नेपाल के रसुवा में भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ के बाद तबाही का खौफनाक मंजर देखने को मिला. इस आपदा ने पल भर में आसपास के गांवों और रास्तों को अपनी चपेट में ले लिया. कई रिहायशी इमारतें और दुकानें मलबे और कीचड़ में जमींदोज हो गईं.
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कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर आई इस अचानक बाढ़ में 133 भारतीय पर्यटकों और विदेशी नागरिकों समेत 400 से ज्यादा यात्री और ट्रेकर्स लापता हो गए हैं. वहीं अब तक करीब 100 लोगों की मौत भी हो गई है.
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बाढ़ के साथ आए कीचड़ और लकड़ी के लट्ठों के बीच कई शव फंसे नजर आ रहे हैं. रेस्क्यू टीमों ने मलबे में दबे शवों को बाहर निकालना शुरू कर दिया है.
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बाढ़ के भीषण तेज बहाव के कारण 40 किलोमीटर तक सड़कें तबाह हो गईं. नेपाल-चीन मितेरी पुल समेत 19 पुल बह गए, जिससे संपर्क पूरी तरह टूट गया है.
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प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचने और रेस्क्यू के लिए नेपाल सेना और दूसरी निजी एजेंसियों के 15 हेलीकॉप्टरों को काम पर लगाया गया है. इसके जरिए लोगों का रेस्क्यू किया जा रहा है.
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प्रधानमंत्री बालेन शाह ने जानकारी दी कि बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की जान बचाने और लापता लोगों की तलाश के लिए नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस की टीमें तत्काल तैनात की गई हैं.
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नेपाल में आई बाढ़ के बाद अब उससे सटे भारतीय राज्यों बिहार और यूपी के कई जिलों को भीन अलर्ट रहने की सलाह दी गई है. इनमें यूपी का महाराजनगर और कुशीनगर, बिहार के गोपालगंज, बेतिया, पश्चिम चंपारणऔर मुजफ्फरपुर शामिल हैं.
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