प्रसाद, सफाई, बिजली और भोग की सामग्री... बांके बिहारी मंदिर पहुंची हाई पावर कमेटी, 16 मुद्दों पर किया मंथन

वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में दर्शन करने जाते हैं, तो आपके लिए यह खबर जरूरी है. मंदिर में मिलने वाले भोग-प्रसाद की शुद्धता से लेकर आसपास की गलियों की सफाई और बिजली व्यवस्था तक, कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई है. इसमें भोग बनाने वाले हलवाइयों के मानदेय, दूध-पनीर के लिए बजट बढ़ाने, नालियों के ढक्कन बदलने और मंदिर से जुड़ी दूसरी व्यवस्थाओं पर भी मंथन हुआ.

Advertisement
बांके बिहारी मंदिर पहुंची हाई पावर कमेटी. (Photo: Screengrab) बांके बिहारी मंदिर पहुंची हाई पावर कमेटी. (Photo: Screengrab)

मदन गोपाल शर्मा

  • मथुरा,
  • 15 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 10:46 AM IST

वृंदावन के ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में दर्शन करने पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं और बेहतर करने की तैयारी है. यहां मंदिर तक पहुंचने का रास्ता कैसा है, आसपास सफाई है या नहीं, भीड़ के बीच व्यवस्थाएं कैसी हैं और भोग-प्रसाद की गुणवत्ता कैसी है, ये सब भी मायने रखता है. इन्हीं व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए मंदिर से जुड़े कई मुद्दों पर हाई पावर कमेटी ने चर्चा की है. बैठक में कुल 16 बिंदुओं पर मंथन हुआ. इनमें प्रसाद की शुद्धता, भोग बनाने की सामग्री, हलवाइयों का मानदेय, साफ-सफाई, बिजली और मंदिर की दूसरी व्यवस्थाएं शामिल रहीं.

Advertisement

यह कमेटी सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित की गई है. बैठक की अध्यक्षता इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज अशोक कुमार ने की. बैठक में इस बात पर जोर रहा कि मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं कैसे दी जा सकती हैं. सबसे पहले बात प्रसाद और भोग की... बांके बिहारी मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. ऐसे में भोग और प्रसाद तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले मैटेरियल की क्वालिटी अहम हो जाती है.

यहां देखें Video

बैठक में प्रसाद की शुद्धता को लेकर चर्चा हुई. भोग तैयार करने वाले हलवाइयों के मानदेय और दूध-पनीर के लिए दी जाने वाली धनराशि बढ़ाने के प्रस्ताव पर भी विचार किया गया. भोग तैयार करने की व्यवस्था में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और उसे बनाने की प्रक्रिया, दोनों का ध्यान रखना जरूरी होता है. कमेटी की बैठक में इन्हीं व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने पर विचार किया गया.

Advertisement

यह भी पढ़ें: 'फर्म का नाम कनिका, पार्टनरशिप में हिंदू भी...' बांके बिहारी मंदिर में रेलिंग का ठेका लेने वाले सलीम बोले-सब भगवान की कृपा 

अब मंदिर के बाहर की व्यवस्था पर आते हैं. बांके बिहारी मंदिर के आसपास की गलियों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है. ऐसे में सफाई व्यवस्था ठीक रहना जरूरी है. बैठक में इन गलियों में विशेष सफाई कराने और नालियों के ऊपर लगे पत्थर के ढक्कन बदलने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई. यह सुनने में भले ही छोटी बात लगे, लेकिन मंदिर जैसे व्यस्त धार्मिक स्थल पर रास्तों और नालियों की स्थिति लोगों की सुविधा और सुरक्षा से जुड़ी होती है. सफाई में लापरवाही या रास्ते में खराब ढक्कन परेशानी की वजह बन सकते हैं. इसी वजह से इन व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई.

मंदिर के अंदर और आसपास बिजली वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने का मुद्दा भी शामिल रहा. धार्मिक स्थल पर नियमित और व्यवस्थित बिजली व्यवस्था श्रद्धालुओं की सुविधा के लिहाज से अहम है. कमेटी ने इस पर भी विचार किया. इसके अलावा मंदिर से जुड़ी धार्मिक और पारंपरिक व्यवस्थाओं की प्रगति रिपोर्ट देखी गई. इनमें स्वर्ण और रजत हिंडोले, रथ निर्माण और पुष्पों की शेष शय्या जैसे विषय थे. इन पर भी चर्चा की गई. बैठक का दायरा सिर्फ प्रसाद और सफाई तक सीमित नहीं था. मंदिर की दूसरी व्यवस्थाओं और उनसे जुड़े कामों की प्रगति भी समीक्षा के एजेंडे में रही.

Advertisement

गुल्लक और भोग के खर्च पर भी मंथन

बैठक में मंदिर की गुल्लक खोले जाने से जुड़े मुद्दे पर भी विचार किया गया. इसके साथ ही भोग तैयार करने के लिए दूध-पनीर की व्यवस्था पर खर्च बढ़ाने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई. मंदिर में आने वाले चढ़ावे और धार्मिक व्यवस्थाओं से जुड़े विषयों पर फैसला लेते समय पारदर्शिता महत्वपूर्ण होती है. 

मथुरा के जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने बताया कि बांके बिहारी मंदिर के लिए गठित समिति की बैठक सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अशोक कुमार की अध्यक्षता में हुई. डीएम के मुताबिक, बैठक में श्रद्धालुओं को मंदिर के अंदर और बाहर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विचार किया गया. प्रसाद की शुद्धता और साफ-सफाई व्यवस्था को और बेहतर बनाने के मुद्दे भी चर्चा में रहे.

बांके बिहारी मंदिर की हाई पावर कमेटी की बैठक में कुल 16 मुद्दों पर विचार हुआ. प्रसाद की शुद्धता, भोग के लिए दूध-पनीर की व्यवस्था, हलवाइयों के मानदेय, गलियों की सफाई, नालियों के ढक्कन और बिजली व्यवस्था जैसे मुद्दे सीधे तौर पर मंदिर के संचालन और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े हैं.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »