी.
भारत में क्लीन एनर्जी पर भी फोकस
सुजुकी ने भारत में अपने क्लीन एनर्जी पर फोकस बढ़ाने को कहा है. कंपनी का भारत में तीसरा घरेलू बायोगैस प्लांट अगस्त 2026 में शुरू हो गया है. यह पहल कंपनी की सस्टेनेबल मोबिलिटी स्ट्रेटजी का हिस्सा है. सुजुकी ने आने वाले सालों में अपनी इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस को भी बदलने की योजना बनाई है. कंपनी का लक्ष्य 2030 तक नई गाड़ियों के डेवलपमेंट में लगने वाले समय को 50 फीसदी तक कम करना है. इसके अलावा डेवलपमेंट एफिशिएंसी में 30 फीसदी सुधार और मैन्युफैक्चरिंग एफिशिएंसी में 50 फीसदी बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा गया है.
इसके लिए कंपनी मॉड्यूलर डिजाइन और डिजिटल इंजीनियरिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करेगी. इससे एक ही तरह के कॉम्पोनेंट्स और इंजीनियरिंग सिस्टम को अलग-अलग मॉडलों में ज्यादा इफेक्टिव तरीके से इस्तेमाल किया जा सकेगा. इसका मकसद नए मॉडल तेजी से तैयार करना और प्रोडक्शन की लागत व समय को बेहतर तरीके से मैनेज करना है.
हाइब्रिड से लेकर टर्बो इंजन तक नई तकनीक
Suzuki की आने वाली गाड़ियों में कई नई तकनीक देखने को मिलेंगी. कंपनी की मल्टी-पाथवे स्ट्रेटजी के तहत सीरीज हाइब्रिड तकनीक को आगे बढ़ाया जाएगा. इसके अलावा कंपनी ने अपने नए हाइब्रिड सिस्टम का नाम सुपर इन-चार्ज रखा है. भविष्य के मॉडलों में डायरेक्ट इंजेक्शन टर्बो पेट्रोल इंजन भी देखने को मिलेंगे. इसके अलावा कंपनी हल्के वाहनों के लिए एस लाइट व्हीकल ऑर्किटेक्चर और कनेक्टेड कारों के लिए SDV Lite प्लेटफॉर्म पर भी काम करेगी. इन तकनीकियों की मदद से ज्यादा बेहतर माइलेज देने वाली कारों का निर्माण किया जा सकेगा.
यह भी पढें: नए ट्रैफिक चालान नियम पर रोक, कोर्ट से पहले नहीं लगेगा 50% जुर्माना
सुजुकी की योजनाओं से साफ है कि आने वाले सालों में भारत कंपनी के लिए सिर्फ एक बड़ा कार बाजार नहीं रहेगा. भारत मैन्युफैक्चरिंग, एक्सपोर्ट, रिसर्च के इस्तेमाल और क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में Suzuki के ग्लोबल प्लान का अहम हिस्सा बनने जा रहा है. 2030 तक 40 लाख यूनिट का एनुअल प्रोडक्शन प्लान के सफल होने के बाद भारत से Suzuki के ग्लोबल बिजनेस को और बड़ा सपोर्ट मिलने की उम्मीद है. साथ ही नई हाइब्रिड, टर्बो पेट्रोल, लाइट व्हीकल आर्किटेक्चर और कनेक्टेड कार तकनीक आने वाले समय में कंपनी के प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को नया रूप दे सकती हैं.