
सर्दियों की शुरुआत हो चुकी है. दिवाली का त्योहार नजदीक है. छठ पूजा की तैयारी है. कोई दिल्ली से बिहार जा रहा है. कोई नोएडा से पूर्वांचल की ओर निकल रहा है. हर किसी को बस अपनों के बीच पहुंचना है. लेकिन रास्ते में एक खतरा है, जो तकरीबन दिखाई नहीं देता. वह है घना कोहरा. सड़क सामने है.. लेकिन दिखती नहीं. आगे गाड़ी चल रही है, लेकिन कितनी दूर है, इसका अंदाजा नहीं लगता. अचानक ब्रेक लगता है. पीछे से आती गाड़ी संभल नहीं पाती. और कुछ ही सेकंड में खुशियां मातम में बदल जाती हैं.
सर्दियों में हाईवे और एक्सप्रेस-वे पर ऐसा खतरा हर साल सामने आता है. खासकर सुबह और देर रात, जब कोहरा सड़कों को अपनी चपेट में ले लेता है. तेज रफ्तार, गाड़ियों के बीच कम दूरी और जल्द कहीं पहुंचने की चाह इस खतरे को और बढ़ा देती है. इसलिए अगर आप भी इस बीच कहीं दूर निकलने की तैयारी में हैं, तो सफर शुरू करने से पहले कुछ बातें गांठ बांध लीजिए. मंजिल पर एक-दो घंटे देर से पहुंचना कोई बड़ी बात नहीं है. लेकिन सुरक्षित पहुंचना सबसे जरूरी है.
सरकारी आंकड़े बता रहे हैं...
सड़क हादसों को लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की रिपोर्ट बताती है कि, साल 2023 में देशभर में कुल 4,80,583 सड़क हादसे दर्ज किए गए. इन दुर्घटनाओं में 1,72,890 लोगों की मौत हुई, जबकि 4,62,825 लोग घायल हुए. यानी देश में हर दिन औसतन करीब 474 लोगों की जान सड़क हादसों में गई है.
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कोहरे के कारण होने वाले हादसों के आंकड़े भी कम डराने वाले नहीं हैं. मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2023 में धुंध और कोहरे के मौसम में देशभर में 34,266 सड़क हादसे हुए. इनमें 14,617 लोगों की मौत हुई और 30,646 लोग घायल हुए. इसका मतलब है कि दर्ज किए गए सभी सड़क हादसों में करीब 7.1 फीसदी हादसे कोहरे और धुंध वाले मौसम में हुए. जो कुल सड़क दुर्घटना से होने वाली मौतों का करीब 8.5 फीसदी हिस्सा था.

उत्तर प्रदेश के आंकड़े खास तौर पर चिंता बढ़ाते हैं. मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में राज्य में कोहरे और धुंध के दौरान 8,191 सड़क हादसे हुए, जिनमें 4,408 लोगों की जान चली गई. यह आंकड़ा बताता है कि सर्दियों में उत्तर प्रदेश की सड़कों पर सफर करते समय एक्स्ट्रा अलर्ट रहने की जरूरत है. ध्यान देने वाली बात यह है कि ये आंकड़े केवल कोहरे के दौरान दर्ज हुए हादसों के हैं. हर दुर्घटना का कारण सिर्फ कोहरा नहीं होता. तेज रफ्तार, गलत तरीके से ओवरटेक करना, सड़क पर खड़े वाहन, विजिबिलिटी और छोटी सी लापरवाही भी जोखिम बढ़ा देती है. इसलिए गाड़ी निकालने से पहले कुछ बातों का ख्याल रखना जरूरी है.
त्योहारों के समय सड़कों पर गाड़ियों की संख्या बढ़ जाती है. दिल्ली-NCR से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और दूसरे राज्यों की ओर जाने वाले लोग अक्सर लंबी दूरी तय करते हैं. कई लोग छुट्टी का पूरा इस्तेमाल करने के लिए रात में गाड़ी चलाना पसंद करते हैं. लेकिन सर्दियों में रात और सुबह के समय कोहरा अचानक घना हो सकता है.
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इसलिए सफर शुरू करने से पहले सिर्फ गाड़ी में पेट्रोल या डीजल भरवाना काफी नहीं है. आपको अपनी कार की लाइट, ब्रेक, टायर, वाइपर और विंडशील्ड जांचनी चाहिए. साथ ही, यात्रा के लिए पर्याप्त समय रखें. अगर मौसम बहुत खराब है, तो निकलने का समय बदलने में हिचकिचाएं नहीं.
1. गाड़ी की रफ्तार
कोहरे में ड्राइविंग का सबसे पहला नियम है कि गाड़ी की स्पीड. कार की रफ्तार हमेशा सड़क पर दिख रही दूरी यानी विजिबिलिटी के हिसाब से रखें. अगर सामने कुछ मीटर दूर तक ही दिखाई दे रहा है, तो तेज रफ्तार में गाड़ी चलाना बेहद खतरनाक हो सकता है. एक्सप्रेस-वे पर स्पीड लिमिट के भीतर गाड़ी चलाना जरूरी है. मिसाल के तौर पर, अगर सामने चल रही गाड़ी अचानक ब्रेक लगा दे, तो क्या आप समय रहते अपनी कार रोक पाएंगे. अगर इसका जवाब नहीं है, तो रफ्तार कम रखें.
2. लो बीम और फॉग लैंप का सही इस्तेमाल
घने कोहरे में हाई बीम हेडलाइट जलाना सबसे बड़ी और आम गलती है. ड्राइवर सोचता है कि तेज रोशनी से रास्ता ज्यादा साफ दिखाई देगा. लेकिन कोहरे में रोशनी की किरणें पानी की छोटी-छोटी बूंदों से टकराकर रिफ्लेक्ट होती हैं. इससे सामने देखना और मुश्किल हो जाता है. ऐसे में हेडलाइट को लो बीम पर रखें. अगर कार में फ्रंट फॉग लैंप लगे हैं, तो जरूरत के मुताबिक उनका इस्तेमाल करें. पीछे की फॉग लाइट भी तभी इस्तेमाल करें, जब विजिबिलिटी बहुत कम हो और गाड़ी को पीछे से देख पाना मुश्किल हो. अगर सड़क पर विजिबिलिटी बेहतर है तो उसे बंद कर दें, ताकि पीछे चलने वाले ड्राइवर की आंखों पर तेज रोशनी न पड़े.
3. पर्याप्त दूरी बनाए रखें
कोहरे में सड़क पर सबसे बड़ा खतरा तब पैदा होता है, जब एक गाड़ी अचानक रुकती है और पीछे चल रही गाड़ियां उससे टकराने लगती हैं. कई बार एक छोटी टक्कर के बाद पीछे से आ रहे दूसरे वाहन भी दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं. इसे रोकने के लिए आगे चल रही गाड़ी से सामान्य से ज्यादा दूरी बनाकर रखें. सामान्य मौसम में अपनाई जाने वाली दूरी को कोहरे में पर्याप्त न मानें. अपनी रफ्तार और विजिबिलिटी के हिसाब से इतना अंतर रखें कि जरूरत पड़ने पर सुरक्षित तरीके से ब्रेक लगा सकें. आगे चल रही गाड़ी की टेललाइट को देखकर अपनी स्पीड का अंदाजा लगाएं, लेकिन सिर्फ उसी के भरोसे न चलें.
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4. अचानक ब्रेकिंग और ओवरटेक करने से बचें
घने कोहरे में सामने से आने वाली गाड़ी, सड़क पर खड़ा ट्रक या धीमी गति से चल रहा वाहन पर बिल्कुल लास्ट मोमेंट पर आपकी नज़र पड़ सकती है. ऐसे में अचानक ब्रेक लगाने से पीछे की गाड़ी टकरा सकती है. इसलिए स्पीड कंट्रोल में रखें और किसी खतरे का अंदाजा लगते ही धीरे-धीरे गति कम करें. इसी तरह, कोहरे में ओवरटेक करने से बचना चाहिए. सामने की सड़क साफ दिखाई नहीं देती, इसलिए यह अंदाजा लगाना मुश्किल होता है कि सामने से कोई गाड़ी आ रही है या नहीं. हाईवे पर आगे निकलने की जल्दी में अपनी और दूसरों की जान खतरे में न डालें.
5. रिफ्लेक्टर पर नजर रखें
जब कोहरे में सड़क का दूर तक दिखाई देना बंद हो जाता है, तो सड़क की सफेद पट्टियां, किनारे लगे रिफ्लेक्टर और कैट्स आई रास्ता पहचानने में मदद करते हैं. इनकी सहायता से आप अपनी लेन में रह सकते हैं और सड़क के किनारे का अंदाजा लगा सकते हैं. हालांकि, सिर्फ सड़क की पट्टियों को देखकर गाड़ी न चलाएं. बीच-बीच में आगे की सड़क, आसपास के वाहन और इंडिकेटर्स भी देखते रहें. अगर सड़क की मार्किंग दिखाई नहीं दे रही है, तो स्पीड और कम करें. किसी अनजान सड़क पर अनुमान लगाकर गाड़ी मोड़ने या अचानक लेन बदलने से बचें.
6. विंडिशिल्ड और फॉग की जंग
सर्दियों में कार के अंदर और बाहर के टेंप्रेचर में अंतर होने के कारण विंडशील्ड पर धुंध यानी FOG जम सकता है. बाहर कोहरा हो और अंदर के शीशे पर भी भाप जम जाए, तो सामने देखना और मुश्किल हो जाता है. ऐसी स्थिति में कार का डिफॉगर इस्तेमाल करें. जरूरत के मुताबिक एसी चालू करें, क्योंकि यह हवा की नमी कम करने में मदद करता है. एयरफ्लो को विंडशील्ड की ओर रखें और शीशे साफ रखें. सफर शुरू करने से पहले वाइपर, वॉशर और डिफॉगर चेक कर लें.
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7. ट्रक या बस के पीछे न चलें
कुछ ड्राइवर कोहरे में आगे चल रहे ट्रक या बस की टेललाइट देखकर उसके पीछे-पीछे चलते रहते हैं. उन्हें लगता है कि भारी वाहन के पीछे चलने से रास्ता सुरक्षित रहेगा. लेकिन यह सोच गलत साबित हो सकती है. भारी वाहन अचानक ब्रेक लगा सकता है, धीमा हो सकता है या किसी और वजह से बचने के लिए मुड़ सकता है. अगर आप बहुत नजदीक हैं, तो रिएक्ट करने का समय नहीं मिलेगा. इसलिए ट्रक या बस से पर्याप्त दूरी रखें.
8. गाड़ी रोकने की गलती न करें
अगर कोहरा इतना घना हो जाए कि आगे कुछ भी दिखाई न दे, तो सबसे पहले अपनी स्पीड को कम करें. लेकिन गाड़ी को हाईवे या एक्सप्रेस-वे की चलती लेन में अचानक रोकने की गलती न करें. ध्यान रखें आपकी सड़क पर हैं और पीछे से भी गाड़ियां आ रही हैं. ऐसे में बीच सड़क अचानक अपनी कार रोकना खतरनाक हो सकता है. अगर आगे बढ़ना सुरक्षित नहीं लग रहा है, तो स्पीड कम करते हुए सर्विस लेन या अपनी बाईं तरह हजार्ड लाइट जलाते हुए गाड़ी रोकें.

9. निकलने से पहले चेकिंग जरूरी
लंबी यात्रा पर निकलने से पहले गाड़ी की सामान्य जांच बहुत जरूरी है. कोहरे में छोटी-सी तकनीकी खराबी भी परेशानी बढ़ा सकती है. गाड़ी निकालने से पहले हेडलाइट, टेललाइट, फॉग लैंप, टायर, ब्रेक, वाइपर, डिफॉगर की जांच जरूर करें. अपने साथ गाड़ी में फर्स्ट ऐड (First Aid) रखना न भूलें. इसके अलावा गाड़ी के सारे पेपर्स भी रेडी रखें.
10. नींद है ड्राइविंग का दुश्मन
दिवाली और छठ की छुट्टियों में कई लोग दफ्तर से सीधे निकलकर लंबा सफर शुरू कर देते हैं. कुछ लोग रातभर गाड़ी चलाने की प्लानिंग करते हैं. ताकि अगले दिन घर पहुंच सकें. लेकिन थकान और नींद सड़क हादसों का खतरा बढ़ा सकती है. अगर लगातार जम्हाई आ रही है, आंखें भारी हो रही हैं या ध्यान बार-बार भटक रहा है, तो गाड़ी तत्काल रोक दें. सुरक्षित जगह पर रुककर आराम करें. संभव हो तो साथ में चल रहे किसी दूसरे व्यक्ति से गाड़ी चलाने को कहें. चाय या कॉफी पीकर कुछ देर जाग जाना पूरी नींद का ऑप्शन नहीं है.
कोहरे में ड्राइवर को सड़क पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है. ऐसे में मोबाइल पर मैसेज पढ़ना, कॉल करना या बार-बार नेविगेशन देखना खतरनाक हो सकता है. सफर शुरू करने से पहले डेस्टिनेशन सेट कर लें. रास्ते की जानकारी ऑडियो अलर्ट के जरिए मिल सकती है, लेकिन फोन को हाथ में लेकर स्क्रीन देखने से बचें. अगर रास्ता बदलना हो या किसी से बात करनी हो, तो पहले सुरक्षित जगह पर गाड़ी रोकें. फिर फोन का इस्तेमाल करें.
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हर यात्रा समय पर पूरी करना जरूरी नहीं है. अगर मौसम विभाग ने घने कोहरे की चेतावनी दी है और आपके रास्ते पर विजिबिलिटी बहुत कम होने की आशंका है, तो जर्नी टाइम बदलने की कोशिश करें. निकलने से पहले मौसम का पूर्वानुमान, हाईवे की स्थिति और ट्रैफिक एडवाइजरी जरूर देख लें. कोशिश करें कि, आपको रात में या बिल्कुल सुबह सफर न करना पड़े. कोहरे के लिए ये दोनों समय सबसे खतरनाक होते हैं.
बाइक चालकों के लिए भी अलर्ट
कुछ लोग मोटरसाइकिल से भी लंबी दूरी तय करते हैं. बाइक सवारों के लिए घना कोहरा और भी चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि शरीर सीधे ठंडी हवा के संपर्क में रहता है और वाहन के चारों ओर कार जैसी सेफ्टी नहीं होती. मोटरसाइकिल चलाते समय सही साइज का और मजबूत हेलमेट पहनें, जिसकी वाइजर साफ हो. रिफ्लेक्टिव जैकेट या चमकीले रंग के कपड़े पहनना मददगार हो सकता है. हेडलाइट और टेललाइट स्टार्ट रखें. अपनी लेन में रहें और भारी वाहनों के बहुत करीब न चलें.
ध्यान रखें... दिवाली हो या छठ पूजा या कोई भी दूसरा त्योहार, घर लौटने की खुशी का कोई मुकाबला नहीं है. लेकिन इस खुशी में जल्दबाजी की जगह नहीं होनी चाहिए. गाड़ी की रफ्तार कम रखना, आगे चल रहे वाहन से दूरी बनाए रखना, सही लाइट का इस्तेमाल करना और थकान होने पर आराम करना छोटी बातें लग सकती हैं. मगर कई बार यही छोटी सावधानियां किसी बड़े हादसे को रोक सकती हैं.
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि कोहरे में होने वाले सड़क हादसों में हर साल हजारों लोग अपनी जान गंवाते हैं. इन सभी हादसों को केवल ड्राइवर की गलती नहीं कहा जा सकता, लेकिन सही ड्राइविंग और सावधानी से कई जोखिम कम किए जा सकते हैं. इसलिए जब भी आप गाड़ी स्टार्ट करें, तो एक बात याद रखिए. आपके घरवाले आपका इंतजार कर रहे हैं. उन्हें आपकी गाड़ी की रफ्तार नहीं, आपका सुरक्षित घर पहुंचना ज्यादा जरूरी है.