प्रशांत महासागर में 7 साइक्लोन, क्या इनके चक्रव्यूह में फंसेगा भारत का मॉनसून

प्रशांत महासागर में मौसम ने अचानक रफ्तार पकड़ ली है. 5 ट्रॉपिकल सिस्टम एक्टिव हैं. दो नए सिस्टम बन सकते है. अब नजर सिर्फ तूफानों पर नहीं, बल्कि भारतीय मॉनसून में होने वाले संभावित बदलाव पर भी है.

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प्रशांत महासागर में तेजी से बढ़ रही साइक्लोनिक गतिविधियों से मॉनसून पर असर हो रहा है. (Photo: NOAA) प्रशांत महासागर में तेजी से बढ़ रही साइक्लोनिक गतिविधियों से मॉनसून पर असर हो रहा है. (Photo: NOAA)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 13 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 2:17 PM IST

पश्चिमी प्रशांत महासागर में इस समय 5 तूफानी सिस्टम एक्टिव हैं और 2 नए सिस्टम बनने की संभावना है. इनमें ट्रॉपिकल स्टॉर्म नांग्का और पेइलौ, ट्रॉपिकल डिप्रेशन चान-होम और डॉल्फिन और इन्वेस्ट 90W शामिल हैं. ये सभी एक बड़े मॉनसून सिस्टम के आसपास बने हैं. अभी इनसे भारत को सीधा खतरा नहीं है, लेकिन इनकी वजह से एशिया के मौसम पर नजर बनी हुई है.

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प्रशांत में एक साथ इतने सिस्टम बनने से कई जगहों के मौसम में बदलाव हो रहा है. चीन, जापान और दक्षिण कोरिया में इनका असर देखा जा रहा है. इनमें डॉल्फिन खास है, जो पिछले करीब 48 घंटे से मध्य चीन के ऊपर लगभग एक ही जगह बना हुआ है. वहीं चान-होम कमजोर होकर जापान के समुद्र में पहुंच गया है और अब दक्षिण कोरिया की ओर बढ़ रहा है.

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ट्रॉपिकल स्टॉर्म नांग्का

नांग्का इस समय मारियाना द्वीप समूह के उत्तर में है. इसके उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ने की संभावना है. इसके बाद इसकी रफ्तार कम हो सकती है और यह उत्तर की तरफ मुड़ सकता है. फिलहाल नांग्का से किसी बड़े इलाके को सीधा खतरा नहीं है. इसकी आगे की दिशा आसपास चल रही हवाओं पर निर्भर करेगी.

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ट्रॉपिकल स्टॉर्म पेइलौ

पेइलौ भी पश्चिमी प्रशांत में है और किसी बड़े भू-भाग से दूर है. अगले करीब 12 घंटे में इसके कमजोर होकर ट्रॉपिकल डिप्रेशन बनने की संभावना है. इसके बाद यह तेज पश्चिमी हवाओं में मिलकर खत्म हो सकता है. फिलहाल इससे किसी जमीन वाले इलाके को खतरा नहीं बताया गया है.

ट्रॉपिकल डिप्रेशन चान-होम

चान-होम अब कमजोर हो गया है और जापान के समुद्र में मौजूद है. रिकॉर्ड के मुताबिक यह जापान के इबाराकी इलाके में लैंडफॉल करने वाला पहला ट्रॉपिकल साइक्लोन था. अब इसके 14 अगस्त को दक्षिण कोरिया पहुंचने की संभावना है. इसके बाद यह और कमजोर हो सकता है और सप्ताह के आखिर तक कम दबाव वाले सिस्टम में बदल सकता है.

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ट्रॉपिकल डिप्रेशन डॉल्फिन

डॉल्फिन पहले सुपर टाइफून था, लेकिन अब काफी कमजोर हो चुका है. यह पिछले करीब 48 घंटे से मध्य चीन के ऊपर लगभग एक ही जगह बना हुआ है. चीन के राष्ट्रीय मौसम विभाग के मुताबिक दक्षिणी हेनान, उत्तरी हुबेई और मध्य जियांग्सू में भारी बारिश हो सकती है. कुछ इलाकों में 180 मिलीमीटर तक बारिश होने का अनुमान है.

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इन्वेस्ट 90W

इन्वेस्ट 90W अभी पूरी तरह से ट्रॉपिकल साइक्लोन नहीं बना है. ज्यादातर मौसम मॉडल के मुताबिक अगले 48 घंटे में इसके मजबूत होने की संभावना कम है. हालांकि, कुछ मॉडल बाद में इसके धीरे-धीरे मजबूत होने का संकेत दे रहे हैं. यह किसी दूसरे सिस्टम के साथ मिल भी सकता है.

दो और सिस्टम बन सकते हैं

उत्तरी फिलीपीन सागर में अगले 48 घंटे में एक और कम दबाव का क्षेत्र बन सकता है. इसके नांग्का और पेइलौ जैसी दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है. अभी इससे किसी बड़े इलाके को खतरा नहीं दिख रहा है. वहीं, इन्वेस्ट 90W के आसपास एक और कम दबाव का सिस्टम बन सकता है. फिलीपींस की मौसम एजेंसी के मुताबिक अगले 5 दिनों में इसके ट्रॉपिकल साइक्लोन बनने की संभावना कम से मध्यम है. यह सिस्टम अगले हफ्ते फिलीपींस के निगरानी वाले इलाके में पहुंच सकता है.

भारत के मॉनसून पर क्या असर?

अभी इन सिस्टम से भारत को कोई सीधा खतरा नहीं है. लेकिन पश्चिमी प्रशांत में बन रहे ये सिस्टम बड़े मॉनसून पैटर्न का हिस्सा हैं. इसलिए मौसम वैज्ञानिक इनकी दिशा और ताकत पर नजर रख रहे हैं. आने वाले दिनों में इनमें बदलाव होने पर एशिया के मौसम और मॉनसून की हवाओं पर असर पड़ सकता है.

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