Advertisement

विश्व

PHOTOS में देखें इंडोनेशिया का प्रम्बानन मंदिर, जिसका कायाकल्प करेगा भारत

aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 08 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:37 AM IST
  • 1/9

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान प्रम्बानन मंदिर पहुंचे हैं. इस मंदिर के संरक्षण और मरम्मत परियोजना की शुरुआत हुई है. इस परियोजना में भारत भी सहयोग करेगा. यह कदम दोनों देशों के मजबूत सांस्कृतिक रिश्तों का बड़ा प्रतीक माना जा रहा है.

  • 2/9

प्रम्बानन मंदिर इंडोनेशिया के योग्याकार्ता में स्थित है. यह करीब एक हजार साल पुराना मंदिर है और यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है. हर साल इसे देखने बड़ी संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं.

  • 3/9

प्रम्बानन मंदिर इंडोनेशिया का सबसे बड़ा शिव मंदिर माना जाता है. यहां भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा को समर्पित भव्य मंदिर बने हैं, जो भारतीय संस्कृति और परंपरा की झलक दिखाते हैं.

Advertisement
  • 4/9

मंदिर की दीवारों पर रामायण की कहानी बेहद खूबसूरत नक्काशी के जरिए दिखाई गई है. यही वजह है कि यह मंदिर भारत और इंडोनेशिया की साझा सांस्कृतिक विरासत का एक खास उदाहरण माना जाता है.

  • 5/9

इस परियोजना में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) इंडोनेशिया के साथ मिलकर मंदिर के संरक्षण और मरम्मत का काम करेगा. इसका उद्देश्य इस ऐतिहासिक धरोहर को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना है.

  • 6/9

साल 1991 में प्रम्बानन मंदिर को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया. इसे दुनिया की ऐतिहासिक धरोहरों में गिना जाता है. इतिहासकारों के अनुसार, इस परिसर में पहले करीब 240 मंदिर थे. आज इनमें से कई मंदिरों का संरक्षण और पुनर्निर्माण किया जा चुका है.

Advertisement
  • 7/9

प्रम्बानन मंदिर मेरापी ज्वालामुखी के पास स्थित है. माना जाता है कि प्राकृतिक आपदाओं और समय के साथ यह मंदिर काफी नुकसान झेल चुका है. कई सौ वर्षों तक यह मंदिर वीरान पड़ा रहा. बाद में इसकी दोबारा खोज हुई और अब इसे फिर से सुरक्षित बनाया जा रहा है.

  • 8/9

आज प्रम्बानन मंदिर सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि बड़ा पर्यटन केंद्र भी है. यहां हर साल रामायण बैले का भव्य मंचन किया जाता है.

  • 9/9

प्रम्बानन मंदिर यह दिखाता है कि सदियों पहले भारतीय संस्कृति, हिंदू धर्म और रामायण का प्रभाव इंडोनेशिया तक पहुंच चुका था. आज भी यह मंदिर दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक विरासत की पहचान माना जाता है.

Advertisement
Advertisement
Advertisement