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16 साल बाद भी समुद्र में जिंदा है तेल हादसे का जहर, मछलियों से लेकर झींगों तक की घटी संख्या

आजतक साइंस डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 24 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 12:43 PM IST
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साल 2010 में अमेरिका के पास मेक्सिको की खाड़ी में हुए बीपी ऑयल हादसे का असर 16 साल बाद भी समुद्री जीवों पर दिख रहा है. एक नई स्टडी के मुताबिक, हादसे के बाद समुद्र के गहरे पानी में मछलियों की संख्या 63.5 फीसदी तक घट गई. वहीं, झींगे और क्रिल जैसे छोटे जीवों की संख्या 62 फीसदी और स्क्विड व ऑक्टोपस जैसे जीवों की संख्या करीब 59.7 फीसदी कम हो गई. Photo: Getty

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इन जीवों की संख्या अब तक पहले जैसी नहीं हो पाई है. यह स्टडी वैज्ञानिक जर्नल पीएनएएस में प्रकाशित हुई है. इस हादसे के बाद समुद्र के अंदर मौजूद तेल के कुएं से करीब पांच महीने तक तेल निकलता रहा था. इससे समुद्र में रहने वाले कई जीवों को नुकसान हुआ. वैज्ञानिकों ने कई साल के आंकड़ों की जांच की, ताकि यह पता लगाया जा सके कि तेल फैलने से समुद्री जीवों की संख्या पर कितना असर पड़ा और इतने साल बाद भी उनकी संख्या क्यों नहीं बढ़ पाई है. Photo: Getty

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20 अप्रैल 2010 को डीपवॉटर होराइजन नाम के तेल निकालने वाले प्लेटफॉर्म पर धमाका हुआ था. यह बीपी कंपनी के तेल निकालने के काम से जुड़ा था. इस हादसे में 11 कर्मचारियों की मौत हो गई थी. इसके बाद समुद्र के अंदर मौजूद तेल के कुएं से करीब पांच महीने तक तेल निकलता रहा. इस दौरान लगभग 13.4 करोड़ गैलन तेल समुद्र में फैल गया था. Photo: Getty

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वैज्ञानिकों ने मेक्सिको की खाड़ी के उस हिस्से की जांच की, जहां समुद्र की सतह और तल के बीच कई तरह के जीव रहते हैं. समुद्र के इस हिस्से को 'ट्वाइलाइट जोन' कहा जाता है. यहां सूरज की रोशनी बहुत कम पहुंचती है. वैज्ञानिकों ने साल 2011 में अलग-अलग गहराई पर जाल डालकर और सोनार की मदद से समुद्री जीवों की संख्या का पता लगाया. करीब साढ़े तीन साल बाद वे उसी जगह पर दोबारा पहुंचे. इस बार जांच में पता चला कि समुद्री जीवों की संख्या काफी कम हो गई थी. कई जीवों की संख्या साल 2011 के मुकाबले घटकर सिर्फ एक-तिहाई से एक-चौथाई रह गई थी. Photo: Getty

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2011 से 2015 के बीच मछलियों की संख्या 63.5% घट गई. झींगे और क्रिल जैसे छोटे जीवों की संख्या में 62% की कमी आई. वहीं, स्क्विड और ऑक्टोपस जैसे जीवों की संख्या करीब 59.7% कम हो गई. क्रिल की संख्या में करीब 72% की गिरावट आई. वहीं, लालटेनफिश की संख्या पहले के मुकाबले करीब एक-तिहाई रह गई. ये छोटे जीव कई बड़ी मछलियों और दूसरे समुद्री जीवों का भोजन हैं. ऐसे में इनकी संख्या घटने से दूसरे जीवों को भी खाना मिलने में परेशानी हो सकती है. Photo: Getty

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वैज्ञानिकों के मुताबिक, समुद्र में फैले कच्चे तेल के साथ उसकी सफाई के लिए इस्तेमाल किए गए केमिकल से भी नुकसान हुआ. इन केमिकल की मदद से तेल छोटी-छोटी बूंदों में टूट गया. इससे समुद्र के गहरे हिस्सों में रहने वाले जीव भी तेल के संपर्क में आ गए. रिसर्च करने वाली टीम ने पानी के तापमान, ऑक्सीजन और भोजन की उपलब्धता जैसे कारणों की भी जांच की. Photo: Getty

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इन वजहों से जीवों की संख्या में इतनी बड़ी गिरावट का जवाब नहीं मिला. इसलिए वैज्ञानिकों का मानना है कि तेल का रिसाव इस नुकसान की सबसे बड़ी वजह हो सकता है. हालांकि, स्टडी से यह पूरी तरह साबित नहीं हुआ कि गिरावट का एकमात्र कारण तेल ही था. Photo: Getty

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समुद्र की अलग-अलग गहराइयों में रहने वाले जीव एक-दूसरे से जुड़े हैं. कई जीव रात में गहरे पानी से ऊपर आते हैं, जबकि कुछ बड़ी मछलियां और दूसरे शिकारी जीव शिकार के लिए नीचे जाते हैं. छोटे जीवों की संख्या कम होने से बड़ी मछलियों और दूसरे समुद्री जीवों को भी खाना कम मिल सकता है. इससे समुद्र में रहने वाले कई जीवों पर असर पड़ सकता है. Photo: Getty

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इस स्टडी से पता चलता है कि समुद्र में तेल फैलने का नुकसान कई साल तक बना रह सकता है. हादसे के 16 साल बाद भी समुद्री जीवों की संख्या पहले जैसी नहीं हो पाई है. वैज्ञानिकों का कहना है कि समुद्र में तेल निकालते समय सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है. साथ ही, गहरे समुद्र में तेल निकालने या खनन से पहले वहां रहने वाले जीवों को होने वाले नुकसान को समझना भी जरूरी है. Photo: Getty

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