देरी से जानकारी, खराब ट्रैक रिकॉर्ड... CJP को क्यों नहीं मिली जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट की इजाजत?

CJP के आज के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी थी. पुलिस ने बिना इजाजत प्रदर्शन करने पहुंचे कई प्रदर्शनकारियों को डिटेन कर लिया है. पुलिस ने तीन वजहों से प्रोटेस्ट की इजाजत नहीं दी. जानिए, दिल्ली में प्रदर्शन की अनुमति लेने के लिए क्या नियम हैं और पुलिस किन आधारों पर रोक लगा सकती है.

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जंतर मंतर पर CJP को तीन वजहों से प्रोटेस्ट के लिए परमिशन नहीं मिली. (Photo-ITG) जंतर मंतर पर CJP को तीन वजहों से प्रोटेस्ट के लिए परमिशन नहीं मिली. (Photo-ITG)

अंशुल सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 10 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 11:56 AM IST

दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन को लेकर पुलिस और पार्टी के बीच विवाद हो गया है. CJP ने आज 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया था. लेकिन दिल्ली पुलिस ने इसकी इजाजत नहीं दी. इसके बाद भी पार्टी के समर्थक प्रदर्शन के लिए दिल्ली पहुंचे. पुलिस ने CJP नेता अभीजीत दीपके, सौरव दाम, आशुतोष रांका, धुव्र राठी समेत 150 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया.

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दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की इजाजत नहीं देने के पीछे तीन मुख्य वजहें बताई हैं. पहली, प्रदर्शन की जानकारी देर से देना. दूसरी, पहले के प्रदर्शनों में तय शर्तों का पालन नहीं करना. तीसरी, कानून-व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं. पुलिस का कहना है कि CJP की ओर से 7 अक्टूबर को जानकारी दी गई थी. जबकि प्रदर्शन 10 अक्टूबर को होना था. यानी पुलिस को तैयारी के लिए सिर्फ तीन दिन मिले.

सवाल है कि क्या दिल्ली में प्रदर्शन के लिए पहले से इजाजत लेना जरूरी है? आवेदन कितने दिन पहले देना होता है? क्या पुलिस किसी भी प्रदर्शन को रोक सकती है? आइए, समझते हैं पूरा मामला.

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पहली वजह: प्रदर्शन की जानकारी देने में देरी की

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दिल्ली पुलिस का कहना है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए कम से कम 10 दिन पहले आवेदन देना होता है. इससे पुलिस को सुरक्षा और ट्रैफिक की तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिलता है. CJP ने 10 अक्टूबर के प्रदर्शन के लिए 7 अक्टूबर को जानकारी दी. इस तरह तय समय से काफी देर से आवेदन किया गया.

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस को भीड़ की संख्या, सुरक्षा और यातायात का इंतजाम करना होता है. आसपास के इलाकों में सरकारी दफ्तर और दूसरे अहम स्थान भी हैं. ऐसे में पुलिस का कहना है कि आखिरी समय पर जानकारी मिलने से जरूरी तैयारियां करना मुश्किल हो सकता है.

दूसरी वजह: CJP पहले तय शर्तों का पालन नहीं करने का आरोप

दिल्ली पुलिस ने CJP के पुराने प्रदर्शनों का रिकॉर्ड भी वजह बताया है. नई दिल्ली की संयुक्त पुलिस आयुक्त नूपुर प्रसाद  ने कहा कि, संगठन ने पहले के प्रदर्शनों के दौरान तय दिशा-निर्देशों और कानूनी शर्तों का पालन नहीं किया था. पुलिस का आरोप है कि पहले दिए गए आश्वासनों और निर्देशों का उल्लंघन किया गया. इसी वजह से इस बार परमिशन देने पर सवाल उठे.

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तीसरी वजह: कानून-व्यवस्था और सुरक्षा की चिंता

पुलिस ने पब्लिक सेफ्टी और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई है. जंतर-मंतर और उसके आसपास के इलाके में प्रदर्शन होने से सड़क यातायात प्रभावित हो सकता है. भीड़ बढ़ने पर सुरक्षा व्यवस्था संभालना भी चुनौती बन सकता है.

इसके अलावा, पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत लागू प्रतिबंधों का भी हवाला दिया है. इस धारा के तहत प्रशासन कुछ परिस्थितियों में लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगा सकता है. इसका मकसद संभावित खतरे या सार्वजनिक अव्यवस्था को रोकना होता है.

दिल्ली में प्रदर्शन की अनुमति का क्या है नियम?

दिल्ली में किसी भी जगह प्रदर्शन करने के लिए आयोजकों को संबंधित पुलिस अधिकारी के पास आवेदन देना होता है. जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए नई दिल्ली जिले के पुलिस उपायुक्त के पास आवेदन की प्रक्रिया लागू है. आवेदन में प्रदर्शन का मकसद, तारीख, समय, आयोजकों की जानकारी और अनुमानित भीड़ का ब्योरा देना होता है.

पुलिस इन जानकारियों के आधार पर सुरक्षा और ट्रैफिक का आकलन करती है. जरूरत पड़ने पर आयोजकों पर कुछ शर्तें भी लगाई जा सकती हैं. केवल पुलिस को जानकारी दे देना इजाजत मिलने के बराबर नहीं है. अनुमति की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी होता है.

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क्या हर प्रदर्शन के लिए मिल जाती है इजाजत?

देश में प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कोई भी संगठन अपनी पसंद की जगह पर बिना इजाजत प्रोटेस्ट कर सकता है. पुलिस सुरक्षा, भीड़, ट्रैफिक और सार्वजनिक व्यवस्था को ध्यान में रखकर फैसला करती है. कुछ संवेदनशील इलाकों में अलग प्रतिबंध भी लागू हो सकते हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन नागरिकों का अधिकार है. लेकिन इस अधिकार के साथ आम लोगों की सुरक्षा और आवाजाही का भी ध्यान रखना जरूरी है. इसलिए प्रदर्शन की जगह और उसके तरीके पर उचित शर्तें लगाई जा सकती हैं.

इजाजत नहीं मिलने पर क्या कर सकती है पुलिस?

अगर किसी प्रदर्शन को परमिशन नहीं मिली है और फिर भी लोग प्रतिबंधित इलाके में इकट्ठा होते हैं, तो पुलिस उन्हें रोक सकती है. हालात के मुताबिक, लोगों को हिरासत में भी लिया जा सकता है. आदेशों का उल्लंघन होने पर कानूनी कार्रवाई भी संभव है.

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CJP के मामले में पुलिस ने इजाजत नहीं देने के पीछे आवेदन में देरी, पुराने प्रदर्शनों में शर्तों के उल्लंघन और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला दिया है. वहीं, प्रदर्शन को लेकर पार्टी का रुख अलग है. 

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