
गोरखपुर-फैजाबाद स्नातक एमएलसी सीट की मतगणना को लेकर बीजेपी के बागी MLC देवेंद्र प्रताप सिंह ने मतगणना ड्यूटी में लगे कर्मचारियों के नाम खुला पत्र लिखा है. पत्र में उन्होंने मतगणना की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने की अपील की है. साथ ही, चुनाव पर्यवेक्षक IAS अभय सिंह की तैनाती पर सवाल उठाते हुए उनके खिलाफ गंभीर आरोपों का जिक्र किया है.
देवेंद्र प्रताप सिंह ने अपने पत्र की शुरुआत 'मेरे प्यारे भाइयों' संबोधन से की. उन्होंने लिखा कि मतगणना की पारदर्शिता और शुचिता से लोकतंत्र के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत होता है. उन्होंने मतगणना कर्मियों से अपील की कि वे किसी भी दबाव में आए बिना अपनी जिम्मेदारी निभाएं. पत्र में सिंह ने कहा कि मतगणना में धांधली न होने देना कर्मचारियों की नैतिक जिम्मेदारी है. उन्होंने यह भी दावा किया कि कर्मचारियों पर धांधली करने का भारी दबाव हो सकता है.
चुनाव पर्यवेक्षक पर उठाए सवाल
बीजेपी एमएलसी ने पत्र में चुनाव पर्यवेक्षक IAS अभय सिंह की तैनाती का मुद्दा उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि पर्यवेक्षक अवैध खनन और रिश्वतखोरी के मामले में चार्जशीटेड हैं. पत्र में यह दावा भी किया गया कि CBI ने उनके घर से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद की थी.
देवेंद्र प्रताप सिंह ने इन आरोपों का उल्लेख करते हुए चुनाव पर्यवेक्षक की नियुक्ति के उद्देश्य पर सवाल उठाए. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है. इस संबंध में संबंधित अधिकारी का पक्ष भी सामने नहीं आया है.
'अन्याय के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से लड़ता रहा हूं'
अपने पत्र में देवेंद्र प्रताप सिंह ने पहले उठाए गए कुछ मामलों का भी जिक्र किया. उन्होंने मेधावी छात्र आयुष मिश्रा, अभिषेक मद्देशिया की हत्या और दलित सिपाही के साथ कथित अन्याय से जुड़े मामलों का उल्लेख किया. उन्होंने दावा किया कि वह अन्याय के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से लड़ते रहे हैं और आगे भी कर्मचारियों के साथ खड़े रहेंगे.

मतगणना की निष्पक्षता पर जोर
पत्र के अंत में देवेंद्र प्रताप सिंह ने मतगणना कर्मियों से निष्पक्षता बनाए रखने की अपील की. उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी परिस्थिति में वह उनके साथ खड़े रहेंगे.
गोरखपुर-फैजाबाद स्नातक एमएलसी सीट पर चुनाव पर्यवेक्षक की तैनाती और मतगणना की पारदर्शिता को लेकर लिखे गए इस पत्र ने राजनीतिक चर्चा को जन्म दिया है. अब मामले में संबंधित अधिकारी का पक्ष और आरोपों की पुष्टि अहम होगी.