'फर्म का नाम कनिका, पार्टनरशिप में हिंदू भी...' बांके बिहारी मंदिर में रेलिंग का ठेका लेने वाले सलीम बोले-सब भगवान की कृपा 

बांके बिहारी मंदिर में स्टील रेलिंग के ठेके को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. ठेकेदार सलीम खान ने कहा कि काम जिस फर्म कनिका के नाम से लिया गया है, वह पार्टनरशिप फर्म है, जिसमें हिंदू पार्टनर भी शामिल हैं. सलीम का दावा है कि यह सेवा उन्हें भगवान की कृपा से मिली है और विवाद जानबूझकर खड़ा किया गया.

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बांके बिहारी मंदिर में रेलिंग लगाने का ठेका मिलने वाले सलीम ने अपनी बात रखी (Photo ITG ) बांके बिहारी मंदिर में रेलिंग लगाने का ठेका मिलने वाले सलीम ने अपनी बात रखी (Photo ITG )

उस्मान चौधरी

  • मेरठ ,
  • 04 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:28 AM IST

श्री बांके बिहारी मंदिर में स्टील रेलिंग लगाने के काम को लेकर उठे विवाद के बीच ठेकेदार सलीम खान ने पहली बार खुलकर फर्म के नाम, पार्टनरशिप और अपने रोल को लेकर स्थिति स्पष्ट की है. सलीम खान का कहना है कि जिस फर्म के जरिए काम किया जा रहा है, उसका नाम कनिका है और यह कोई नई या फर्जी फर्म नहीं, बल्कि वर्षों पुरानी पार्टनरशिप का हिस्सा है, जिसमें हिंदू पार्टनर भी शामिल हैं. सलीम खान ने कहा कि इस पूरे मामले को धार्मिक रंग देने की कोशिश की जा रही है, जबकि हकीकत इससे अलग है.

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फर्म के नाम पर पहली बार खुली बात

सलीम खान ने बताया कि फर्म का नाम किसी पहचान छिपाने के लिए नहीं, बल्कि पारिवारिक और व्यावसायिक संबंधों से जुड़ा है. सलीम खान के अनुसार, करीब 10–15 साल पहले उनके एक हिंदू मित्र और पार्टनर थे. उसी दौरान जब फर्म बनाई गई, तो उनके पार्टनर की बेटी के नाम पर ही कनिका नाम रखा गया. हमने कोई नाम बदलकर काम नहीं लिया. फर्म पहले से रजिस्टर्ड है और पार्टनरशिप में आज भी हिंदू पार्टनर रंजन शर्मा शामिल हैं. उन्होंने कहा कि पार्टनरशिप फर्म में नाम, दस्तावेज और जिम्मेदारियां सब स्पष्ट हैं.

मैं पर्दे के पीछे हूं, काम हिंदू पार्टनर देख रहे हैं

सलीम खान ने यह भी स्पष्ट किया कि मंदिर परिसर में चल रहे काम से वह खुद को जानबूझकर दूर रखते हैं, ताकि किसी की धार्मिक भावना आहत न हो. उन्होंने बताया कि साइट पर रंजन शर्मा देखते हैं. कारीगर भी सभी हिंदू हैं. मैं ज्यादातर फैक्ट्री में रहता हूं. उनका कहना है कि वह एक-दो बार साइट पर गए जरूर हैं, लेकिन मंदिर के अंदर नहीं गए. बातचीत के दौरान सलीम खान ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि उनके लिए यह काम किसी ठेके से ज्यादा सेवा का विषय है. उन्होंने कहा कि भगवान जिसे चाहे अपनी सेवा का मौका दे सकते हैं और इसमें किसी इंसान की हैसियत नहीं कि वह तय करे.

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बिना टेंडर काम, लेकिन समिति के सामने फैसला

सलीम खान ने यह भी माना कि इस काम के लिए कोई औपचारिक टेंडर प्रक्रिया नहीं अपनाई गई. उनके मुताबिक, मंदिर समिति की बैठक में तकनीकी चर्चा के बाद मौखिक रूप से काम शुरू करने को कहा गया. मीटिंग में कई लोग थे, इंजीनियर थे. सबके सामने तय हुआ. अगर यह गलत था, तो उस वक्त आपत्ति क्यों नहीं हुई? उन्होंने बताया कि अब तक 40 से 50 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं और कुछ भुगतान मंदिर समिति की ओर से मिला भी है. सलीम खान का आरोप है कि असल मुद्दों से ध्यान हटाकर अब पूरा मामला उनके नाम और पहचान तक सीमित कर दिया गया है. काम की गुणवत्ता, सुरक्षा और व्यवस्था पर कोई सवाल नहीं उठा रहा. बस नाम पर विवाद खड़ा कर दिया गया. 

उनका कहना है कि रेलिंग का उद्देश्य भीड़ नियंत्रण और श्रद्धालुओं की सुरक्षा है, न कि किसी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना. दूसरी ओर, हिंदू संगठनों का विरोध अब भी जारी है. संगठनों का कहना है कि धार्मिक स्थलों पर होने वाले कार्यों में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए और किसी भी तरह का भ्रम या संदेह नहीं रहना चाहिए. हालांकि, सलीम खान का दावा है कि सभी दस्तावेज, पार्टनरशिप और काम की प्रक्रिया स्पष्ट है और अगर जांच होती है तो सच्चाई सामने आ जाएगी. अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सचिन सिरोही ने कहा कि हिंदू धार्मिक स्थलों में गैर-हिंदुओं द्वारा काम करना स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि ऐसे लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की जाए. उनका यह भी कहना है कि मंदिर परिसर में ऐसे लोगों का प्रवेश तक बंद होना चाहिए.

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