लॉरेंस 10 साल से जेल में बंद, फिर कैसे चल रहा इंटरनेशनल क्राइम नेटवर्क? टाइगर श्रॉफ गोलीकांड से उठे 5 सवाल

टाइगर श्रॉफ से जुड़े गोलीकांड ने जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई के कथित नेटवर्क पर सवाल खड़े किए हैं. सलमान खान के घर के बाहर गोलीबारी और बाबा सिद्दीकी हत्याकांड के बाद बॉलीवुड की सुरक्षा फिर चर्चा में है. जांच का फोकस नेटवर्क, वसूली और कथित अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन पर है.

Advertisement
लॉरेंस बिश्नोई पहले दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद था. (Photo- ITG) लॉरेंस बिश्नोई पहले दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद था. (Photo- ITG)

आजतक ब्यूरो

  • नई दिल्ली,
  • 19 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 11:50 PM IST

बॉलीवुड की हस्तियां अलग-अलग हैं, लेकिन दहशत फैलाने का तरीका एक जैसा नजर आता है. सलमान खान से लेकर टाइगर श्रॉफ तक, फिल्मी दुनिया से जुड़ी हस्तियों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं ने एक बार फिर मुंबई में अंडरवर्ल्ड के पुराने दौर की यादें ताजा कर दी हैं. कभी दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी के नाम से खौफ खाने वाली मायानगरी में अब लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम बार-बार सामने आ रहा है.

Advertisement

सबसे बड़ा सवाल यही है कि लॉरेंस बिश्नोई करीब एक दशक से जेल में बंद है, फिर भी उसके नाम से जुड़ा नेटवर्क देश-विदेश में कैसे सक्रिय है? टाइगर श्रॉफ से जुड़े गोलीकांड ने इस सवाल को और गंभीर बना दिया है. आज सलमान खान 24 घंटे संगीनों के साए में जीने- को मजबूर हैं तो उसकी वजह कोई और नहीं बल्कि लॉरेंस बिश्नोई है.

जिस मुंबई में कभी दाऊद इब्राहिम की दहशत थी,आज उसी मुंबई में लॉरेंस गैंग का खौफ मंडरा रहा है.कोई नहीं जनता कि लॉरेंस गैंग की गोली पर किसका नाम- लिखा हुआ है.कब और कहां लॉरेंस गैंग का शिकार बन जाए.सवाल यही है क्या 90 के दशक का डर मुंबई में फिर जिंदा हो गया. 

90 के दशक में अंडरवर्ल्ड का राज

याद करिए 90 का दशक.जब मुंबई का अंडरवर्ल्ड बॉलीवुड पर सीधे राज करता था. दाऊद इब्राहिम की D-कंपनी, छोटा राजन और अरुण गवली इंडस्ट्री में फैसले लेते थे. फिल्मों की रिलीज,कास्टिंग और पैसों का लेन-देन समेत हर चीज पर इनका दबदबा था . गैंगस्टर सीधे तौर पर फिल्मों में पैसा लगाते थे, कलाकारों को दुबई बुलाकर धमकाते थे और न मानने पर सीधा हमला होता था . 

Advertisement

यह भी पढ़ें: टाइगर श्रॉफ गोलीकांड के तीनों शूटर वापस कोटा लाए गए, रात को मुंबई नहीं ले जाएगी पुलिस

अंडरवर्ल्ड ने 12 अगस्त 1997 को अपना सबसे खौफनाक चेहरा टी-सीरीज के मालिक और कैसेट किंग गुलशन कुमार की बेरहमी से हत्या कर दिखाया लेकिन साल 2000 के आते आते मुंबई में अंडरवर्ल्ड का खौफ कम होने लगा नवंबर 2002 में आखिरी बार दाऊद गैंग या डी कंपनी की तरफ से मुंबई में कोई शूटआउट हुआ. पुर्तगाल में गिरफ्तारी के बाद अबू सलेम का गैंग भी तितर-बितर हो चुका था. 

अंडरवर्ल्ड डॉन अरुण गवली के गैंग ने 2008 में मुंबई में आखिरी मर्डर किया, साल 2011 में क्राइम जर्नलिस्ट जे. डे. के का कत्ल छोटा राजन गैंग के हाथों हुआ आखिरी कत्ल साबित हुआ. कुल मिलाकर एक दो को छो़ड़ कर बाकी सभी डॉन और डॉन के गुर्गें जेलों में पहुंच चुके थे. लेकिन 20 साल बाद मुंबई अंडरवर्ल्ड में लॉरेंस गैंग ने दस्तक दी.

बॉलीवुड में अपना डर फैलाने के लिए लॉरेंस ने सलमान खान जैसे बड़े सितारे को चुना है. 2 साल पहले अप्रैल के महीने में लॉरेंस बिश्नोई के गैलेक्सी अपार्टमेंट में लॉरेंस के इशारे पर ही फायरिंग हुई. 2024 में ही अक्टूबर महीने में बाबा सिद्दीकी के हत्याकांड की जिम्मेदारी भी लॉरेंस ने ही ली तब भी सलमान से सिद्दीकी की करीबी का जिक्र खासतौर पर गैंग की तरफ से किया गया इसके बाद भी हमले नहीं रुके. इसी साल जून में गुरु रंधावा के जिम पर फायरिंग लॉरेंस गैंग ने की . 

Advertisement

साबरमती जेल में बंद लॉरेंस, बाहर कैसे सक्रिय है नेटवर्क?
लॉरेंस बिश्नोई साल 2023 से गुजरात की साबरमती सेंट्रल जेल में बंद है. जेल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सामने आए दावों के मुताबिक, उसे हाई सिक्योरिटी सेल में रखा गया है, जहां सीसीटीवी निगरानी और मुलाकात पर कड़े प्रतिबंध हैं. दूसरे राज्यों की पुलिस को भी उससे पूछताछ के लिए जेल पहुंचना पड़ता है. अदालतों में उसकी पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होने की बात भी सामने आती रही है.

लेकिन जेल में बंद होने का मतलब यह नहीं कि किसी गैंग का नेटवर्क अपने आप खत्म हो जाता है. संगठित अपराध के मामलों में बाहर मौजूद सहयोगी, कथित हैंडलर और अलग-अलग जगहों पर सक्रिय सदस्य नेटवर्क को चलाने में भूमिका निभा सकते हैं. जांच का असली सवाल यह है कि क्या इस मामले में भी ऐसा ही हुआ और यदि हुआ, तो निर्देश किसने दिए?

टाइगर श्रॉफ पर हमले की जिम्मेदारी से जुड़े सोशल मीडिया दावों और कथित ऑडियो को अपने आप में निर्णायक सबूत नहीं माना जा सकता. यह स्थापित करना पुलिस का काम है कि हमले की साजिश किसने रची, आरोपियों को किसने निर्देश दिए और क्या इसका लॉरेंस बिश्नोई से सीधा संबंध था.

निज्जर हत्याकांड के आरोपों से क्यों बढ़ती है जेल नेटवर्क पर बहस?
लॉरेंस बिश्नोई के कथित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को लेकर पहले भी गंभीर आरोप सामने आ चुके हैं. कनाडा में खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में अलग-अलग जांचों और आरोपों में लॉरेंस बिश्नोई के नेटवर्क का जिक्र किया गया है. हालांकि, इस तरह के आरोपों, अभियोजन के दावों और अदालत में साबित तथ्यों के बीच फर्क करना जरूरी है. किसी चार्जशीट या जांच एजेंसी के आरोप को अपने आप में दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता.

Advertisement

जेल में बंद व्यक्ति के कथित तौर पर बाहर सक्रिय नेटवर्क से संपर्क बनाए रखने की आशंका संगठित अपराध की जांच में अहम विषय है. लेकिन टाइगर श्रॉफ पर हुए हमले में जेल के अंदर से आदेश दिए जाने का कोई निष्कर्ष तभी निकाला जा सकता है, जब जांच में संचार, वित्तीय लेन-देन या दूसरे ठोस सबूत सामने आएं.

यह भी पढ़ें: लॉरेंस से पूछताछ में फंसा कानूनी पेच! टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में अब क्या करेगी मुंबई पुलिस

ऐसे मामलों में सिर्फ यह जानना पर्याप्त नहीं है कि आरोपी किसके संपर्क में था. यह भी पता लगाना जरूरी है कि बातचीत कब हुई, उसका मकसद क्या था और क्या उससे किसी आपराधिक वारदात की योजना या निर्देश का प्रमाण मिलता है.


साबरमती जेल प्रशासन से उठते हैं 5 बड़े सवाल
सवाल नंबर 1
: क्या जेल के अंदर मोबाइल फोन या किसी अन्य संचार माध्यम का इस्तेमाल हो रहा है?

अगर किसी बंद गैंगस्टर के निर्देश पर बाहर वारदातें हो रही हैं, तो जांच एजेंसियों को यह पता लगाना होगा कि निर्देश किस माध्यम से भेजे गए. जेल में मोबाइल फोन के इस्तेमाल की आशंका हो तो उसकी पुष्टि तकनीकी और भौतिक सबूतों से करनी होगी.

सवाल नंबर 2: क्या बाहर मौजूद सहयोगियों तक संदेश पहुंचाने का कोई दूसरा रास्ता है?

Advertisement

संचार सिर्फ मोबाइल फोन तक सीमित नहीं होता. मुलाकात, बिचौलियों या अन्य संपर्क माध्यमों की भूमिका भी जांच का विषय हो सकती है. सवाल यह है कि क्या इस मामले में किसी ऐसे माध्यम का इस्तेमाल हुआ और क्या जेल के नियमों का उल्लंघन किया गया?

सवाल नंबर 3: अगर जेल के अंदर से कोई संपर्क नहीं हुआ, तो बाहर नेटवर्क कैसे सक्रिय है?

किसी गिरोह के संचालन के लिए हर निर्देश सीधे उसके प्रमुख से आना जरूरी नहीं. बाहर मौजूद सहयोगी अपने स्तर पर फैसले ले सकते हैं या किसी दूसरे व्यक्ति के निर्देशों पर काम कर सकते हैं. जांच में यह अंतर स्पष्ट करना होगा कि टाइगर श्रॉफ पर हमले में किसकी क्या भूमिका थी.

सवाल नंबर 4: विदेश में बैठे कथित हैंडलर और भारत में सक्रिय सदस्यों के बीच तालमेल कौन संभाल रहा है?

अगर जांच में अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की पुष्टि होती है, तो पुलिस को विदेश में मौजूद कथित संचालकों, स्थानीय आरोपियों और वित्तीय नेटवर्क की कड़ियां जोड़नी होंगी. यह भी पता लगाना होगा कि क्या किसी एक व्यक्ति के निर्देश पर कार्रवाई हुई या नेटवर्क के अलग-अलग सदस्य स्वतंत्र रूप से काम कर रहे थे.

यह भी पढ़ें: दाऊद का दौर गया, लॉरेंस का खौफ आया… मुंबई में अंडरवर्ल्ड की नई दस्तक?

Advertisement

सवाल नंबर 5: टाइगर श्रॉफ पर हमले का आदेश किसने दिया और मकसद क्या था?

यही इस पूरे मामले का सबसे अहम सवाल है. क्या हमला वसूली के लिए किया गया, किसी धमकी को अंजाम देने के लिए या इसके पीछे कोई दूसरा मकसद था? क्या लॉरेंस बिश्नोई की इसमें सीधी भूमिका थी या उसके नाम का इस्तेमाल किया गया? इन सवालों का जवाब आरोपियों से पूछताछ, डिजिटल साक्ष्यों और दूसरे सबूतों से ही मिल सकता है.


टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि जेल में बंद कुख्यात अपराधियों के कथित नेटवर्क को कैसे रोका जाए. केवल जेल की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा पर्याप्त नहीं होगी. जरूरत इस बात की है कि बाहर सक्रिय सहयोगियों, संचार के संभावित माध्यमों, पैसों के लेन-देन और हमले की योजना से जुड़े लोगों की पहचान की जाए.
 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »