इंडोनेशिया में 3 ज्वालामुखी फटे... भूकंप आया, क्या आपस में है कनेक्शन?

तीन ज्वालामुखी, कुछ घंटे और अलग-अलग इलाके… पहली नजर में यह किसी बड़ी जियोलॉजिकल हलचल का संकेत लग सकता है. समझिए इन विस्फोटों के पीछे की वजह क्या है, कहीं भूकंप तो नहीं.

Advertisement
इस समय इंडोनेशिया में तीन ज्वालामुखी फट रहे हैं. वैज्ञानिक इसकी वजह खोज रहे हैं. (Photo: Reuters/Getty) इस समय इंडोनेशिया में तीन ज्वालामुखी फट रहे हैं. वैज्ञानिक इसकी वजह खोज रहे हैं. (Photo: Reuters/Getty)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 20 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 3:58 PM IST

इंडोनेशिया में मंगलवार रात कुछ ही घंटों के अंदर तीन एक्टिव ज्वालामुखियों में विस्फोट हुआ. पूर्वी जावा में माउंट सेमेरू, ईस्ट नुसा तेंगारा में माउंट लेवोटोबी लाकी-लाकी और नॉर्थ मालुकु में माउंट इबू फटा. इबू में कुछ घंटों के अंदर तीन बार विस्फोट हुआ. 

इसके बाद सवाल उठ रहा है कि क्या इन तीनों घटनाओं का आपस में कोई संबंध है और क्या हाल में आए भूकंप से इन ज्वालामुखियों की गतिविधि बढ़ी है. अधिकारियों के मुताबिक सेमेरू और लेवोटोबी लाकी-लाकी अलर्ट लेवल III और इबू लेवल II पर है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: कांपा इंडोनेशिया, 7 दिन में फ्लोरेस द्वीप पर फिर 5.9 तीव्रता का भूकंप

हालांकि, तीनों ज्वालामुखियों का एक साथ फटना यह साबित नहीं करता कि इनके पीछे एक ही वजह है. तीनों अलग-अलग इलाकों में हैं और पहले से ही एक्टिव हैं. सेमेरू और लेवोटोबी में इससे पहले भी लगातार विस्फोट हो रहे थे. इबू भी लंबे समय से एक्टिव ज्वालामुखी है. इसलिए इनका एक ही समय पर फटना सिर्फ समय का मेल भी हो सकता है.

इंडोनेशिया में इतने ज्वालामुखी क्यों हैं?

इंडोनेशिया दुनिया के उन देशों में है जहां सबसे ज्यादा एक्टिव ज्वालामुखी हैं. यहां करीब 127 सक्रिय ज्वालामुखी हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह है देश की जियोलॉजील स्थिति. इंडोनेशिया पैसिफ्कि रिंग ऑफ फायर वाले इलाके में आता है. इस इलाके में धरती की प्लेटें लगातार एक-दूसरे से टकराती और खिसकती रहती हैं. इसी वजह से यहां भूकंप और ज्वालामुखी दोनों ज्यादा आते हैं.

Advertisement

धरती की ऊपरी परत कई बड़ी प्लेटों से बनी है. इंडोनेशिया के आसपास एक प्लेट दूसरी प्लेट के नीचे जाती है. इस प्रक्रिया से धरती के अंदर गर्म चट्टानें पिघलती हैं और मैग्मा बनता है. जब यह मैग्मा ऊपर आने लगता है तो ज्वालामुखी में विस्फोट हो सकता है.

यह भी पढ़ें: इंडोनेशिया भूकंप: बाद में आए 1500 से ज्यादा झटके, 70 मौतें और 132 घायल

क्या भूकंप से ज्वालामुखी फट सकता है?

हां, कुछ मामलों में बड़ा भूकंप ज्वालामुखी को प्रभावित कर सकता है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर भूकंप के बाद ज्वालामुखी फट जाएगा. अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी यूएसजीएस के मुताबिक, कुछ बड़े भूकंप ऐसे ज्वालामुखियों में गतिविधि बढ़ा सकते हैं जिनके अंदर पहले से मैग्मा और दबाव जमा हो.

आसान भाषा में समझें तो अगर कोई ज्वालामुखी पहले से ही विस्फोट के करीब है, तो भूकंप की तेज तरंगें उसकी गतिविधि को और बढ़ा सकती हैं. लेकिन अगर ज्वालामुखी के अंदर पर्याप्त मैग्मा और दबाव नहीं है, तो सिर्फ भूकंप आने से उसका फटना जरूरी नहीं है.

ज्वालामुखी से भी आ सकते हैं भूकंप

कनेक्शन सिर्फ भूकंप से ज्वालामुखी तक नहीं है. कई बार ज्वालामुखी के अंदर मैग्मा की हलचल से भी छोटे भूकंप आते हैं. जब मैग्मा धरती के अंदर ऊपर की ओर बढ़ता है तो आसपास की चट्टानों पर दबाव पड़ता है. इससे छोटे-छोटे भूकंप आ सकते हैं. वैज्ञानिक ज्वालामुखी की निगरानी करते समय ऐसे भूकंपों को भी देखते हैं. इसके अलावा वे जमीन की हलचल, गैस और मैग्मा में होने वाले बदलावों पर भी नजर रखते हैं.

Advertisement

यह भी पढ़ें: अस्पताल हिल रहा था, बिजली गुल थी… फिर भी डॉक्टरों ने कराई डिलीवरी, भूकंप के बीच पैदा हुई 'जेम्पिता'

क्या तीनों विस्फोट आपस में जुड़े हैं?

अभी ऐसा कोई पुख्ता वैज्ञानिक सबूत नहीं है जिससे कहा जा सके कि सेमेरू, लेवोटोबी लाकी-लाकी और इबू के विस्फोट एक ही वजह से हुए हैं. तीनों ज्वालामुखी अलग-अलग इलाकों में हैं और पहले से एक्टिव थे. इसलिए फिलहाल इन विस्फोटों को इंडोनेशिया की सामान्य लेकिन बहुत सक्रिय जियोलॉजिकल स्थिति का हिस्सा माना जा रहा है. यहां प्लेटों की लगातार हलचल के कारण भूकंप और ज्वालामुखी दोनों आते रहते हैं.

यानी भूकंप और ज्वालामुखी के बीच कनेक्शन जरूर हो सकता है, लेकिन हर बार एक को दूसरे की वजह मानना सही नहीं है. तीन ज्वालामुखियों का एक साथ फटना ध्यान देने वाली घटना है, लेकिन इसे किसी बड़े जियोलॉजिकल संकट का संकेत मानना अभी जल्दबाजी होगी.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »