भारत जल्द टेस्ट करेगा 500 किलो का बंकर बस्टर बम, कांप उठेगा पाकिस्तान

DRDO और आईएएफ सितंबर-अक्टूबर में Su-30MKI पर स्वदेशी PGB-500 प्रिसिजन बम का परीक्षण करेंगे. 500 किलो वॉरहेड वाला यह बम बंकरों के लिए है. सफल होने पर सेना में शामिल होगा.

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नए बम की टेस्टिंग सुखोई-30 एमकेआई से की जाएगी. (Photo: Representative/PTI) नए बम की टेस्टिंग सुखोई-30 एमकेआई से की जाएगी. (Photo: Representative/PTI)

शिवानी शर्मा / ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 20 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 6:17 PM IST

भारत की रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारतीय वायु सेना (आईएएफ) सितंबर-अक्टूबर 2026 में स्वदेशी PGB-500 प्रिसिजन गाइडेड बम का Su-30MKI लड़ाकू विमान पर उड़ान परीक्षण करने जा रहे हैं. यह 500 किलोग्राम का वॉरहेड वाला बम कठोर बंकरों, कमांड सेंटर्स और रणनीतिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के लिए बनाया गया है.

परीक्षण में विमान पर ले जाना, एयरोडायनेमिक बैलेंस और सुरक्षित रिलीज की जांच की जाएगी. गाइडेंस सिस्टम में जीपीएस/आईएनएस के साथ प्रिसिजन टर्मिनल टारगेटिंग शामिल होने की उम्मीद है. PGB-500 स्वदेशी प्रिसिजन गाइडेड बम परिवार का हिस्सा है. यह भारी वर्ग का आयुध है जो उच्च सटीकता के साथ मजबूत लक्ष्यों को भेद सकता है.

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पड़ोसी मुल्कों - जैसे पाकिस्तान, बांग्लादेश या म्यांमार में छिपे आतंकियों के बंकर या जमीन के अंदर के ठिकाने अब पूरी तरह से नष्ट हो जाएंगे.  Su-30MKI पहले से ब्रह्मोस, अस्त्र और रुद्रम जैसे हथियार ले जाता है. इस बम के जुड़ने से विमान की स्ट्राइक क्षमता और बढ़ेगी. परीक्षण सफल होने पर इसे सेवा में शामिल किया जाएगा. इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और आत्मनिर्भरता मजबूत होगी.

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पहले कैरिज टेस्ट होंगे जिसमें बम विमान के पाइलॉन पर लगेगा. इसमें एयरोडायनेमिक लोड, ड्रैग और हैंडलिंग की जांच होगी. इसके बाद रिलीज टेस्ट में सुरक्षित अलगाव, नेविगेशन बैलेंस और गाइडेंस सटीकता देखी जाएगी. ये परीक्षण DRDO और आईएएफ के संयुक्त प्रयास से होंगे. सफल परीक्षण ऑपरेशनल मूल्यांकन की ओर ले जाएंगे. Su-30MKI जैसे मल्टी-रोल प्लेटफॉर्म पर यह आयुध नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध में भी उपयोगी होगा.

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स्वदेशीकरण और रणनीतिक लाभ

यह परियोजना मेक इन इंडिया का हिस्सा है. DRDO हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और निजी उद्योग के साथ मिलकर काम कर रहा है. घरेलू उत्पादन से आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी और लागत कम होगी. भारत की प्रिसिजन स्ट्राइक क्षमता बढ़ेगी जिससे सीमा सुरक्षा और रणनीतिक अवरोध मजबूत होगा. अन्य स्वदेशी आयुधों के साथ यह वायुसेना को और सक्षम बनाएगा.

सफल परीक्षण के बाद इंडक्शन और बड़े पैमाने पर उत्पादन की प्रक्रिया शुरू होगी. यह भारत की रक्षा औद्योगिक आधार की परिपक्वता दिखाएगा. क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के बीच स्वदेशी हथियारों का विकास महत्वपूर्ण है. 

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