पृथ्वी
पृथ्वी (Earth) सौर मंडल में दूरी के आधार पर सूर्य से तीसरा ग्रह है (Third Planet from the Sun). यह सूर्य से लगभग 15 करोड़ किलोमीटर दूर स्थित है (Earth Distance from the Sun). यह एकमात्र ज्ञात खगोलीय पिंड है जिस पर जीवन पाया जाता है (Only Known Astrnomical Object to Harbour Life). सौर मंडल में सिर्फ पृथ्वी की सतह पर ही जल के बहाव की जानकारी है (Only Earth Sustains Liquid Surface Water). पृथ्वी की सतह का लगभग 71% भाग जल से बना है, जिसमें महासागर, ध्रुवीय बर्फ, झील और नदियां शामिल हैं. पृथ्वी की सतह का 29% भाग भूमि है, जिसमें तमाम महाद्वीप और द्वीप शामिल हैं. पृथ्वी की सतह कई धीरे-धीरे चलने वाली टेक्टोनिक प्लेटों से बनी है, जिसके कारण पर्वत श्रृंखलाओं, ज्वालामुखियों के निर्माण हुए हैं और भूकंप आते हैं. पृथ्वी का बाहरी कोर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है जो पृथ्वी के मैग्नेटोस्फीयर को आकार देता है और विनाशकारी सौर हवाओं को वायुमंडल से दूर रखता है (Earth Physical Characteristics).
पृथ्वी के वायुमंडल में ज्यादातर नाइट्रोजन और ऑक्सीजन हैं. इसकी ध्रुवीय क्षेत्रों की तुलना में उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों को अधिक सौर ऊर्जा मिलती है. इसके वायुमंडल में जल वाष्प की मौजूदगी के कारण बादलों का निर्माण होता है, जिससे बारिश होती है. इसके वायुमंडल में ओजोन गैस की एक परत है जो सूर्य से आने वाली खतरनाक पराबैंगनी किरणों को रोकती है (Atmosphere of Earth).
पृथ्वी का आकार अंडाकार यानी लगभग गोल है जिसकी परिधि लगभग 40,000 किमी है. यह सौरमंडल का सबसे घना ग्रह है. यह सौर मंडल के चार चट्टानी ग्रहों में सबसे बड़ा और सबसे विशाल है (Shape and Size of Earth). पृथ्वी सूर्य से लगभग आठ प्रकाश मिनट की दूरी पर है. एक सूर्य का एक चक्कर लगाने में लगभग 365.25 दिन का समय लेती है. पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमने में 24 घंटे का समय लेती है, जिससे दिन और रात होती है. पृथ्वी अपनी धुरी पर 23.5 डिग्री झुकी हुई है, जिससे ऋतुएं और मौसम में बदलाव होती हैं. पृथ्वी का एक स्थायी प्राकृतिक उपग्रह, चंद्रमा है, जो 380,000 किमी (1.3 प्रकाश सेकंड) की गति से पृथ्वी का चक्कर लगाता है (Revolution and Rotation of Earth).
पृथ्वी का निर्माण 4.5 अरब साल पहले हुआ था (Formation of Earth). पृथ्वी के इतिहास के पहले अरब वर्षों के दौरान, महासागर का निर्माण हुआ और फिर उसके भीतर जीवन का विकास हुआ. जीवन विश्व स्तर पर फैला जिसने पृथ्वी के वायुमंडल और सतह को प्रभावित करना शुरू किया. पृथ्वी पर मनुष्य का विकास 300,000 साल पहले हुआ (Origin of Life and Evolution on Earth).
पृथ्वी एक संस्कृत शब्द है जिसका मतलब एक विशाल भूमि होता है. पौराणिक कथाओं के मुताबिक इसका नाम महाराज पृथु के नाम पर इसका नाम पृथ्वी रखा गया.
पृथ्वी अपने महाद्वीपों को नीचे से धीरे-धीरे छील रही है. छीलने से निकला पदार्थ पृथ्वी की दूसरी लेयर में पहुंचकर लाखों साल तक ज्वालामुखी द्वीपों में विस्फोट करती रहती है. क्या सभी महाद्वीप एकदिन प्याज की तरह छिल जाएंगे.
माइक्रोप्लास्टिक्स वायुमंडल में गर्मी सोखकर ग्लोबल वार्मिंग बढ़ा रहे हैं. रंगीन और काले प्लास्टिक के कण सफेद कणों की तुलना में 75 गुना अधिक गर्मी सोखते हैं, जो भविष्य में क्लाइमेट चेंज के लिए एक गंभीर खतरा हैं.
नास्त्रेदमस और बाबा वेंगा की भविष्यवाणियों को भूल जाइए. नासा ने भविष्यवाणी कर दी है कि पृथ्वी पर जीवन यानी सारे जीव कब खत्म होंगे. ब्रह्मांड के हिसाब से जिस समय का ऐलान किया गया है वो बहुत कम है. धरती पर जीवन का खात्मा सूरज की बढ़ती गर्मी, चमक और हवा में ऑक्सीजन की कमी से होगा. स्टडी कहती है हमारे पास आधा ही समय बचा है.
11 साल से हम लोग ज्यादा गर्मी झेल रहे हैं. बारिश के मौसम में गर्मी. सर्दी के वेदर में गर्मी. 2015 से 2025 तक पृथ्वी के लिए सबसे गर्म साल रहे हैं. 2025 तीसरा सबसे गर्म साल था. समंदर का तापमान हो या कार्बन डाइऑक्साइड का लेवल, सब रिकॉर्ड तोड़ रहा है. इससे धरती की एनर्जी का बैलेंस बिगड़ गया है.
मुमताज 70 के दशक नामी एक्ट्रेसेस में शुमार की जाती हैं.उन्होंने अपने दौर में कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया.बता दें कि मुमताज का शादी से पहले कपूर खानदान के बेटे शम्मी कपूर संग भी नाम जुड़ा था. मगर उन्होंने शम्मी कपूर का रिश्ता ठुकरा दिया था.
पृथ्वी की निचली कक्षा यानी लो अर्थ ऑर्बिट अब धीरे-धीरे सैटेलाइट मलबे के खतरनाक जाल में फंसती जा रही है. वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि समय रहते इसपर नियंत्रण नहीं किया गया, तो भविष्य में सैटेलाइट्स टकराकर कचरा बढ़ाएंगे. धरती के लिए बड़ी मुसीबत होगी. सूरज की रोशनी भी प्रभावित होगी. यानी पृथ्वी पर तबाही आएगी...
नासा के जूनो अंतरिक्ष यान ने बृहस्पति ग्रह का अब तक का सबसे सटीक माप लिया. भूमध्य रेखा पर व्यास 1,42,976 किमी निकला, जो पुराने अनुमान से 8 किमी छोटा है. ध्रुवों के बीच व्यास 1,33,684 किमी यानी पहले से 24 किमी कम. ग्रह पहले थोड़ा ज्यादा चपटा है. यह खोज ग्रह के अंदरूनी ढांचे और सौरमंडल के निर्माण को समझने में मदद करेगी.
स्पेसएक्स का एक स्टारलिंक सैटेलाइट 17 दिसंबर को अनियंत्रित होकर अंतरिक्ष में घूम रहा है. जल्द ही पृथ्वी के वायुमंडल में जलकर नष्ट हो जाएगा. एक नई रिसर्च के मुताबिक अगर सैटेलाइट्स कंट्रोल खो दें, तो सिर्फ 2.8 दिनों में केसलर सिंड्रोम शुरू हो सकता है यानी इंटरनेट, जीपीएस, बैंकिंग, मौसम पूर्वानुमान सब ठप.
आग कोई पदार्थ नहीं, बल्कि एक रासायनिक प्रक्रिया है जिसे दहन कहते हैं. यह ईंधन, ऑक्सीजन और गर्मी से शुरू होती है. लौ दरअसल गर्म काजल के कणों की चमक है. पूरी आग प्लाज्मा या गैस नहीं होती. ब्रह्मांड में ऑक्सीजन से जलने वाली आग सिर्फ पृथ्वी पर ही संभव है, क्योंकि ऑक्सीजन जीवन से बनती है.
Fire कोई पदार्थ नहीं बल्कि एक chemical process है जिसे combustion कहते हैं. जानें आग कैसे जलती है, लौ क्यों चमकती है और क्यों oxygen वाली आग सिर्फ Earth पर संभव है.
अरावली पर्वत तब बने थे जब गंगा नहीं थी. हिमालय नहीं था. महाद्वीप जुड़ रहे थे. जीवन की उत्पत्ति की शुरुआत हो रही थी. 250 करोड़ साल पुरानी इन पर्वतमालाओं की हाइट छोटी करने की बात कही जा रही है. ये तो ऐसा ही है जैसे इस दुनिया से छोटी ऊंचाई वाले जीवों को खत्म करने की बात कह दी जाए. जानिए इस फोल्डेड माउंटेन रेंज की कहानी...
वैज्ञानिकों ने ब्रह्मांड में पृथ्वी जैसी कई दुनिया ढूंढ ली हैं. ये एक्सोप्लैनेट्स दूर तारों के इर्द-गिर्द घूमते हैं, जहां पानी हो सकता है. केपलर-452बी, ट्रैपिस्ट-1ई जैसे ग्रह आकार और हालात में धरती से मिलते हैं. NASA के केपलर ने इन्हें खोजा. जेम्स वेब टेलीस्कोप वायुमंडल जांच रहा है – शायद जीवन मिले.
वैज्ञानिकों ने ब्रह्मांड में कई एक्सोप्लैनेट्स ढूंढे हैं जो पृथ्वी जैसी हैं. Kepler-452b, TRAPPIST-1e जैसे ग्रहों में पानी और रहने योग्य हालात हो सकते हैं. JWST इनकी वायुमंडल जांच रहा है.
वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि शुक्र की कक्षा में सैकड़ों अदृश्य एस्टेरॉयड घूम रहे हैं. सूरज की चमक इन्हें छिपा लेती है. ये पृथ्वी से टकरा सकते हैं, भारी तबाही मचा सकते हैं. कम वक्रता वाले एस्टेरॉयड को ढूंढने के लिए शुक्र मिशन जरूरी. वेरा रुबिन वेधशाला कुछ मदद करेगी, लेकिन पूरी खोज बाकी है.
क्या आप जानते हैं जब धरती का निर्माण हुआ था, उस वक्त धरती पर सबसे पहले कौन सा जीव आया था? तो जानते हैं इस बारे में वैज्ञानिकों की रिसर्च क्या कहती है...
हाल ही में धरती की तरफ सूरज में प्यार भरा दिल दिखाया. सोलर सिस्टम के सबसे बड़े और पृथ्वी के एनर्जी सोर्स ने रोमांटिक सरप्राइज दिया. एक बड़ा सा कोरोनल होल उभरा, जो बिल्कुल दिल के आकार का था. ये दिल धरती से कई गुना बड़ा था. सोलर सिस्टम भर में सूर्य कणों की तेज धारा भेज रहा था.
पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति कैसे हुई, इसे जानने के लिए वैज्ञानिकों ने शोध किया, जिसमें पता चला कि शुरुआत में वायुमंडलीय रसायन विज्ञान (Atmospheric Chemistry) ने जीवन को शुरू करने में कैसे मदद की.
पृथ्वी के पास नई 'क्वासी-मून' 2025 PN7 की खोज हुई है. यह 19 मीटर का एस्टेरॉयड दशकों से सूर्य की परिक्रमा में पृथ्वी के साथ है. यह छोटा और मंद है, इसलिए अब तक छिपा रहा. हवाई के टेलीस्कोप ने इसे देखा. इससे कोई खतरा नहीं, लेकिन वैज्ञानिकों के लिए अध्ययन का मौका है.
क्या होगा अगर सूरज अचानक एक हफ्ते के लिए गायब हो जाए? क्या इंसान जम जाएंगे या पृथ्वी अंतरिक्ष में भटकने लगेगी? जानिए सूरज के गायब होने से अंधेरा, ठंड, पौधों पर असर, ऑक्सीजन की कमी और अंतरिक्षीय खतरों तक क्या-क्या बदल जाएगा.
5 अगस्त 2025 को Earth सामान्य से तेज घूम रही है. जानें क्यों दिन छोटे हो रहे हैं और क्या असर पड़ेगा GPS, Satellites और Time Systems पर.
पृथ्वी का कोर सोना और कीमती धातुएं लीक कर रहा है. हवाई के ज्वालामुखी चट्टानों में वैज्ञानिकों ने रूथेनियम पाया, जो कोर से आया है. यह 2900 किमी नीचे कोर-मैन्टल सीमा से सतह तक पहुंचता है. यह खोज बताती है कि कोर से सामग्री मैन्टल के रास्ते ऊपर आ रही है, जिससे हवाई जैसे द्वीप बनते हैं.