उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिस समाजवादी पार्टी को निशाने पर लिया है. वाराणसी में शिक्षक सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सपा ने अपनी सरकार के दौरान एक भर्ती आयोग के अध्यक्ष पद पर अनिल यादव को बैठा दिया था, जो इसके योग्य भी नहीं थे.
सीएम योगी ने कहा कि उस समय उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन (UPPSC) में एक ऐसे व्यक्ति ने टॉप किया था जो हाईस्कूल, इंटरमीडिएट और बीए- तीनों परीक्षाओं में थर्ड डिवीजन पास था.
उन्होंने सवाल उठाया कि उस दौर में कैसी अराजकता और गुंडागर्दी थी, जहां युवाओं की जिंदगी के साथ खिलवाड़ होता था और दूसरी ओर दंगा, उपद्रव और माफिया हावी रहते थे.
PDA का मतलब 'परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी'
सपा के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के नारे पर तंज करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, 'मैं पूछना चाहता हूं समाजवादियों से, ये लोग जो पीडीए चिल्लाते थे, वो राज्यसभा टिकट में पीडीए कहां चला गया? हम तो पहले दिन से कह रहे थे कि समाजवादी पार्टी के पीडीए का मतलब परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी या बहुत होगा तो पराया धन अपना है.'
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मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि उन्होंने दो प्रत्याशी बनाए; किसी चचाजान या काशी के ही किसी यादव को, गाजीपुर या बलिया से टिकट दे सकते थे. दूसरी सीट पर किसी दलित या पार्टी के पारंपरिक मुस्लिम वोट बैंक में से किसी को मौका दे सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.
'मुंबई के धन्नासेठ को बेची सीट'
सीएम योगी ने आगे कहा कि सपा ने वो राज्यसभा सीट मुंबई के किसी धन्नासेठ को बेच दी. उन्होंने कहा कि इस तरह 'परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी' और 'पराया धन अपना' दोनों बातें बिल्कुल साबित हो गईं.
आशीष श्रीवास्तव