कर्नाटक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पथ संचलन को लेकर सियासी विवाद बढ़ गया है. रविवार, 25 अक्टूबर को कई शहरों में संघ के स्वयंसेवकों ने मार्च निकाला. वहीं, अनुमति से जुड़ी दिक्कतों के चलते कुछ जगह कार्यक्रम टालने पड़े. BJP ने इसे लेकर कांग्रेस सरकार पर RSS को परेशान करने का आरोप लगाया है. सरकार का कहना है कि कुछ जगहों पर चुनाव आचार संहिता के कारण अनुमति नहीं दी जा सकी.
RSS के 100 साल पूरे होने और विजयादशमी के मौके पर कर्नाटक के कई शहरों में पथ संचलन निकाला गया. बेंगलुरु के जयनगर में BJP नेता आर अशोक और चलवादी नारायणस्वामी भी शामिल हुए. हुबली में हजारों स्वयंसेवकों ने नेहरू मैदान से मार्च निकाला. यहां केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी और विधायक महेश तेंगिनकाई भी मौजूद रहे.
कलबुर्गी में भी स्वयंसेवकों ने तय रास्ते से मार्च निकाला. यहां आयोजकों को निर्धारित मार्ग का पालन करने और भड़काऊ भाषण नहीं देने की शर्त पर अनुमति मिली थी. सभी कार्यक्रम पुलिस सुरक्षा के बीच कराए गए, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे.
चुनाव आचार संहिता के कारण अटका कार्यक्रम
हालांकि, कर्नाटक में हर जगह पथ संचलन नहीं हो सका. कुछ जगहों पर अनुमति से जुड़ी दिक्कतों के कारण कार्यक्रम टालने पड़े. तुमकुरु में मार्च अब 1 नवंबर को होगा, जबकि कोलार जिले के मुलबागल में इसे 31 अक्टूबर के लिए तय किया गया है. वहीं, चिक्कबल्लापुर में जिला प्रशासन ने अनुमति वापस ले ली. कोप्पल में भी पथ संचलन टाले जाने की खबर है.
BJP ने सरकार पर लगाए आरोप
आर अशोक ने अनुमति देने में देरी पर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि RSS को इस बार बेवजह परेशान किया गया. उनका कहना था कि आखिरी समय तक आयोजकों को इंतजार कराना ठीक नहीं है.
हुबली में मार्च में शामिल हुए प्रल्हाद जोशी ने भी सरकार की आलोचना की. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर चुनाव आचार संहिता को अनुमति न देने का बहाना बनाया गया. जोशी ने कहा कि हुबली में आचार संहिता लागू होने के बावजूद पुलिस ने मार्च की अनुमति दी.
वहीं, मंत्री प्रियांक खड़गे का कहना है कि पथ संचलन करने वाले संगठनों को पुलिस को सिर्फ सूचना देने के बजाय पहले आवेदन करके अनुमति लेनी चाहिए. उन्होंने RSS के रजिस्ट्रेशन, आय के स्रोतों और मार्च में स्वयंसेवकों के लाठी लेकर चलने पर भी सवाल उठाए हैं.