ट्रंप के प्लान को ग्रीनलैंड की हरी झंडी, 16-0 से पास हुआ सुरक्षा समझौता

ग्रीनलैंड की संसद ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुए सुरक्षा समझौते को मंजूरी दी है, जो द्वीप में अमेरिकी सैन्य अड्डों के विस्तार और मिसाइल रक्षा प्रणाली की स्थापना की अनुमति देगा.

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अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने सितंबर में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. (Photo: Reuters) अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने सितंबर में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 04 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 12:30 AM IST

ग्रीनलैंड की संसद ने मंगलवार को उस सुरक्षा समझौते को मंजूरी दे दी, जो इस साल की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुआ था. हालांकि, विपक्षी दलों के कुछ नेताओं ने इस समझौते से होने वाले आर्थिक फायदे पर सवाल उठाए हैं. 

अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने सितंबर में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. इसका मकसद ग्रीनलैंड को लेकर बने तनाव को खत्म करना था. दरअसल, रणनीतिक रूप से अहम और खनिज संपदा से भरपूर इस द्वीप पर कब्जा करने की ट्रंप कई बार धमकी दे चुके थे. ग्रीनलैंड डेनमार्क के अधीन एक स्वशासित क्षेत्र है. 

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यह समझौता ग्रीनलैंड में अमेरिकी सेना की भूमिका का विस्तार करता है. इससे वहां दो नए सैन्य अड्डे बनाने और ट्रंप की गोल्डन डोम मिसाइल रक्षा प्रणाली लगाने का रास्ता साफ होगा. हालांकि समझौते में डेनमार्क की संप्रभुता और ग्रीनलैंड के लोगों के अपने भविष्य का फैसला खुद करने के अधिकार को भी बरकरार रखा गया है. 

पिछले महीने इस समझौते पर संसद में पहली बार चर्चा हुई थी. तभी ज्यादातर सांसदों ने इसके समर्थन में अपनी राय जाहिर कर दी थी. मंगलवार को हुए मतदान में 16 वोट इसके पक्ष में पड़े. जबकि इसके विरोध में कोई वोट नहीं आया. वहीं, 7 सदस्यों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया.  

यह भी पढ़ें: अमेरिका में मिड-टर्म इलेक्शन की वोटिंग, गिरती रेटिंग के बीच तीन मुद्दों पर घिरे हैं ट्रंप!

जनवरी में व्हाइट हाउस ने कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने के अलग-अलग विकल्पों पर विचार कर रहे हैं. इनमें अमेरिकी सेना का इस्तेमाल करने का विकल्प भी शामिल था. ट्रंप के इस बयान से यूरोपीय देशों की सरकारें चिंतित हो गई थी. इसके बाद तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर तेजी से बातचीत शुरू हुई. ग्रीनलैंड के विदेश मंत्री म्यूट एगेडे ने मंगलवार को कहा कि इस समझौते को मंजूरी मिलना द्वीप के लिए एक बड़ा कदम है. 

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मतदान से कुछ समय पहले राजधानी नूक में सांसदों को संबोधित करते हुए एगेडे ने कहा, 'हमें यह मानना होगा कि अब शांति और स्थिरता ऐसी चीजें नहीं है जिन्हें हमेशा के लिए पक्का मान लें.' ग्रीनलैंड की आजादी की मांग उठाने वाली प्रमुख विपक्षी पार्टी नालेराक ने इस समझौते से होने वाले आर्थिक फायदे पर सवाल उठाए हैं. 

पार्टी के अध्यक्ष पेले ब्रोबर्ग ने कहा, 'हम ऐसा बेहतर समझौता चाहते हैं जिससे ग्रीनलैंड को आजाद देश बनने के बाद भी फायदा मिल सके. लेकिन इस समझौते से कोई आर्थिक लाभ नहीं हुआ है.' अब डेनमार्क की संसद में 11 नवंबर को इस विधेयक पर पहली बार चर्चा होगी. इसके बाद 19 नवंबर को दूसरी चर्चा और वोटिंग होगी. 

यह समझौता डेनमार्क और ग्रीनलैंड की मंजूरी मिलने के बाद लागू हो जाएगा. इसके लिए अमेरिकी सीनेट की मंजूरी जरूरी नहीं होगी. 

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