जब धरती पर कोई इंसान नहीं था, तब भी था जीवन? झारखंड की चट्टान ने दिया 3.5 अरब साल पुराना सुराग

अरबों साल पुरानी चट्टान ने खोला धरती के शुरुआती जीवन का राज! झारखंड के सिंहभूम में मिली चट्टान में वैज्ञानिकों को सूक्ष्म जीवों से जुड़े संकेत मिले हैं. यह खोज जीवन की शुरुआत को समझने में मदद कर सकती है.

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झारखंड के सिंहभूम जिले में मिला एक पत्थर इन दिनों वैज्ञानिकों के रिसर्च का मुद्दा बना हुआ है. (Photo: Representative/Getty) झारखंड के सिंहभूम जिले में मिला एक पत्थर इन दिनों वैज्ञानिकों के रिसर्च का मुद्दा बना हुआ है. (Photo: Representative/Getty)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 21 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 10:51 AM IST

झारखंड के सिंहभूम इलाके में करीब 3.497 अरब साल पुरानी चट्टान मिली है, जिसमें वैज्ञानिकों को धरती पर शुरुआती जीवन के संकेत मिले हैं. चट्टान में कुछ छोटी काली धारियां और कार्बन के निशान पाए गए हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि ये निशान बहुत पुराने सूक्ष्म जीवों से जुड़े हो सकते हैं. इस चट्टान की उम्र की जांच जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) के वैज्ञानिकों और उनके साथ काम कर रहे दूसरे वैज्ञानिकों ने की है. यह रिसर्च PNAS जर्नल में छपी है.

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इस खोज की सबसे खास बात चट्टान की उम्र है. यह करीब 3.5 अरब साल पुरानी है. अगर जांच में यह साबित हो जाता है कि चट्टान में मिले निशान सच में पुराने सूक्ष्म जीवों की वजह से बने थे, तो यह धरती पर जीवन के सबसे पुराने सीधे तौर पर तय किए गए सबूतों में शामिल हो सकता है. इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि धरती पर जीवन कब और कैसे शुरू हुआ.

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चट्टान में क्या मिला?

वैज्ञानिकों को चट्टान में बहुत छोटी काली धारियां मिली हैं. इनमें कार्बन मौजूद है. जांच के बाद वैज्ञानिकों ने माना कि ये निशान पुराने सूक्ष्म जीवों की बनाई परत यानी माइक्रोबियल मैट से जुड़े हो सकते हैं. माइक्रोबियल मैट को आसान भाषा में ऐसे समझ सकते हैं कि बहुत सारे छोटे-छोटे जीव एक जगह पर जमा होकर एक परत बना लेते हैं. वैज्ञानिकों ने चट्टान में मौजूद कार्बन के अलग-अलग रूपों की भी जांच की. इससे यह समझने की कोशिश की गई कि कार्बन किसी जीव से जुड़ी प्रक्रिया के कारण बना था या किसी दूसरी वजह से.

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कैसे पता चली चट्टान की उम्र?

वैज्ञानिकों ने इस चट्टान की उम्र 3.497 अरब साल बताई है. उम्र पता करने के लिए चट्टान में मौजूद बहुत छोटे जिरकॉन नाम के मिनरल्स पार्टिकल्स की जांच की गई. इन पार्टिकल्स में मौजूद यूरेनियम और सीसे के अलग-अलग रूपों की मदद से चट्टान की उम्र निकाली गई. यानी वैज्ञानिकों ने सिर्फ चट्टान की शक्ल देखकर उसकी उम्र का अंदाजा नहीं लगाया, बल्कि वैज्ञानिक जांच के जरिए उसकी उम्र तय की.

क्या ये धरती पर जीवन का सबसे पुराना सबूत है?

अभी इसे सीधे तौर पर धरती पर जीवन का सबसे पुराना सबूत नहीं कहा जा रहा है. वैज्ञानिक इसे जीवन के सबसे पुराने संभावित संकेतों में से एक मान रहे हैं. अगर आगे की जांच में यह साफ हो जाता है कि चट्टान में मौजूद काली धारियां और कार्बन पुराने सूक्ष्म जीवों की वजह से बने थे, तो यह खोज काफी अहम होगी. इससे पता चल सकता है कि धरती पर जीवन आज से 3.5 अरब साल पहले ही मौजूद था.

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3.5 अरब साल पहले कैसी थी धरती?

करीब 3.5 अरब साल पहले धरती आज से बहुत अलग थी. उस समय इंसान, पेड़-पौधे और जानवर नहीं थे. वैज्ञानिकों का मानना है कि उस समय शुरुआती जीवन समुद्र के अंदर या ज्वालामुखी वाले इलाकों के आसपास मौजूद हो सकता था.

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सिंहभूम की यह चट्टान उस पुराने दौर की जानकारी दे सकती है. इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि धरती पर शुरुआती जीवन कब शुरू हुआ और उस समय उसका माहौल कैसा था. हालांकि, चट्टान में मिले संकेतों को जीवन का पक्का सबूत मानने से पहले उनकी और जांच जरूरी है.

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