तोप के पाकिस्तानी गोले निकले फुस्स, यूक्रेनी कमांडर की शिकायत

यूक्रेनी तोपखाने के कमांडर ने पाकिस्तान से सप्लाई किए गए 155मिमी गोले की गुणवत्ता पर शिकायत की है. उन्होंने कहा कि कुछ बैचों में समस्या है. अलग बैलिस्टिक डेटा की जरूरत ताकि जांच हो सके.

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ये सैनिक तोप में भरने के लिए 105mm के गोले को तैयार कर रहा है. (Photo: Representative/Getty) ये सैनिक तोप में भरने के लिए 105mm के गोले को तैयार कर रहा है. (Photo: Representative/Getty)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 23 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 6:27 PM IST

यूक्रेनी तोपखाने के एक कमांडर ने पाकिस्तान में बने 155मिमी गोला-बारूद की गुणवत्ता में गड़बड़ी की शिकायत की है. इनमें पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्टरीज यानी POF से जुड़े गोले भी शामिल हैं. कमांडर के अनुसार कुछ बैचों में गुणवत्ता संबंधी समस्याएं सामने आई हैं. 

इससे तोपखाने की टीमों को अलग-अलग निर्माताओं के लिए अलग बैलिस्टिक डेटा का इस्तेमाल करना पड़ रहा है. यह स्थिति युद्ध के मैदान में सटीकता और दक्षता को प्रभावित कर सकती है. पाकिस्तान निर्मित M107 155mm गोले पहले भी यूक्रेनी सेवा में गए हैं. 

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अमेरिकी रिकॉर्ड्स के अनुसार पाकिस्तान में निर्मित 155मिमी गोला-बारूद के अनुबंध 364 मिलियन डॉलर मूल्य के रहे हैं. ये आपूर्ति तीसरे पक्ष या अमेरिकी कार्यक्रमों के जरिए हुई है. आधुनिक युद्ध में 155मिमी तोपखाना सिस्टम व्यापक रूप से इस्तेमाल होता है. इसलिए गोले की विश्वसनीयता बेहद जरूरी है.

कमांडर ने बताया कि अलग-अलग निर्माताओं के गोलों के लिए अलग बैलिस्टिक टेबल की जरूरत पड़ रही है. इससे फायरिंग की तैयारी में समय लगता है. गलती की संभावना बढ़ जाती है. युद्ध की तीव्रता में ऐसी गड़बड़ी ऑपरेशनल चुनौती पैदा कर सकती है. कुछ बैच ठीक काम करते हैं जबकि कुछ में समस्या दिखती है. यह उत्पादन क्वालिटी कंट्रोल या बैच-टू-बैच अंतर की ओर इशारा करता है.

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एम107 एक मानक हाई-एक्सप्लोसिव 155मिमी प्रोजेक्टाइल है जो कई देशों में इस्तेमाल होता है. पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्टरीज लंबे समय से गोला-बारूद उत्पादन और निर्यात भी करती है. अमेरिकी अनुबंधों से पता चलता है कि मांग के समय बड़ी मात्रा में आपूर्ति की गई. फिर भी मैदान में गुणवत्ता की शिकायतें चिंता का विषय हैं.

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1965 के युद्ध का जिक्र क्यों?

कुछ चर्चाओं में 1965 के युद्ध का जिक्र किया जाता है जिसमें जैसलमेर के तनोट क्षेत्र में दागे गए कुछ पाकिस्तानी गोलों के न फटने की रिपोर्ट्स का उल्लेख होता है. दशकों बाद यूक्रेन में गुणवत्ता संबंधी शिकायतें आने से तुलना की जा रही है. हालांकि ऐतिहासिक घटनाओं और वर्तमान शिकायतों को सीधे जोड़ना सावधानी का विषय है. आधुनिक उत्पादन प्रक्रियाएं अलग हैं और शिकायतें विशिष्ट बैचों तक सीमित हो सकती हैं.

यूक्रेन संघर्ष में गोला-बारूद की भारी मांग है. कई देशों से आपूर्ति हो रही है. अलग-अलग स्रोतों से आने वाले गोलों में अंतर होना असामान्य नहीं. फिर भी लगातार शिकायतें सप्लाई सीरीज और गुणवत्ता जांच को लेकर सवाल उठाती हैं. यूक्रेनी बल विभिन्न निर्माताओं के गोलों को अपने हिसाब से ढालने की कोशिश कर रहे हैं.

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इस तरह की रिपोर्ट्स निर्यातक देशों के लिए गुणवत्ता मानकों पर ध्यान देने की जरूरत रेखांकित करती हैं. युद्ध के मैदान में विश्वसनीयता जीवन-मरण का सवाल बन जाती है. पाकिस्तान समेत आपूर्तिकर्ताओं को बैच स्थिरता सुनिश्चित करनी होगी. कुल मिलाकर यूक्रेनी कमांडर का बयान गोला-बारूद की क्वालिटी की अहमियत बताती है. गड़बड़ी की समस्या का समाधान उत्पादन और परीक्षण प्रक्रियाओं में सुधार से संभव है. 

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