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इंडोनेशिया में धधक रहे जंगल, धुएं ने ढका आसमान... मलेशिया-सिंगापुर तक पहुंची जहरीली धुंध

आजतक साइंस डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 07 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 7:30 AM IST
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इंडोनेशिया में जंगलों और पीटलैंड में लगी आग ने इस साल बड़ी परेशानी खड़ी कर दी है. सुमात्रा और बोर्नियो के कई हिस्सों में कई हफ्तों से आग लगी हुई है. इससे निकलने वाला धुआं हवा के साथ मलेशिया और सिंगापुर तक पहुंच रहा है. कई जगहों पर धुंध छाई हुई है और हवा की क्वालिटी भी खराब हो गई है. Photo: AFP

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इस आग के पीछे गर्म और सूखा मौसम एक बड़ी वजह है. इस साल अल-नीनो की वजह से इंडोनेशिया के कई हिस्सों में बारिश कम और तापमान ज्यादा रहा. ऐसे में जंगल और सूखी जमीन जल्दी आग पकड़ रही है. जमीन को खेती या दूसरे कामों के लिए साफ करने के लिए आग लगाने की घटनाएं भी जंगलों की आग को बढ़ाती हैं. Photo: AFP

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इंडोनेशिया की आग का धुआं जब दूसरे देशों तक पहुंचता है तो इसे ट्रांसबाउंड्री हेज कहा जाता है. आसान भाषा में इसका मतलब है कि एक देश में लगी आग का धुआं दूसरे देशों की हवा भी खराब कर रहा है. Photo: AFP

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इंडोनेशिया में इस साल आग का असर बड़े इलाके में देखा गया है. जुलाई तक करीब 95,000 हेक्टेयर जमीन आग से प्रभावित हुई थी. अगस्त के आखिरी हफ्ते में ही करीब 6,902 हॉटस्पॉट मिले. इनमें सबसे ज्यादा 5,201 हॉटस्पॉट कालीमंतन में थे. Photo: AFP

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सितंबर में भी आग का असर कम नहीं हुआ. 15 सितंबर तक इंडोनेशिया में 1,437 बड़े और साफ तौर पर पहचाने गए हॉटस्पॉट मिले थे. इनमें सबसे ज्यादा 689 हॉटस्पॉट सेंट्रल कालीमंतन में थे. जंगलों की आग से बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड भी हवा में पहुंचती है. Photo: AFP

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1 से 7 सितंबर के बीच इंडोनेशिया की जंगलों की आग से करीब 1.97 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड निकलने का अनुमान लगाया गया. यह उस हफ्ते दुनिया में जंगलों की आग से निकले कुल इमिशन  का एक तिहाई से ज्यादा था. Photo: AFP

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इंडोनेशिया में कई जगह आग पीटलैंड में लगी है. पीटलैंड ऐसी जमीन होती है, जहां पुराने पेड़-पौधों के अवशेष लंबे समय तक जमा रहते हैं. इसमें काफी मात्रा में कार्बन जमा होता है. पीटलैंड आमतौर पर काफी नम रहती है. लेकिन जब यह जमीन सूख जाती है तो आग लगने का खतरा बढ़ जाता है. Photo: AFP

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यहां आग की एक खास बात यह है कि यह सिर्फ जमीन के ऊपर नहीं जलती. आग जमीन के अंदर भी सुलग सकती है. इसी वजह से ऊपर से आग बुझाने के बाद भी नीचे आग बची रह सकती है और कुछ समय बाद फिर फैल सकती है. यही कारण है कि पीटलैंड की आग को पूरी तरह बुझाना काफी मुश्किल होता है. Photo: AFP
 

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इंडोनेशिया में करीब 2.4 करोड़ हेक्टेयर पीटलैंड है. इनमें करीब 1.6 करोड़ हेक्टेयर जमीन ऐसी बताई जाती है, जहां आग का खतरा ज्यादा है. Photo: AFP

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इंडोनेशिया की आग का असर पड़ोसी देशों में भी दिखाई दे रहा है. मलेशिया के बोर्नियो वाले हिस्सों में कई जगह हवा बहुत खराब हो गई. सितंबर में कुछ इलाकों में एयर पॉल्यूशन इंडेक्स 500 से ऊपर चला गया था. सिंगापुर में भी धुंध की वजह से हवा की क्वालिटी खराब हुई. Photo: AFP

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हवा में मौजूद धुएं के छोटे कण सांस के साथ शरीर के अंदर जा सकते हैं. इससे खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारी वाले लोगों को ज्यादा परेशानी हो सकती है. इस आग से जंगलों और जानवरों को भी नुकसान पहुंच रहा है. पेड़-पौधे जलने के साथ कई जानवरों का रहने और खाने का ठिकाना भी खत्म हो जाता है. Photo: AFP
 

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इस साल अल-नीनो ने इंडोनेशिया में आग का खतरा बढ़ाया है. अल-नीनो के दौरान दक्षिण-पूर्व एशिया के कई हिस्सों में मौसम ज्यादा गर्म और सूखा हो सकता है. कम बारिश की वजह से जंगल और पीटलैंड सूख जाते हैं और आग तेजी से फैल सकती है. Photo: AFP

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इंडोनेशिया सरकार आग बुझाने और उस पर नजर रखने के लिए जमीन पर टीमों के साथ विमानों का भी इस्तेमाल कर रही है. लेकिन सिर्फ आग बुझाना ही काफी नहीं है. पीटलैंड में पानी का स्तर बनाए रखना और जमीन साफ करने के लिए आग लगाने की घटनाओं को रोकना भी जरूरी है. Photo: AFP

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अगर सूखा मौसम और जमीन साफ करने के लिए आग लगाने की घटनाएं जारी रहती हैं, तो आने वाले समय में इंडोनेशिया के साथ-साथ उसके पड़ोसी देशों को भी ऐसी जहरीली धुंध का सामना करना पड़ सकता है. Photo: AFP

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