अल-नीनो: यूरोप में भयानक गर्मी, फ्रांस में 40 लोगों की डूबने से मौत

EL-Nino Effect: यूरोप में जून 2026 में रिकॉर्ड गर्मी पड़ रही है. फ्रांस में 40 से ज्यादा लोग गर्मी से बचने के लिए नदियों-तालाबों में नहाने गए और डूब गए. कई देशों में 40 डिग्री से ज्यादा तापमान हैं.

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पेरिस में गर्मी की वजह एफिल टॉवर के सामने मौजूद ट्रोकाडेरो फाउंटेन में छलांग लगाते लोग. (Photo: Reuters) पेरिस में गर्मी की वजह एफिल टॉवर के सामने मौजूद ट्रोकाडेरो फाउंटेन में छलांग लगाते लोग. (Photo: Reuters)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 24 जून 2026,
  • अपडेटेड 12:08 PM IST

जून 2026 यूरोप के लिए भयानक गर्मी का महीना साबित हो रहा है. फ्रांस में रिकॉर्ड तापमान ने लोगों को परेशान कर दिया है. प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने बताया कि 18 जून से अब तक 40 लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है. ज्यादातर युवा थे जो गर्मी से बचने के लिए बगैर निगरानी वाली नदियों, नहरों और तालाबों में तैरने गए थे. 

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मेटियो फ्रांस के अनुसार मंगलवार देश का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया. दक्षिण-पश्चिम के एक शहर में तापमान 44.3 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया. 54 विभागों में रेड अलर्ट जारी है, जो बुधवार को 58 तक बढ़ सकता है. एफिल टावर और लूव्र संग्रहालय जैसी जगहों पर घंटे कम कर दिए गए. स्कूलों का समय बदला गया और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क प्रभावित हुआ. 

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यह गर्मी सिर्फ फ्रांस तक सीमित नहीं. ब्रिटेन, इटली, स्विट्जरलैंड और स्पेन भी चिलचिलाती धूप झेल रहे हैं. कुछ जगहों पर जून के रिकॉर्ड टूट गए. विश्व मौसम संगठन (WMO) के अनुसार यूरोप दुनिया का सबसे तेज गर्म होने वाला महाद्वीप है. वैश्विक औसत से दोगुनी तेजी से तापमान बढ़ रहा है, जिससे ऐसी लंबी और तीव्र गर्मी की घटनाएं बढ़ रही हैं.

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ओमेगा ब्लॉक और जलवायु परिवर्तन

यह गर्मी ओमेगा ब्लॉक नामक मौसमी सिस्टम के कारण है. इसमें गर्म हवा का गुबार यूरोप के ऊपर अटक गया है, जिससे ठंडी हवाएं नहीं आ पा रही. उच्च दबाव वाले क्षेत्र बारिश को रोक रहे हैं. तापमान को बढ़ा रहे हैं. जलवायु परिवर्तन ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है.

WMO रिपोर्ट्स बताती हैं कि यूरोप में तापमान बढ़ने की गति वैश्विक औसत से दोगुनी है. आर्कटिक और आल्प्स में बर्फ और बर्फानी क्षेत्र तेजी से पिघल रहे हैं, जो आगे और गर्मी बढ़ाएंगे. समुद्र का तापमान भी रिकॉर्ड स्तर पर है. 

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विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन ने ऐसी चरम घटनाओं की आने की गति और उनकी तीव्रता बढ़ा दी है. 2025-26 में कई रिकॉर्ड टूटे हैं. अगर उत्सर्जन कम नहीं हुआ तो भविष्य में और खतरनाक गर्मी आएगी.

डूबने की घटनाएं: गर्मी से बचाव का घातक रूप

फ्रांस में लोग गर्मी से राहत के लिए जहां-तहां पानी में कूद रहे थे. स्पोर्ट्स मंत्री मरीना फेरारी ने कहा कि गर्मी से बचने की इच्छा समझ में आती है, लेकिन बगैर निगरानी वाली जगहों पर तैरना खतरनाक है. प्रधानमंत्री ने इसे दुखद विपदा बताया है.

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इमरजेंसी मीटिंग में बचाव दल और जागरूकता पर जोर दिया गया. पिछले साल भी गर्मी में डूबने की घटनाएं 172 प्रतिशत बढ़ी थीं. इस बार स्थिति और खराब है क्योंकि गर्मी जल्दी और तेज आई. ब्रिटेन में भी कुछ डूबने की घटनाएं रिपोर्ट हुई हैं.

ब्रिटेन, स्पेन और इटली में अलर्ट

ब्रिटेन में तापमान 39 डिग्री तक पहुंचने की चेतावनी है. स्कूलों में समय बदला गया है. स्पेन और इटली में भी रेड अलर्ट जारी किया गया है. परिवहन पर असर पड़ा – रेलवे ट्रैक मुड़ गए, उड़ानें प्रभावित हुईं. लोगों को घरों में रहने, पानी पीने और बुजुर्गों-बच्चों का खास ध्यान रखने की सलाह दी जा रही है.   

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कब तक चलेगी यह गर्मी?  

मौसम विभागों के अनुसार यह गर्मी सप्ताहांत तक जारी रह सकती है. कुछ जगहों पर हल्की बारिश हो सकती है लेकिन कुल मिलाकर गर्मी का प्रकोप बना रहेगा. सरकारों को जागरूकता अभियान, बचाव दल मजबूत करने और लंबे समय में जलवायु कार्रवाई करनी होगी. यह घटना सिर्फ मौजूदा संकट नहीं बल्कि बदलते मौसम का संकेत है. अगर सही कदम उठाए गए तो हम इन चुनौतियों से निपट सकते हैं.

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