भारतीय वायु सेना ने अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए पहले बैच के अग्निवीर वायु कर्मियों में से 712 को नियमित कैडर में रखने का फैसला किया है. कुल 2850 अग्निवीरों में से यह संख्या करीब 25 प्रतिशत है जो योजना के मौजूदा ढांचे के अनुरूप है. बाकी कर्मियों को सूचित कर दिया गया है कि वे नियमित सेवा में नहीं रहेंगे.
यह प्रक्रिया पहले बैच के चार साल के कार्यकाल के अंत के करीब पहुंच रही है. अग्निवीरों को व्यक्तिगत रूप से उनके नतीजों की जानकारी दी गई है. वायुसेना ने आधिकारिक रूप से ये आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं लेकिन सूत्रों के अनुसार चयन प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है.
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चयन निर्धारित मानदंडों पर आधारित है जिसमें कार्यकाल के दौरान प्रदर्शन और संगठनात्मक जरूरतें शामिल हैं. अग्निपथ योजना के तहत प्रत्येक बैच के अधिकतम 25 प्रतिशत कर्मियों को नियमित बल में शामिल किया जा सकता है. बाकी कर्मियों का कार्यकाल पूरा होने के बाद वे नागरिक जीवन में प्रवेश करते हैं. सरकार ने उनके अगले करियर के लिए रोजगार और कौशल मान्यता संबंधी पहल की व्यवस्था की है.
अग्निपथ योजना पर सेवाओं के सुझाव
चार साल के पहले चक्र के पूरा होने के साथ तीनों सेनाओं ने अग्निपथ योजना की समीक्षा की है. भारतीय वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि सेवा ने अपने अनुभव के आधार पर सुझाव दिए हैं. रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की कि थल सेना, नौसेना और वायु सेना ने सैन्य मामलों के विभाग को अपने सुझाव सौंप दिए हैं.
ये सुझाव 2022 से योजना के लागू होने के बाद भर्ती, प्रशिक्षण और कार्मिक प्रबंधन के अनुभव पर आधारित हैं. सभी सेवाओं के इनपुट को मिलाकर एक रिपोर्ट सक्षम अधिकारी के पास विचार के लिए भेज दी गई है. सुझावों का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है. इन्हें योजना में स्वीकृत बदलाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. किसी भी बदलाव का फैसला सक्षम प्राधिकारी पर निर्भर करेगा.
पूर्व अग्निवीरों के लिए रोजगार उपाय
चार साल बाद सेवा छोड़ने वालों के लिए सरकार ने रोजगार संबंधी उपाय किए हैं. गृह मंत्रालय ने जुलाई 2026 में घोषणा की कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और असम राइफल्स में कांस्टेबल (जनरल ड्यूटी) और राइफलमैन पदों की 50 प्रतिशत रिक्तियां पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षित रहेंगी.
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इसमें ऊपरी आयु सीमा में तीन साल की छूट दी गई है. पहले बैच के लिए अतिरिक्त पांच साल की छूट है. पात्र उम्मीदवारों को शारीरिक परीक्षण, शारीरिक दक्षता परीक्षण और लिखित परीक्षा से छूट भी दी गई है. गृह मंत्रालय ने पूर्व अग्निवीरों के रोजगार समन्वय के लिए एक समर्पित विंग भी स्थापित किया है.
रक्षा मंत्रालय ने भारतीय तटरक्षक बल, रक्षा नागरिक पदों और 16 रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में पात्र अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण मंजूर किया है. ये व्यवस्थाएं गृह मंत्रालय के ढांचे से अलग हैं.
राज्य स्तर पर आरक्षण
राज्य सरकारें भी पूर्व अग्निवीरों के लिए रोजगार उपाय कर रही हैं. हरियाणा ने राज्य के मूल निवासी पूर्व अग्निवीरों के लिए क्षैतिज आरक्षण लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं. छत्तीसगढ़ ने पुलिस में कांस्टेबल, वन विभाग में वन रक्षक और जेल विभाग में वार्डन पदों पर 10 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा की.
असम ने अक्टूबर 2026 में राज्य के मूल निवासी पूर्व अग्निवीरों के लिए पुलिस और संबद्ध बलों में 12 प्रतिशत आरक्षण मंजूर किया. इन लाभों का दायरा, प्रतिशत और लागू होना राज्य और भर्ती श्रेणी के अनुसार अलग-अलग है. उम्मीदवारों को संबंधित पात्रता शर्तें पूरी करनी होंगी.
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अग्निपथ योजना 2022 में शुरू हुई थी जिसमें चार साल की सेवा शामिल है. इसमें प्रशिक्षण भी शामिल है और अधिकतम 25 प्रतिशत को नियमित कैडर में लिया जा सकता है. सेवा छोड़ने वालों को सेवा निधि पैकेज मिलता है और वे सरकारी सेवाओं, सुरक्षा बलों, रक्षा संबंधी उपक्रमों तथा निजी क्षेत्र में अवसर तलाश सकते हैं.
आईएएफ की यह प्रक्रिया योजना के कार्यान्वयन का महत्वपूर्ण चरण है. तीनों सेवाओं का अनुभव, विचाराधीन सुझाव और पुनर्वास उपायों की प्रभावशीलता योजना के व्यापक आकलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. अभी आईएएफ की चयन और निकास प्रक्रिया पूरा होने के करीब है.
शिवानी शर्मा