कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने पार्टी नेता सौरव दास और अभिजीत दिपके को तिहाड़ जेल भेजे जाने पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने सवाल किया है कि दोनों की गलती क्या थी? उन्होंने कहा, 'क्या जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने की कोशिश करना गुनाह था?'. वहीं, पुलिस ने पीस बॉन्ड भरवाकर अजिंक्य शिंदे को रिहा कर दिया है.
अभिजीत दिपके ने इस कार्रवाई को गलत बताते हुए सौरव दास और आशुतोष रांका के जेल भेजे जाने पर सवाल उठाया है. उन्होंने X पर पोस्ट करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की है.
उन्होंने लिखा, 'आशु और सौरव को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. उनकी गलती? जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराना.'
हमारा और INDIA ब्लॉक का एक ही मकसद: दिपके
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि उनका और INDIA ब्लॉक का एक ही मकसद है. दिपके ने कहा कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' एक स्वतंत्र संस्था है और हमेशा रहेगी. उन्होंने साफ कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि पार्टी INDIA ब्लॉक के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि दोनों के आंदोलन का मकसद एक ही है.
'बेल बॉन्ड की शर्तों को तोड़ा'
सौरव दास और आसुतोष रांका को बेल बॉन्ड की शर्तें तोड़ने के जुर्म में पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेजा गया है. वहीं, पुलिस ने 5 हजार का पीस बॉन्ड भरवाकर अजिंक्य शिंदे को रिहा कर दिया है. SEM कोर्ट ने उन्हें 6 महीने तक अशांति न फैलाने का आदेश दिया है.
पुलिस के मुताबिक, सौरव दास और आशुतोष रांका ने भारतीय न्याय सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 का दोबारा उल्लंघन किया है. पुलिस ने उन्हें रिपीट ऑफेंडर बताते हुए उनके पिछले आचरण का हवाला दिया.
पुलिस ने बताया कि दोनों ने बेल बॉन्ड की शर्तों को तोड़ा है, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया है.
जंतर-मंतर को हाल ही में निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया गया है. मंगलवार सुबह सौरव दास, आशुतोष रांका और अंजिक्य शिंदे समेत सीजेपी के कार्यकर्ता भारी बैरिकेडिंग वाले जंतर-मंतर क्षेत्र में दाखिल हुए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए नारेबाजी की. जिसके कारण तीनों को हिरासत में लिया गया था.
एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त पर हुए थे रिहा
इससे पहले शनिवार को भी अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचने के बाद हिरासत में लिया गया था. उस समय सुरक्षा व्यवस्था कड़ी होने के कारण सीजेपी का ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रस्तावित प्रदर्शन नहीं हो पाया था. तीनों को एक दिन बाद इस शर्त पर रिहा किया गया था कि वे एक साल तक शांति भंग नहीं करेंगे
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