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फिलीपींस समुद्र के बढ़ते खतरे से बचने के लिए कंक्रीट नहीं, समंदर का ही ले रहा सहारा

आजतक साइंस डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 03 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 1:36 PM IST
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जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र का जलस्तर बढ़ना दुनिया के कई तटीय इलाकों के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है. समुद्र की ऊंची लहरें, तूफानी ज्वार और जमीन का धीरे-धीरे नीचे धंसना तटीय बस्तियों में बाढ़ का खतरा बढ़ा रहे हैं. फिलीपींस की राजधानी मनीला के उत्तर में स्थित छोटा-सा पमारावान द्वीप भी इसी समस्या से जूझ रहा है. Photo: AFP 

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यहां रहने वाले करीब 3,000 लोगों ने लंबे समय तक अपने घरों को बाढ़ से बचाने के लिए कंक्रीट की परतें ऊंची कीं, लेकिन हर बार पानी का खतरा फिर सामने आ गया. अब इस द्वीप के लोगों ने समस्या से निपटने के लिए एक अलग रास्ता चुना है. वे कंक्रीट की बड़ी दीवारें बनाने के बजाय बांस, लकड़ियों और फेंके गए सीप के खोलों की मदद से समुद्र की लहरों की ताकत कम करने और तट को मजबूत बनाने की कोशिश कर रहे हैं. Photo: AFP

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पमारावान द्वीप की भौगोलिक स्थिति इसे बाढ़ और समुद्री तूफानों के प्रति बेहद संवेदनशील बनाती है. यहां तेज तूफानी ज्वार के दौरान समुद्र का पानी तटीय इलाकों में घुस आता है. इसके साथ ही समुद्र का बढ़ता जलस्तर और जमीन का नीचे धंसना समस्या को और गंभीर बना रहे हैं. जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र के स्तर में वृद्धि से तटीय क्षेत्रों में पानी के पहुंचने का खतरा बढ़ता है. वहीं, जमीन के धंसने से समुद्र के मुकाबले द्वीप की ऊंचाई और कम होती जाती है. Photo: AFP

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स्थानीय निवासियों ने अपने घरों को बचाने के लिए कई बार कंक्रीट की नई परतें बनाईं और घरों का स्तर ऊंचा किया. लेकिन यह उपाय स्थायी समाधान नहीं बन पाया. घरों को ऊंचा करने से कुछ समय के लिए राहत मिल सकती है, लेकिन इससे समुद्र की लहरों की ताकत कम नहीं होती और न ही पूरे तटीय क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित होती है. जब तेज लहरें और बाढ़ का पानी बार-बार तट पर हमला करते हैं, तो केवल व्यक्तिगत घरों को ऊंचा करना पर्याप्त नहीं रहता. इसके लिए ऐसे उपायों की जरूरत होती है जो समुद्र और जमीन के बीच प्राकृतिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत कर सकें. Photo: AFP

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पमारावान में अब बांस के खंभों और झाड़ियों जैसी लकड़ियों यानी ब्रशवुड का इस्तेमाल करके तट के पास एक प्राकृतिक अवरोध तैयार किया जा रहा है. इस परियोजना की शुरुआत मालोलोस शहर की सरकार ने एक डच इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी के साथ अध्ययन के बाद की थी. मालोलोस शहर के अधिकार क्षेत्र में ही यह द्वीप आता है. Photo: AFP

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पिछले साल मई तक इस परियोजना के तहत स्थानीय लोगों समेत कई श्रमिकों ने समुद्र तट के किनारे बांस के खंभे लगाना शुरू कर दिया था. इन खंभों के बीच लकड़ियों और झाड़ियों को भरा गया है. इसका उद्देश्य समुद्र से आने वाले पानी के बहाव को धीमा करना है. जब पानी की गति कम होती है, तो उसके साथ बहकर आने वाली मिट्टी और तलछट इन अवरोधों के पीछे जमा हो सकती है. समय के साथ इससे समुद्र की तलहटी की ऊंचाई बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है. Photo: AFP
 

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यह तरीका समुद्र को पूरी तरह रोकने के बजाय उसकी ऊर्जा को कम करने पर आधारित है. तेज लहरें जब सीधे तट से टकराती हैं, तो वे मिट्टी को बहाकर ले जा सकती हैं और तटीय कटाव बढ़ा सकती हैं. लेकिन बांस और लकड़ियों से बने अवरोध लहरों की गति को कम कर सकते हैं. इससे पानी के साथ आने वाली तलछट को जमा होने का मौका मिलता है और तटीय जमीन को स्थिर बनाने में सहायता मिल सकती है. Photo: AFP

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इस परियोजना का एक अन्य महत्वपूर्ण हिस्सा समुद्र में सीप के फेंके गए खोलों का इस्तेमाल है. एएफपी के पत्रकारों ने जब इस स्थान का दौरा किया, तब श्रमिक समुद्र तट से करीब 100 मीटर दूर सीप के खोलों से एक ब्रेकवॉटर यानी लहरों की ताकत कम करने वाला अवरोध बना रहे थे. Photo: AFP

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