पाकिस्तानी सेना द्वारा अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में किए गए हवाई हमले में अमेरिकी जीबीयू-12 पेववे II लेजर-गाइडेड बम के इस्तेमाल की संभावना जताई जा रही है. अफगानिस्तानी सोर्सेज और बम के अवशेषों की जांच के आधार पर यह दावा किया जा रहा है. हमले में नागरिक हताहत होने की खबरें आई हैं.
प्रकाशित तस्वीरों में बम के अवशेष दिखे हैं जिन पर 'FOR USE ON MK82 FIN GUIDED BOMB' और कोड 96214 जैसे निशान हैं. ये निशान पेववे परिवार के गाइडेंस सिस्टम और रेथियॉन कंपनी से जुड़े माने जाते हैं. जीबीयू-12 पेववे II एक लेजर-गाइडेड बम है जो सामान्य इस्तेमाल वाले एमके-82 बम पर बेस्ड है. यह लगभग 227 किलोग्राम वजन का होता है.
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इसकी कुल लंबाई लगभग 3.3 मीटर और व्यास करीब 27 सेंटीमीटर होता है. लेजर गाइडेंस किट लगाने से यह सटीक निशानेबाजी करने में सक्षम हो जाता है. लक्ष्य को लेजर से चिह्नित किया जाता है. बम उस संकेत का पीछा करता है. यह बम कई देशों के वायुसेना शस्त्रागार में शामिल है और विभिन्न संघर्षों में इस्तेमाल हुआ है.
अवशेषों की पहचान और सीमाएं
अवशेषों की तस्वीरों से जीबीयू-12 की संभावना उठाई गई है लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि केवल हिस्सों की पहचान से पूरा बम और उसकी उत्पत्ति की पुष्टि नहीं होती. स्वतंत्र जांच की जरूरत बताई जा रही है. पाकिस्तान ने हमलों को आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई बताया जबकि अफगान पक्ष ने नागरिक क्षेत्रों पर हमला बताया.
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अमेरिका ने अतीत में पाकिस्तान और अन्य देशों को ऐसे हथियार आपूर्ति किए हैं. लेजर-गाइडेड बम सटीकता बढ़ाने के लिए जाने जाते हैं लेकिन घनी आबादी वाले इलाकों में उनके इस्तेमाल से नागरिक नुकसान की आशंका बनी रहती है. इस मामले में अवशेषों की जांच जारी है.
सीमा पार हवाई हमले दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ाते रहे हैं. हथियारों की उत्पत्ति और इस्तेमाल के दावे अक्सर विवाद का विषय बनते हैं. जीबीयू-12 जैसी प्रणालियां आधुनिक वायु युद्ध का हिस्सा हैं. फिलहाल दावा तस्वीरों और तकनीकी मिलान पर आधारित है. पूरी सच्चाई सामने आने के लिए गहन जांच की प्रतीक्षा है.
ऋचीक मिश्रा