इंडोनेशिया में जंगलों में लगी आग से जनवरी से सितंबर 2026 के बीच 19 लाख हेक्टेयर से ज्यादा जमीन जल चुकी है. इस आग का धुआं सिंगापुर, मलेशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के दूसरे देशों तक पहुंच गया है. Photo: AFP
धुएं के कारण हवा खराब हो रही है. लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है और कई जगह स्कूल बंद करने पड़े हैं. हालात को देखते हुए इंडोनेशिया ने आग बुझाने के लिए मलेशिया और सिंगापुर से मदद मांगी है. Photo: AFP
सिंगापुर में भी कई दिनों से हवा की हालत खराब बनी हुई है. वहां की नेशनल एनवायरनमेंट एजेंसी के मुताबिक, हवा के खराब रहने के लगातार दिनों की संख्या 2015 के रिकॉर्ड से आगे निकल गई है. साल 2015 में भी जंगलों की आग से पूरे इलाके में धुआं फैल गया था. इस बार भी आग और धुएं के कारण कई देशों में लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर असर पड़ रहा है. Photo: AFP
सैटेलाइट से मिली तस्वीरों का अध्ययन करने वाले नुसंतारा एटलस के मुताबिक, जनवरी से सितंबर 2026 के बीच इंडोनेशिया में 19 लाख हेक्टेयर से ज्यादा जमीन आग की चपेट में आई. यह बहुत बड़ा इलाका है. आग से जंगलों और आसपास के दूसरे इलाकों को भी नुकसान पहुंचा है. Photo: AFP
इंडोनेशिया की सरकार ने जुलाई के आखिर तक करीब 2.02 लाख हेक्टेयर जमीन जलने की जानकारी दी थी. वहीं, सैटेलाइट के आंकड़ों पर नजर रखने वाले मॉनिटर ने इससे कहीं ज्यादा जमीन जलने की बात कही. दोनों के आंकड़ों में अंतर है. इसकी वजह यह हो सकती है कि दोनों ने अलग-अलग तरीकों से आग से जली जमीन का पता लगाया है. Photo: AFP
सिंगापुर की नेशनल एनवायरनमेंट एजेंसी के मुताबिक, अक्टूबर में लगातार कई दिनों तक हवा की गुणवत्ता खराब रही. हवा के अस्वस्थ स्तर पर रहने वाले लगातार दिनों की संख्या 2015 के रिकॉर्ड से आगे निकल गई है. सिंगापुर में हवा की गुणवत्ता जांचने के लिए पीएसआई यानी पॉल्यूटेंट स्टैंडर्ड्स इंडेक्स का इस्तेमाल होता है. Photo: AFP
जब इसका स्तर 100 से ऊपर जाता है, तो हवा को अस्वस्थ माना जाता है. ऐसी हवा में रहने से लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है. बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारी से परेशान लोगों को इससे ज्यादा खतरा हो सकता है. Photo: AFP
इंडोनेशिया में आग बुझाने के लिए सरकारी टीमें काम कर रही हैं. अधिकारियों के मुताबिक, मलेशिया ने मदद के लिए तीन विमान और 52 कर्मचारियों को भेजने की पेशकश की है. सिंगापुर ने भी मदद देने की बात कही है. Photo: AFP
आग का धुआं इंडोनेशिया तक ही सीमित नहीं है. यह दूसरे देशों तक भी पहुंच रहा है. मलेशिया और ईस्ट तिमोर में खराब हवा के कारण स्कूल बंद करने पड़े हैं. सिंगापुर में भी लोगों को खराब हवा का सामना करना पड़ रहा है. धुएं के कारण बाहर होने वाली गतिविधियों पर भी असर पड़ा है. Photo: AFP
इंडोनेशिया में सूखे के मौसम में जंगलों में आग लगने की घटनाएं होती हैं. जब बारिश कम होती है और जमीन सूख जाती है, तो आग लगने और तेजी से फैलने का खतरा बढ़ जाता है. अल नीनो जैसी मौसमी स्थिति भी कुछ इलाकों में सूखे को बढ़ा सकती है. Photo: AFP
जंगलों में आग लगने से निकलने वाले धुएं में छोटे-छोटे कण और हानिकारक गैसें होती हैं. हवा के साथ ये कण दूर तक पहुंच सकते हैं. इनके कारण लोगों को खांसी, आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी हो सकती है. धुएं से हवा में प्रदूषण भी बढ़ता है. Photo: AFP
इंडोनेशिया और उसके पड़ोसी देश आग पर काबू पाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन जब तक जंगलों में आग लगती रहेगी, तब तक धुएं से राहत मिलना मुश्किल होगा. आग को फैलने से रोकना और समय पर उसका पता लगाना जरूरी है. Photo: AFP
जंगलों में लगी आग का असर सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं रहता. धुआं दूसरे देशों तक पहुंचकर वहां की हवा भी खराब कर सकता है. इसलिए आग बुझाने के साथ-साथ हवा की गुणवत्ता पर नजर रखना और लोगों को समय पर चेतावनी देना भी जरूरी है. Photo: AFP