पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के SIR को लेकर घमासान मचा हुआ है. राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमला बोला. उन्होंने दावा किया कि वोटर लिस्ट से 27 लाख नाम कटने के लिए बीजेपी या चुनाव आयोग नहीं, बल्कि खुद ममता बनर्जी जिम्मेदार हैं.
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि ये नाम न्यायिक अधिकारियों ने हटाए हैं. ये सब सुप्रीम कोर्ट के उन निर्देशों के तहत किया गया, जो खुद ममता बनर्जी की ओर से दायर एक मामले में आए थे.
उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव हारने के बाद अब ममता बनर्जी अपनी नाकामियों का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने की कोशिश कर रही हैं.
'अगर यही SIR केरलम में सही है, तो बंगाल में गलत कैसे?'
विपक्ष के उन आरोपों पर पलटवार करते हुए, जिनमें मतदाता सूची से असली मतदाताओं के नाम हटाने की बात कही जा रही है, अधिकारी ने सवाल उठाया कि अगर यही SIR केरलम में सही है, तो पश्चिम बंगाल में गलत कैसे हो सकता है?
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव में हमने 208 सीटें जीती हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस और उनके सहयोगियों के पास 80 सीटें हैं. ममता बनर्जी जनता के इस जनादेश को स्वीकार करने से बच रही हैं. अधिकारी ने टीएमसी और सीपीएम की दोस्ती पर बड़ा हमला बोला.
उन्होंने कहा कि कभी 34 साल के वामपंथी शासन के खिलाफ संघर्ष कर सत्ता में आईं ममता बनर्जी आज उसी सीपीएम के साथ हाथ मिला चुकी हैं. विधानसभा में यूनिवर्सिटी बिल के खिलाफ वोटिंग से लेकर अब SIR के मुद्दे तक दोनों दल एक साथ आ गए हैं.
'विपक्ष जनता के भारी जनादेश को पचा नहीं पा...'
सीएम ने आरोप लगाया कि श्रीरामपुर की रैली में ममता बनर्जी और उनके नेताओं की भाषा वही है, जो 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' और पाकिस्तान के पक्ष में नारे लगाने वाले लोग बोलते हैं. चुनाव आयोग पर सवाल उठाने और आजादी के नारे लगाने से साफ है कि विपक्ष जनता के भारी जनादेश को पचा नहीं पा रहा है.
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बता दें कि एक दिन पहले ही ममता बनर्जी ने श्रीरामपुर में एक बड़ी रैली को संबोधित करते हुए चुनाव आयोग और बीजेपी पर जमकर निशाना साधा था. वहीं, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों- सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की हालिया बैठक का जिक्र करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि आयोग के बयानों से ये साफ है कि बंगाल के SIR से जुड़े फैसले अकेले मुख्य चुनाव आयुक्त के नहीं थे.
अनुपम मिश्रा