CJP नेताओं की हिरासत पर बोलीं सुप्रिया सुले, शांतिपूर्ण मार्च से सरकार को क्यों दिक्कत

दिल्ली में प्रस्तावित आंदोलन से पहले दीपके और CJP के नेताओं को हिरासत में लिए जाने का मामला गरमा गया है. इंडिया टुडे कॉन्क्लेव मुंबई में सुप्रिया सुले ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार की आलोचना की.

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CJP नेताओं की हिरासत पर सुप्रिया सुले का हमला (Photo-ITG) CJP नेताओं की हिरासत पर सुप्रिया सुले का हमला (Photo-ITG)

राजदीप सरदेसाई

  • नई दिल्ली ,
  • 10 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 11:44 AM IST

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव मुंबई में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की नेता सुप्रिया सुले ने दीपके और CJP के नेताओं को हिरासत में लिए जाने की निंदा की, उन्होंने कहा कि ये नेता दिल्ली में शांतिपूर्ण आंदोलन में शामिल होने जा रहे थे. सुले ने सरकार की कार्रवाई को कायरतापूर्ण बताते हुए सवाल किया कि अगर आंदोलन शांतिपूर्ण था, तो नेताओं को हिरासत में लेने की जरूरत क्यों पड़ी.

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सुप्रिया सुले ने कहा कि सरकार का तर्क है कि दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने से कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती थी, इसी आशंका के चलते धारा 144 लागू की गई और एहतियात के तौर पर हिरासत में लिया गया. हालांकि, सुले ने इस दलील पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार ने आंदोलनकारियों से बातचीत करने की कोशिश क्यों नहीं की.

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उन्होंने कहा, “अगर कोई शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहा है, तो उसे हिरासत में लेने की जरूरत क्या है. आखिर वे क्या कर लेते. पिछले आंदोलन के दौरान जंतर-मंतर पर कभी हिंसा नहीं हुई थी. सुले ने जंतर-मंतर पर हुए पिछले आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि वहां 24 घंटे युवा मौजूद रहते थे, लेकिन न हिंसा हुई और न ही किसी के साथ दुर्व्यवहार हुआ, उन्होंने कहा कि वहां महिलाएं और युवा लड़कियां भी अपने घर की तरह सुरक्षित महसूस कर रही थीं, उनके मुताबिक, यह देखकर अच्छा लगा कि नई पीढ़ी अपने विचारों को लेकर स्पष्ट है और आंदोलन किसी खास वर्ग तक सीमित नहीं था, बल्कि एक उद्देश्य से जुड़ा था.

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सरकार पर संवाद नहीं करने का आरोप

सरकार की ओर से यह दलील दी जा रही है कि जुलाई में संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा और संसद की कार्यवाही बाधित होने जैसी स्थिति दोबारा न बने, इसलिए एहतियाती कदम उठाए गए, लेकिन सुप्रिया सुले ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि सरकार के पास आंदोलनकारियों से बातचीत करने का विकल्प था.

उन्होंने सवाल किया कि सरकार की ओर से किसने आंदोलनकारियों से संपर्क करने की कोशिश की. क्या किसी ने विपक्ष या CJP के नेतृत्व से बातचीत की. सुले के मुताबिक, अगर सरकार ने आंदोलनकारियों से संवाद किया होता, तो मार्च शांतिपूर्ण तरीके से निकाला जा सकता था.

उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार को संवाद करना ही नहीं आता. सुले ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे पर CJP के साथ खड़ी है. 

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