
How Tesla Roadster Fly in Air: फिल्मों में कार को हवा में उड़ते और कलाबाजियां खाते हुए आपने कई बार देखा होगा. बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक कई ऐसे फिल्म निर्माता हैं, जो इस तरह के स्टंट को पर्दे पर दिखाने में माहिर हैं. कोई इसके लिए रियल स्टंटमैन से मेहनत करवाता है तो कोई VFX का सहारा लेता है. लेकिन अब एलन मस्क की कंपनी टेस्ला ने कुछ ऐसा कर दिखाया है, जो किसी साइंस फिक्शन फिल्म के सीन से कम नहीं है.
बीते गुरुवार रात टेक्सस में हुए लाइव डेमो में टेस्ला की नई रोडस्टर कार एक कर्वी (घुमावदार) रैंप पर उल्टी दौड़ी, हवा में पलटी और फिर सेफली अपने चारों पहियों पर लैंड कर गई. बिल्कुल किसी फ्लाइट की तरह. ये टेस्ला की नई कार Tesla Roadster को दुनिया के सामने पेश करने मौका था. लेकिन इस हैरतंगेज एंट्री ने लोगों को पूरी तरह हैरानी में डाल दिया. कि, क्या आने वाले समय में कारें सड़क छोड़... हवा से बातें करेंगी.

हालांकि, यहां एक अहम बात समझना जरूरी है. कार का हवा में उड़ना और आम सड़कों पर सुरक्षित तरीके से चलने वाली फ्लाइंग कार तैयार करना दो अलग-अलग चुनौतियां हैं. टेस्ला की नई रोडस्टर इस टेक्नोलॉजी की क्षमता जरूर दिखाती है, लेकिन इसे आम लोगों के लिए सड़क पर चलाने की मंजूरी और इसकी प्रैक्टिकैलिटी अभी साबित होनी बाकी है.
Tesla Roadster के तीन वैरिएंट, सबसे खास Rocket
टेस्ला ने नई रोडस्टर के तीन वैरिएंट पेश किए हैं. इनमें रोडस्टर, रोडस्टर थ्रस्ट और रोडस्टर रॉकेट शामिल हैं. इन तीनों में Rocket सबसे खास और तकनीकी रूप से सबसे एडवांस मॉडल है. इसे तैयार करने में एलन मस्क की स्पेस कंपनी SpaceX की रॉकेट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है. इस वैरिएंट में खास थ्रस्टर सिस्टम दिया गया है, जो कार को आगे बढ़ाने के साथ हवा में उठाने और उसकी दिशा को भी तय करने में मदद करता है.
इस तकनीक का मकसद सिर्फ कार की रफ्तार बढ़ाना नहीं है, बल्कि इसे हवा में उठाने और अलग-अलग दिशाओं में कंट्रोल करना भी है. टेस्ला ने इसके लिए तीन तरह के सिस्टम पर काम किया है. पहला सिस्टम कार को आगे की ओर धक्का देता है, दूसरा इसे हवा में उठाने और दिशा बदलने में मदद करता है, जबकि तीसरा कार को सड़क की सतह के करीब बनाए रखने के लिए नीचे की ओर खिंचाव पैदा करता है.
बिना फ्यूल कैसे उड़ सकती है कार
आमतौर पर रॉकेट या जेट इंजन की बात होते ही फ्यूल जलने और तेज गर्म गैस निकलने की तस्वीर सामने आती है. लेकिन टेस्ला की इस तकनीक में ठंडी हवा के दबाव का इस्तेमाल किया गया है. इसे Cold Gas Thruster कहा जाता है. टेस्ला के चीफ व्हीकल इंजीनियर लार्स मोरावी ने कार को अनवील करने के दौरान दावा किया कि इसके पिछले हिस्से में लगे चार नोजल हवा को साउंड की स्पीड से भी तेज बाहर निकालते हैं. इससे पैदा होने वाला फोर्स कार को आगे की ओर धक्का देता है.
इसे समझने के लिए एक गुब्बारे का उदाहरण लिया जा सकता है. जब हवा से भरे गुब्बारे का मुंह छोड़ दिया जाता है, तो हवा तेजी से बाहर निकलती है और गुब्बारा विपरीत दिशा में आगे बढ़ने लगता है. टेस्ला की तकनीक भी इसी सिद्धांत पर काम करती है, लेकिन इसमें हवा को बेहद ज्यादा दबाव में स्टोर करके विशेष नोजल के जरिए बाहर निकाला जाता है. इस प्रॉसेस में गैस को जलाने की जरूरत नहीं होती.
हवा में उठाने और दिशा बदलने के लिए खास थ्रस्टर
Roadster Rocket में कार के अलग-अलग हिस्सों में एक्स्ट्रा थ्रस्टर लगाए गए हैं. इनमें कार के निचले हिस्से में लगे थ्रस्टर भी शामिल हैं. इनकी मदद से कार को ऊपर उठाने के साथ हवा में बाईं या दाईं ओर मोड़ने और उसका बैलेंस बनाए रखने की कोशिश की जाती है. यानी यह सिस्टम सिर्फ कार को आगे नहीं धकेलता है, बल्कि हवा में उसकी स्थिति को कंट्रोल करने के लिए भी तैयार किया गया है.
इसके अलावा, कार के नीचे लगे पंखों जैसे सिस्टम हवा को नीचे की जगह से खींचते हैं. इससे कार पर नीचे की ओर दबाव पैदा होता है और वह सड़क की सतह से मजबूती से कनेक्टेड रहती है. इसे वैक्यूम क्लीनर के उदाहरण से समझ सकते हैं, जो हवा खींचकर किसी सतह पर पकड़ बना लेता है. टेस्ला का दावा है कि यह सिस्टम कार के वजन से दोगुने के बराबर नीचे की ओर फोर्स पैदा करता है. इससे तेज रफ्तार पर कार को स्थिर रखने में मदद मिलती है.
कार में कैसे भरी जाएगी हवा
एलन मस्क ने 2026 में रोडस्टर को पेश करने के दौरान कहा कि, इस कार को चलाने के लिए किसी खास प्रोपेलेंट या स्पेशल फ्यूल की जरूरत नहीं होगी. उनके मुताबिक, कार खुद अपने एयर टैंक को दोबारा भर सकती है. मस्क साल 2019 से ही रोडस्टर में SpaceX की कोल्ड-गैस थ्रस्टर टेक्नोलॉजी इस्तेमाल करने की बात कर रहे हैं.
इस सिस्टम में बहुत ज्यादा प्रेशर वाली हवा को एक खास प्रेशर वेसल में स्टोर किया जाता है. इसे मजबूत बनाने के लिए कंपोजिट मैटेरियल की एक लेयर का इस्तेमाल किया जाता है. जरूरत पड़ने पर इसी हवा को थ्रस्टर के जरिए बाहर निकाला जाता है. हालांकि, टेस्ला ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि रियल कंडिशन में टैंक को दोबारा भरने की पूरा प्रॉसेस कितना आसान होगा और इस सिस्टम को इस्तेमाल करने के बाद कार को सामान्य ड्राइविंग के लिए तैयार करने में कितना समय लगेगा.
कितनी हवा स्टोर होगी
टेस्ला के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, Roadster Rocket में दो एयर टैंक दिए गए हैं, जिनकी कुल क्षमता करीब 600 लीटर है. इन टैंकों में लगभग 250 किलोग्राम हवा को प्रेशर के साथ स्टोर करने का दावा किया गया है. यदि इतनी हवा को एक सामान्य दबाव में किसी वॉल्यूम में भरा जाए तो इसके लिए एक छोटे दो बेडरूम वाले फ्लैट की जरूरत पड़ेगी.
मीडिया रिपोर्ट्स में टैंक के अंदर करीब 5,500 PSI एयर प्रेशर बताया गया है. यह प्रेशर रेगुलर CNG सिलेंडर में इस्तेमाल होने वाले प्रेशर से लगभग दोगुना है. इतनी ज्यादा मात्रा में हवा को सुरक्षित तरीके से स्टोर करने के लिए स्पेशल और बहुत ही मजबूत टैंक और सेफ्टी सिस्टम की जरूरत होगी.
कंपनी ने पिछले थ्रस्ट सिस्टम के लिए 80 kN से ज्यादा फोर्स पैदा करने का दावा किया है. इसे पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के हिसाब से करीब 8,000 किलोग्राम वजन के बराबर फोर्स के रूप में समझा जा सकता है. यह लगभग दो बड़े हाथियों के वजन के बराबर है. हालांकि, थ्रस्ट का यह आंकड़ा अपने आप में यह साबित नहीं करता कि कार कितनी देर तक हवा में रह सकती है या रियल कंडिशन में कितनी ऊंचाई तक उड़ पाएगी.
महज 0.59 सेकंड में रफ्तार
टेस्ला ने रोडस्टर के परफॉर्मेंस को लेकर भी बेहद बड़े दावे किए हैं. कंपनी के मुताबिक, Roadster Thrust वैरिएंट 0 से 96 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार सिर्फ 0.81 सेकंड में पकड़ सकता है. वहीं, सबसे महंगे और टेक्निकली एडवांस Roadster Rocket वैरिएंट के लिए यही समय महज 0.59 सेकंड बताया गया है. अगर ये आंकड़े रियल कंडिशन में भी सही साबित होते हैं, तो यह कार बेहद फास्ट होगी. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है. इसके अलावा, इतनी तेज रफ्तार पकड़ने के दौरान पैसेंजर पर पड़ने वाला दबाव, कार की स्टेबिलिटी और सेफ्टी जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखना होगा.
टेस्ला के लाइव डेमो के बाद एलन मस्क ने कहा, "खैर, यह काम कर गया." इसके बाद उन्होंने दावा किया कि भविष्य में उड़ने वाली कारें भी हकीकत बन सकती हैं. मस्क की कंपनियां इलेक्ट्रिक कारों से लेकर अंतरिक्ष में रॉकेट भेजने तक का काम करती हैं. यही वजह है कि वह इन दोनों क्षेत्रों की तकनीक को एक ही वाहन में इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं.
हालांकि, मस्क ने यह भी स्वीकार किया कि जरूरी नहीं कि रोडस्टर को सुरक्षा को प्राथमिकता देकर तैयार किया गया हो. उन्होंने कहा कि, “Roadster is not necessarily a safety-optimized car.” यह बयान काफी अहम है, क्योंकि हवा में उड़ने या कार रेगुलर तरीके से कंट्रोल करने वाली तकनीक में छोटी-सी गलती भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है. ऐसे में सिर्फ टेक्नोलॉजी को शोकेस करने के आधार पर इसे आम लोगों के लिए सुरक्षित मानना सही नहीं होगा.
दो सेकंड में निकल जाएगी हवा
रोडस्टर की टेक्नोलॉजी को लेकर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं. थ्रस्टर सिस्टम का एनालाइज करने वाली वेबसाइट Roadster Flies के अनुमान के मुताबिक, अगर सिस्टम पूरी ताकत से काम करता है, तो 250 किलोग्राम हवा की पूरी सप्लाई करीब दो सेकंड में खत्म हो सकती है. यह वेबसाइट की गणना है, टेस्ला की ओर से जारी आधिकारिक तकनीकी आंकड़ा नहीं.
अंतरिक्ष एजेंसी NASA भी कोल्ड-गैस थ्रस्टर को एक ईजी, डेवलप्ड और सेफ टक्नोलॉजी बताती है. लेकिन इसके साथ यह भी क्लीयर करती है कि ऐसे सिस्टम कुल मिलाकर सीमित मात्रा में ही थ्रस्ट पैदा कर सकते हैं. इसका मतलब है कि वे लंबे समय तक बहुत ज्यादा फोर्स बनाए रखने में सक्षम नहीं होते. ऐसे में रोडस्टर के लिए सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ हवा में उठना नहीं, बल्कि पर्याप्त समय तक हवा में टिके रहना और कंट्रोल बनाए रखना भी होगा.
टेस्ला ने रोडस्टर के प्रोडक्शन के लिए 2028 का टार्गेट रखा है. हालांकि, अभी तक इसके Rocket वैरिएंट की कीमत, ड्राइविंग रेंज और हवा में रहने की टाइमिंग जैसी अहम जानकारियां सामने नहीं आई हैं. यह भी स्पष्ट नहीं है कि इसके उड़ने वाले सिस्टम को किस तरह के सेफ्टी टेस्टिंग से गुजरना होगा और इसे आम सड़कों पर चलाने की मंजूरी मिल पाएगी या नहीं.
कुल मिलाकर, एलन मस्क की नई टेस्ला रोडस्टर ने कारों की दुनिया में एक नई संभावना जरूर दिखाई है. SpaceX की तकनीक की मदद से कार को हवा में उठाने और कंट्रोल करने का कॉन्सेप्ट बेहद रोमांचक है. लेकिन किसी लाइव डेमो में स्टंट दिखाना और ऐसी कार तैयार करना, जिसे आम लोग रोजाना सुरक्षित तरीके से चला सकें, दो बिल्कुल अलग बातें हैं. अब देखना होगा कि टेस्ला 2028 तक इस टेक्नोलॉजी को रियल वर्ल्ड में कैसे पेश करती है.
भारत में बुकिंग शुरू
खैर Tesla ने कार की बुकिंग भारत में भी शुरू कर दी है. जिसमें परफॉर्मेंस वैरिएंट के बुकिंग अमाउंट 5,01,000 रुपये और अगले 10 दिनों के भीतर 45,05,000 रुपये देने होंगे. वहीं थ्रस्ट वैरिएंट के लिए बुकिंग अमाउंट 5,01,000 रुपये और अगले 10 दिनों के भीतर ड्यू अमाउंट 2,45,24,000 रुपये तय की गई है. वहीं हवा में उड़ने वाले रॉकेट वैरिएंट को केवल वही लोग बुक कर सकेंगे, जिसे टेस्ला की तरफ से न्योता यानी इनवाइट भेजा जाएगा.