चीन में बढ़ी टेंशन, प्रशांत महासागर में तेजी से ताकतवर हो रहा रिकॉर्डतोड़ सुपर अल-नीनो

प्रशांत महासागर का तापमान तेजी से बढ़ रहा है और चीन के मौसम वैज्ञानिकों ने इसकी बड़ी वजह को लेकर अहम अनुमान दिया है. नवंबर तक समुद्र की सतह 3.5 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा गर्म हो सकती है, जिसका असर दुनिया के मौसम पर पड़ेगा.

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सूखे हुए तालाब के पास पानी खोजता कुत्ता. (Photo: Reuters) सूखे हुए तालाब के पास पानी खोजता कुत्ता. (Photo: Reuters)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 01 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 6:49 PM IST

प्रशांत महासागर में बन रहा अल-नीनो इस साल बहुत ताकतवर हो सकता है. चीन के नेशनल क्लाइमेट सेंटर के मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि नवंबर के आसपास समुद्र की सतह के तापमान का इंडेक्स 3.2 से 3.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है. अगर ऐसा हुआ तो यह रिकॉर्ड शुरू होने के बाद अब तक का सबसे मजबूत सुपर अल नीनो हो सकता है.

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प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय हिस्से में मई से ही अल नीनो के संकेत मिलने लगे थे. इसके बाद समुद्र की सतह का तापमान तेजी से बढ़ा है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, इसका असर सिर्फ समुद्र तक नहीं रहेगा. चीन में इस साल बाढ़ के मौसम में इसका असर देखा गया है. आने वाले महीनों में चीन और दुनिया के कई हिस्सों में तापमान और बारिश के तरीके में बदलाव हो सकता है.

इस बार कितना ताकतवर हो सकता है?

चीन के वैज्ञानिकों के मुताबिक, नवंबर में समुद्र की सतह के तापमान का इंडेक्स 3.2 से 3.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह रिकॉर्ड शुरू होने के बाद सबसे मजबूत सुपर अल-नीनो हो सकता है. अमेरिका की NOAA यानी नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन भी इस समय मजबूत अल-नीनो की स्थिति पर नजर रख रहा है. 

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सितंबर के आकलन के मुताबिक, 2026 की शरद और सर्दी में बहुत मजबूत अल-नीनो बने रहने की 90 फीसदी से ज्यादा संभावना है. NOAA के मुताबिक, सितंबर में भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के एक हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 3 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा ऊपर था. अक्टूबर से दिसंबर के बीच रिकॉर्ड स्तर की मजबूत घटना होने की 75 फीसदी संभावना भी बताई गई थी.

कहीं ज्यादा बारिश, कहीं सूखा

अल-नीनो का असर हर जगह एक जैसा नहीं होता. इसके कारण कुछ इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है. वहीं कुछ जगहों पर बारिश कम होने से सूखे की स्थिति बन सकती है. बारिश के इस बदलाव का असर खेती और पानी की उपलब्धता पर पड़ सकता है. 

जिन इलाकों में बहुत ज्यादा बारिश होती है, वहां बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है. वहीं कम बारिश वाले इलाकों में पानी की कमी और सूखे की समस्या बढ़ सकती है. अल-नीनो का असर तापमान पर भी पड़ता है. इसके दौरान दुनिया का औसत तापमान बढ़ सकता है. समुद्र का तापमान बढ़ने से समुद्र में रहने वाले जीवों पर भी असर पड़ सकता है.

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चीन में पहले ही दिखा असर

चीन के मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस साल वहां बाढ़ के मौसम में अल-नीनो का असर देखा गया है. उनका कहना है कि आने वाले शरद और सर्दी के मौसम में भी इसका असर बना रह सकता है. अगले साल की वसंत और गर्मी तक भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है.

फिलहाल वैज्ञानिक समुद्र के तापमान, हवाओं और बारिश पर लगातार नजर रख रहे हैं. आने वाले महीनों में अल-नीनो कितना मजबूत होता है, इससे पता चलेगा कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में इसका असर कितना और किस तरह दिखाई देता है.

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