बुरुंडी की राजधानी बुजुम्बुरा में सैकड़ों महिलाएं कचरे के ढेर से कोयले के टुकड़े और कबाड़ चुनकर अपना घर चला रही हैं. शहर के मुख्य कचरा स्थल मुबोन लैंडफिल में काम करने वाली इन महिलाओं को दिनभर मेहनत करने के बाद करीब 2,000 बुरुंडियन फ्रैंक यानी लगभग 60 रुपये मिलते हैं. Photo: AFP
इनमें से कई महिलाएं अपने परिवार में अकेले कमाने वाली हैं. देश में महंगाई बढ़ने और ईंधन की कमी के कारण इनकी कमाई परिवार के लिए और भी जरूरी हो गई है. ये महिलाएं कचरे में ऐसी चीजें खोजती हैं, जिन्हें दोबारा इस्तेमाल किया जा सके या बाजार में बेचकर पैसे कमाए जा सकें. Photo: AFP
इसमें कोयले के बचे हुए टुकड़े और कबाड़ शामिल हैं. इन्हें बेचकर वे अपने परिवार की जरूरतें पूरी करने की कोशिश करती हैं. बुरुंडी में महंगाई और ईंधन की कमी लोगों के लिए परेशानी बढ़ा रही है. ईंधन महंगा होने या आसानी से नहीं मिलने पर खाना बनाने जैसे जरूरी काम भी मुश्किल हो सकते हैं. Photo: AFP
ऐसे में लोग सस्ते विकल्प खोजते हैं. कचरे से कोयले के टुकड़े चुनना भी इसी जरूरत से जुड़ा है. मुबोन लैंडफिल बुजुम्बुरा का मुख्य कचरा स्थल है. यहां महिलाएं दिनभर कचरे में से कोयले के टुकड़े और बेचने लायक सामान चुनती हैं. फिर इन्हें स्थानीय बाजारों में बेचकर पैसे कमाती हैं. Photo: AFP
इनकी रोजाना की कमाई करीब 2,000 बुरुंडियन फ्रैंक यानी 0.70 डॉलर है. भारतीय रुपये में यह लगभग 60 रुपये होते हैं. हालांकि, हर दिन इतनी कमाई हो, यह जरूरी नहीं है. कचरे के ढेर में काम करने से चोट लगने का खतरा रहता है. वहां टूटे कांच और नुकीली चीजें हो सकती हैं, जिनसे हाथ-पैर कट सकते हैं. Photo: AFP
गंदगी के संपर्क में आने से भी परेशानी हो सकती है. इसलिए कचरे को सही तरीके से अलग करना और सुरक्षित जगह पर रखना जरूरी है. बुजुम्बुरा की महिलाओं की स्थिति दिखाती है कि महंगाई और ईंधन की कमी का असर गरीब परिवारों पर किस तरह पड़ता है. इन महिलाओं को सुरक्षित जगह पर काम करने और कमाई के दूसरे साधन मिलने से उनकी मुश्किलें कम हो सकती हैं. Photo: AFP